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भारत का राजकोषीय घाटा Q1 2026-27 में ₹3.1 लाख करोड़, वार्षिक लक्ष्य का 18.2% हुआ खर्च

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भारत का राजकोषीय घाटा Q1 2026-27 में ₹3.1 लाख करोड़, वार्षिक लक्ष्य का 18.2% हुआ खर्च

सारांश

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में राजकोषीय घाटा ₹3.1 लाख करोड़ पर पहुंचा — सालाना आधार पर बढ़त, लेकिन लक्ष्य के भीतर। कर राजस्व में मजबूती और रेकॉर्ड कैपेक्स के बीच सब्सिडी का बढ़ता बोझ आगे की असली परीक्षा होगी।

मुख्य बातें

CGA के आंकड़ों के अनुसार Q1 2026-27 (अप्रैल-जून) में राजकोषीय घाटा ₹3.1 लाख करोड़ रहा, जो वार्षिक बजटीय लक्ष्य का 18.2 प्रतिशत है।
पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में घाटा ₹2.8 लाख करोड़ था — सालाना वृद्धि मुख्यतः बढ़े हुए सरकारी व्यय के कारण।
पूरे वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य ₹16.96 लाख करोड़ यानी GDP का 4.3% निर्धारित है।
शुद्ध कर राजस्व ₹6.4 लाख करोड़ तक पहुंचा, पिछले वर्ष ₹5.4 लाख करोड़ था।
पूंजीगत व्यय ₹3.4 लाख करोड़ — बंदरगाह, राजमार्ग और रेलवे पर जोर; पिछले वर्ष ₹2.75 लाख करोड़ था।
पेट्रोलियम और उर्वरक सब्सिडी के कारण शेष वित्त वर्ष में घाटे पर अतिरिक्त दबाव की आशंका।

कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) द्वारा 31 जुलाई 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत का राजकोषीय घाटा ₹3.1 लाख करोड़ रहा, जो पूरे वर्ष के बजटीय लक्ष्य का 18.2 प्रतिशत है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आंकड़ा ₹2.8 लाख करोड़ था, यानी सालाना आधार पर घाटे में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

राजकोषीय घाटे का संदर्भ और सरकारी लक्ष्य

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल ₹16.96 लाख करोड़ के राजकोषीय घाटे का बजटीय अनुमान तय किया है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 4.3 प्रतिशत है। यह राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत सरकार घाटे को क्रमिक रूप से कम करने का प्रयास कर रही है। गौरतलब है कि 2025-26 में सरकार ने GDP के 4.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल किया था।

राजस्व संग्रह में मजबूती

अप्रैल-जून तिमाही में शुद्ध कर राजस्व बढ़कर ₹6.4 लाख करोड़ हो गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह ₹5.4 लाख करोड़ था। आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के कर संग्रह में मजबूत वृद्धि बनी हुई है।

इसी अवधि में गैर-कर राजस्व भी ₹3.8 लाख करोड़ तक पहुंचा, जो पिछले वर्ष के ₹3.7 लाख करोड़ से अधिक है। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से प्राप्त लाभांश, स्पेक्ट्रम राजस्व तथा सरकारी शुल्क प्रमुख रूप से शामिल हैं।

सरकारी व्यय में तेज़ी, पूंजीगत खर्च में बड़ी छलांग

अप्रैल-जून तिमाही में सरकार का कुल व्यय बढ़कर ₹13.6 लाख करोड़ हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में ₹12.2 लाख करोड़ था। इसमें सबसे उल्लेखनीय वृद्धि पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में रही।

बंदरगाहों, राष्ट्रीय राजमार्गों और रेलवे जैसी प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं पर खर्च बढ़कर ₹3.4 लाख करोड़ हो गया, जो पिछले वर्ष ₹2.75 लाख करोड़ था। यह वृद्धि दर्शाती है कि सरकार बुनियादी ढांचे में निवेश की रफ्तार बरकरार रख रही है।

सब्सिडी का दबाव और आगे की चुनौतियाँ

हालांकि, पेट्रोलियम उत्पादों और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के कारण आने वाले महीनों में सब्सिडी व्यय बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो शेष वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

अर्थशास्त्रियों की राय

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण से अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत होती है और मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने में मदद मिलती है। साथ ही, सरकारी उधारी कम होने से बैंकिंग प्रणाली में अधिक तरलता उपलब्ध होती है, जिससे उद्योगों और उपभोक्ताओं को सस्ता ऋण मिलने की संभावना बढ़ती है। यह ऐसे समय में आया है जब RBI मौद्रिक नीति में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती दूसरी और तीसरी तिमाही में है जब सब्सिडी का बोझ परंपरागत रूप से बढ़ता है। कैपेक्स में तेज़ी सराहनीय है, परंतु यह तभी टिकाऊ होगी जब राजस्व संग्रह की गति बनी रहे और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें काबू में रहें। GDP के 4.3 प्रतिशत का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है — खासकर तब जब पेट्रोलियम और उर्वरक सब्सिडी पर दबाव बढ़ रहा हो। राजकोषीय अनुशासन की असली परीक्षा बजट के आंकड़ों में नहीं, बल्कि दिसंबर तक के व्यय प्रबंधन में होगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत का राजकोषीय घाटा कितना रहा?
CGA के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत का राजकोषीय घाटा ₹3.1 लाख करोड़ रहा, जो पूरे वित्त वर्ष के बजटीय लक्ष्य का 18.2 प्रतिशत है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह ₹2.8 लाख करोड़ था।
सरकार ने 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का क्या लक्ष्य तय किया है?
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹16.96 लाख करोड़ का राजकोषीय घाटा निर्धारित किया है, जो GDP का 4.3 प्रतिशत है। यह 2025-26 के 4.4 प्रतिशत के लक्ष्य से कम है और राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की दिशा में क्रमिक कदम है।
पहली तिमाही में सरकार का कुल व्यय कितना रहा?
अप्रैल-जून 2026 में सरकार का कुल व्यय ₹13.6 लाख करोड़ रहा, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह ₹12.2 लाख करोड़ था। पूंजीगत व्यय बढ़कर ₹3.4 लाख करोड़ हुआ, जो बंदरगाहों, राष्ट्रीय राजमार्गों और रेलवे पर केंद्रित रहा।
राजकोषीय घाटे में कमी से आम नागरिकों को क्या फायदा होता है?
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, राजकोषीय घाटा कम होने से सरकारी उधारी घटती है, जिससे बैंकिंग प्रणाली में अधिक तरलता उपलब्ध होती है। इससे उद्योगों और उपभोक्ताओं को सस्ता कर्ज मिलने की संभावना बढ़ती है और मुद्रास्फीति पर नियंत्रण में भी मदद मिलती है।
क्या आगे आने वाले महीनों में राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है?
पेट्रोलियम उत्पादों और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के कारण सब्सिडी व्यय बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यदि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो शेष वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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