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केंद्र सरकार की Q1 शुद्ध प्राप्तियां ₹10.49 लाख करोड़, वार्षिक लक्ष्य का 28.7% हासिल

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केंद्र सरकार की Q1 शुद्ध प्राप्तियां ₹10.49 लाख करोड़, वार्षिक लक्ष्य का 28.7% हासिल

सारांश

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में केंद्र की शुद्ध प्राप्तियां ₹10.49 लाख करोड़ रहीं — वार्षिक लक्ष्य का 28.7%। कैपेक्स 23.7% उछला, राजकोषीय घाटा बजट अनुमान के 18.2% पर नियंत्रित।

मुख्य बातें

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में केंद्र की कुल शुद्ध प्राप्तियां ₹10,49,243 करोड़ — वार्षिक बजट अनुमान का 28.7% , पिछले वर्ष से 11.5% अधिक।
शुद्ध कर राजस्व ₹6,36,576 करोड़ ; गैर-कर राजस्व ₹3,77,664 करोड़ ; गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियां ₹35,003 करोड़ ।
कुल व्यय ₹13,57,076 करोड़ — बजट अनुमान का 25.4% ; बुनियादी ढांचे पर कैपेक्स 23.7% बढ़कर ₹3,40,258 करोड़ ।
राजकोषीय घाटा लगभग ₹3.1 लाख करोड़ — पूरे वर्ष के बजट अनुमान का 18.2% ।
राज्यों को कर हस्तांतरण ₹2,63,336 करोड़ — पिछले वर्ष की तुलना में ₹63,605 करोड़ कम।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.3% ।

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में राजकोषीय अनुशासन की राह पर मज़बूत कदम रखे हैं। 5 अगस्त 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक केंद्र की कुल शुद्ध प्राप्तियां ₹10,49,243 करोड़ रहीं — जो पूरे वित्त वर्ष के बजट अनुमान का 28.7 प्रतिशत है और पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 11.5 प्रतिशत अधिक है।

प्राप्तियों का विवरण

पहली तिमाही में सरकार को ₹6,36,576 करोड़ का शुद्ध कर राजस्व प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त ₹3,77,664 करोड़ गैर-कर राजस्व और ₹35,003 करोड़ गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियों के रूप में सरकारी खाते में आए। इस अवधि में केंद्र ने राज्यों को करों में उनके हिस्से के रूप में ₹2,63,336 करोड़ हस्तांतरित किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में ₹63,605 करोड़ कम है।

व्यय और पूंजीगत खर्च

जून 2026 तक केंद्र सरकार का कुल व्यय ₹13,57,076 करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष के बजट अनुमान का 25.4 प्रतिशत है। बुनियादी ढांचे पर खर्च में उल्लेखनीय तेज़ी देखी गई — राजमार्ग, रेलवे और बंदरगाह जैसी परियोजनाओं पर पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) 23.7 प्रतिशत बढ़कर ₹3,40,258 करोड़ पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह लगभग ₹2.75 लाख करोड़ था।

राजस्व व्यय में ₹3,46,414 करोड़ ब्याज भुगतान पर खर्च हुए। वहीं एलपीजी जैसे पेट्रोलियम उत्पादों और उर्वरक सब्सिडी पर ₹1,14,812 करोड़ व्यय किए गए।

राजकोषीय घाटे की स्थिति

आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में राजकोषीय घाटा लगभग ₹3.1 लाख करोड़ रहा, जो पूरे वित्त वर्ष के बजट अनुमान का 18.2 प्रतिशत है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.4 प्रतिशत हासिल किया था। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इसे और घटाकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों के अनुसार, राजकोषीय घाटे में कमी अर्थव्यवस्था की बुनियाद को मज़बूत बनाती है और मूल्य स्थिरता के साथ विकास का मार्ग प्रशस्त करती है। उनका कहना है कि इससे सरकार की उधारी घटती है, जिससे बैंकिंग प्रणाली में कॉर्पोरेट और उपभोक्ताओं को ऋण देने के लिए अधिक पूंजी उपलब्ध होती है — और इसके परिणामस्वरूप निवेश, मांग तथा आर्थिक विकास को गति मिलती है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की वृहद आर्थिक स्थिरता पर निवेशकों की नज़र टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बारीकी से देखें तो राज्यों को कर हस्तांतरण में ₹63,605 करोड़ की कमी एक अहम संकेत है — यह केंद्र के आंकड़ों को बेहतर दिखाती है, पर राज्यों की वित्तीय स्थिति पर दबाव डाल सकती है। कैपेक्स में 23.7% की बढ़ोतरी सकारात्मक है, लेकिन ब्याज भुगतान पर ₹3,46,414 करोड़ का व्यय यह भी दर्शाता है कि ऋण-सेवा का बोझ बजट की लचीलापन को सीमित कर रहा है। 4.3% के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पाना तभी टिकाऊ होगा जब राजस्व वृद्धि की यह रफ़्तार साल के बाकी महीनों में भी बनी रहे।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में केंद्र की शुद्ध प्राप्तियां कितनी रहीं?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 में केंद्र की कुल शुद्ध प्राप्तियां ₹10,49,243 करोड़ रहीं, जो पूरे वित्त वर्ष के बजट अनुमान का 28.7% है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 11.5% अधिक है।
Q1 2026-27 में राजकोषीय घाटा कितना रहा?
पहली तिमाही में राजकोषीय घाटा लगभग ₹3.1 लाख करोड़ रहा, जो पूरे वित्त वर्ष के बजट अनुमान का 18.2% है। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.3% पर रखने का लक्ष्य तय किया है।
सरकार ने बुनियादी ढांचे पर कितना खर्च किया?
पहली तिमाही में राजमार्ग, रेलवे और बंदरगाह जैसी परियोजनाओं पर पूंजीगत व्यय 23.7% बढ़कर ₹3,40,258 करोड़ पहुंच गया। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह लगभग ₹2.75 लाख करोड़ था।
राज्यों को कर हस्तांतरण में कमी क्यों आई?
इस तिमाही में केंद्र ने राज्यों को ₹2,63,336 करोड़ हस्तांतरित किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में ₹63,605 करोड़ कम है। हालांकि आधिकारिक आंकड़ों में इस कमी का विशेष कारण नहीं बताया गया है।
राजकोषीय घाटे में कमी से आम जनता को क्या फायदा होता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, राजकोषीय घाटे में कमी से सरकार की उधारी घटती है, जिससे बैंकों के पास कॉर्पोरेट और उपभोक्ताओं को सस्ते ऋण देने की क्षमता बढ़ती है। इससे निवेश, मांग और समग्र आर्थिक विकास को गति मिलती है।
राष्ट्र प्रेस
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