1,847 इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स पर केंद्र का खर्च ₹21.97 लाख करोड़ पहुँचा, कुल बजट का 54% व्यय
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार के 1,847 बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर पूंजीगत व्यय जून 2026 तक ₹21.97 लाख करोड़ तक पहुँच गया है — जो इन परियोजनाओं के लिए निर्धारित ₹40.54 लाख करोड़ के कुल अनुमानित निवेश का 54 प्रतिशत से अधिक है। 10 अगस्त 2026 को जारी सरकारी फैक्टशीट में यह जानकारी सामने आई।
मुख्य घटनाक्रम
फैक्टशीट के अनुसार, इन परियोजनाओं में से 709 प्रोजेक्ट्स में 80 प्रतिशत से अधिक भौतिक कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 337 अन्य प्रोजेक्ट्स में 80 प्रतिशत से अधिक वित्तीय व्यय भी संपन्न हो गया है। यह आँकड़ा इंगित करता है कि बड़े पैमाने पर परियोजनाएँ अपने अंतिम चरण में हैं।
कनेक्टिविटी को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र 1,341 परियोजनाओं के साथ सबसे बड़ा हिस्सेदार है, जिनकी अनुमानित लागत ₹22.32 लाख करोड़ है।
PAIMANA डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा विकसित PAIMANA (प्रोजेक्ट असेसमेंट, इन्फ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग और एनालिटिक्स फॉर नेशन-बिल्डिंग) डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिये इन परियोजनाओं की निगरानी की जा रही है। यह प्लेटफॉर्म ₹150 करोड़ या उससे अधिक लागत वाले सभी चल रहे केंद्रीय क्षेत्र के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को ट्रैक करता है।
PAIMANA ने 16 अप्रैल 2026 को एक समर्पित 'परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड' लॉन्च किया, जो प्रमुख इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों के प्रदर्शन संकेतकों को एक ही डिजिटल इंटरफेस पर एकत्रित करता है।
डैशबोर्ड का विस्तार और कवरेज
परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड में अब 165 संकेतक शामिल हैं, जिनमें 54 नए संकेतक हाल ही में जोड़े गए हैं। यह डैशबोर्ड छह इन्फ्रास्ट्रक्चर उप-क्षेत्रों — बिजली, नागरिक उड्डयन, दूरसंचार, रेलवे, सड़कें और बंदरगाह, शिपिंग व जलमार्ग — को कवर करता है। संकेतक संबंधित मंत्रालयों और विभागों द्वारा उपलब्ध कराए गए आधिकारिक डेटा से संकलित किए जाते हैं और समय-समय पर अपडेट होते हैं।
यह एकल डिजिटल इंटरफेस नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और हितधारकों के लिए इंटरैक्टिव विज़ुअलाइजेशन और टाइम-सीरीज़ विश्लेषण की सुविधा प्रदान करता है।
आम जनता पर असर
ये परियोजनाएँ देश की आर्थिक वृद्धि दर को गति देने और रोज़गार के अवसर बढ़ाने में सहायक मानी जा रही हैं। परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भारी निवेश से आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता बढ़ने और दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुधरने की उम्मीद है।
आगे की राह
जैसे-जैसे परियोजनाएँ अपने अंतिम चरण में पहुँच रही हैं, सरकार की निगरानी प्रणाली की परीक्षा इस बात पर होगी कि क्या शेष ₹18.57 लाख करोड़ का व्यय समयसीमा और गुणवत्ता मानकों के भीतर पूरा होता है। PAIMANA के विस्तारित डैशबोर्ड से पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है, हालाँकि डेटा की वास्तविक समयबद्धता और सटीकता की जाँच स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा अभी बाकी है।