एसोचैम: मोदी के 'सप्त धारा' विजन से भारतीय उद्योग जगत में नया आत्मविश्वास, 2047 के लक्ष्य को मिला बल
सारांश
मुख्य बातें
उद्योग संगठन एसोचैम (ASSOCHAM) ने 15 अगस्त 2026 को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रस्तुत भारत के विकास-विजन ने देश के औद्योगिक और कारोबारी समुदाय में नई ऊर्जा और भरोसा भरा है। संगठन के अनुसार, आत्मनिर्भरता, 'वोकल फॉर लोकल', घरेलू विनिर्माण और रणनीतिक क्षमताओं को सुदृढ़ करने पर दिया गया जोर देश की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती की दिशा में निर्णायक कदम है।
सप्त धारा विजन: समावेशी विकास का रोडमैप
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल कुमार मिंडा ने प्रधानमंत्री मोदी के 2047 तक भारत को 'विकसित राष्ट्र' बनाने के संकल्प की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य के लिए प्रस्तुत 'सप्त धारा' विजन ढाँचा समावेशी, टिकाऊ और तीव्र आर्थिक विकास का व्यापक रोडमैप प्रदान करता है। मिंडा के अनुसार, यह बहुआयामी दृष्टिकोण भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा।
महत्वपूर्ण खनिज, सेमीकंडक्टर और ऊर्जा सुरक्षा
मिंडा ने महत्वपूर्ण खनिजों और सेमीकंडक्टर निर्माण में आत्मनिर्भरता बढ़ाने तथा आयात निर्भरता घटाने पर सरकार के ध्यान को 'बेहद सकारात्मक कदम' बताया। उनका कहना है कि इन क्षेत्रों में स्वावलंबन से भारत की रणनीतिक और औद्योगिक क्षमता को नई धार मिलेगी।
एसोचैम ने प्रधानमंत्री की 200 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने और पाँच नए परमाणु रिएक्टरों की स्थापना की घोषणा का भी स्वागत किया। संगठन के अनुसार, यह पहल दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और उद्योगों को विश्वसनीय व किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
युवा और एआई कौशल: उद्योग की सबसे बड़ी उम्मीद
एसोचैम अध्यक्ष ने युवाओं के लिए घोषित मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग और एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ा कौशल प्रशिक्षण देने की योजना की विशेष प्रशंसा की। मिंडा ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है — यदि उन्हें उभरती तकनीकों में दक्ष बनाया जाए, तो उत्पादकता, रोजगार क्षमता और नवाचार को नई गति मिलेगी।
फॉर्च्यून 500 और वैश्विक व्यापार का आह्वान
मिंडा ने प्रधानमंत्री के उस आह्वान को भी महत्वपूर्ण बताया जिसमें 50 भारतीय कंपनियों को फॉर्च्यून ग्लोबल 500 की सूची में और एक भारतीय बैंक को दुनिया के शीर्ष पाँच बैंकों में शामिल कराने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने माना कि इसके लिए नवाचार, बड़े पैमाने पर विस्तार, पूंजी तक पहुँच और कारोबार सुगमता में निरंतर सुधार की आवश्यकता होगी।
एसोचैम ने मुक्त व्यापार समझौतों (FTA), गहरे समुद्री अन्वेषण और रणनीतिक क्षेत्रों में भारत की उपस्थिति विस्तार पर दिए गए जोर का भी स्वागत किया। संगठन का मानना है कि नए बाजारों तक पहुँच और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में गहरे एकीकरण से भारतीय उद्योगों, एमएसएमई (MSME) और निर्यातकों के लिए नए अवसरों के द्वार खुलेंगे।
कानूनी सुधार और कार्य संस्कृति पर जोर
मिंडा ने पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को आधुनिक बनाने तथा कार्य संस्कृति में दक्षता, जवाबदेही और प्रतिबद्धता बढ़ाने के प्रधानमंत्री के आह्वान की भी प्रशंसा की। उनके अनुसार, ऐसे संरचनात्मक सुधार भारत को अधिक प्रतिस्पर्धी, नवाचार-आधारित और निवेश-अनुकूल अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करेंगे। गौरतलब है कि यह समर्थन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बीच भारत अपनी आर्थिक रणनीति को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।