फरवरी के अंत तक भारत का राजकोषीय घाटा बजट लक्ष्य का 80 प्रतिशत तक पहुँचा
सारांश
Key Takeaways
- राजकोषीय घाटा: 12.52 लाख करोड़ रुपए
- बजट लक्ष्य का: 80.5 प्रतिशत
- राजस्व प्राप्ति: 27,91,943 करोड़ रुपए
- सरकारी व्यय: 40,44,592 करोड़ रुपए
- भविष्य का लक्ष्य: 4.3 प्रतिशत तक राजकोषीय घाटा कम करना
नई दिल्ली, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष 26 की शुरुआत से लेकर फरवरी के अंत तक 12.52 लाख करोड़ रुपए रहा है, जो कि वित्त वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्य 15.58 लाख करोड़ रुपए का 80.5 प्रतिशत है। यह जानकारी वित्त मंत्रालय ने साझा की।
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत सरकार को फरवरी 2026 तक 27,91,943 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं, जो कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित संशोधित अनुमान का 82 प्रतिशत है।
इनमें 21,45,223 करोड़ रुपए कर राजस्व (केंद्र को प्राप्त शुद्ध राशि), 5,81,173 करोड़ रुपए गैर-कर राजस्व और 65,547 करोड़ रुपए की गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियां शामिल हैं। इस अवधि में भारत सरकार ने राज्य सरकारों को करों के हिस्से के हस्तांतरण के रूप में 12,66,369 करोड़ रुपए का भुगतान किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 85,837 करोड़ रुपए अधिक है।
इस दौरान भारत सरकार का कुल व्यय 40,44,592 करोड़ रुपए रहा, जो कि वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित कुल व्यय अनुमान का 81.5 प्रतिशत है, जिसमें से 31,15,270 करोड़ रुपए राजस्व मद पर और 9,29,322 करोड़ रुपए पूंजी मद पर व्यय किए गए हैं।
कुल राजस्व व्यय में से 10,65,305 करोड़ रुपए ब्याज भुगतान और 3,89,610 करोड़ रुपए प्रमुख सब्सिडी पर व्यय किए गए हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा है।
1 फरवरी को बजट भाषण में उन्होंने कहा कि सरकार ने 2025-26 के बजट में राजकोषीय घाटे को 4.4 प्रतिशत तक कम करने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा किया है और आगे इसे 4.3 प्रतिशत तक लाने का प्रयास करेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यह लक्ष्य आर्थिक विकास को बनाए रखने और सार्वजनिक वित्त को स्थिर करने के बीच संतुलन को दर्शाता है।
राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और कुल राजस्व के बीच का अंतर होता है।