विकसित भारत 2047: मोदी का 100 GW परमाणु ऊर्जा लक्ष्य, फॉर्च्यून 500 में 50 भारतीय कंपनियों का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए विकसित भारत 2047 का व्यापक औद्योगिक और ऊर्जा रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का संकल्प लिया और फॉर्च्यून 500 सूची में 50 भारतीय कंपनियों को स्थान दिलाने का लक्ष्य घोषित किया। यह भाषण ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, फार्मा और वैश्विक व्यापार — हर मोर्चे पर भारत की महत्वाकांक्षा को रेखांकित करता है।
परमाणु ऊर्जा: आत्मनिर्भरता की नई दिशा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल करना होगा। इसके लिए उन्होंने अगले छह से सात वर्षों में पाँच नए परमाणु रिएक्टर चालू करने की योजना का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने इस वर्ष फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में महारत हासिल की है, जो परमाणु ईंधन के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
गौरतलब है कि भारत दशकों से परमाणु ईंधन के लिए आयात पर निर्भर रहा है। फास्ट ब्रीडर तकनीक इस निर्भरता को कम करने और घरेलू थोरियम भंडारों के दोहन का रास्ता खोलती है — यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा संकट ने परमाणु विकल्पों को फिर से प्रासंगिक बना दिया है।
सौर और पाइप्ड गैस: ऊर्जा क्षेत्र की प्रगति
मोदी ने बताया कि 2014 में देश की सौर ऊर्जा क्षमता मात्र 2 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर 160 गीगावाट हो चुकी है। 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' के तहत अब तक 50 लाख से अधिक परिवार सौर ऊर्जा अपना चुके हैं।
पाइप्ड गैस के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। 2014 से पहले केवल 70 शहरों में यह सुविधा उपलब्ध थी, जो अब 700 शहरों तक पहुँच गई है। पाइप्ड गैस से जुड़े घरों की संख्या 20-22 लाख से बढ़कर लगभग 1.75 करोड़ हो गई है।
सेमीकंडक्टर और वैश्विक सप्लाई चेन
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले एक से दो वर्षों में 7 से 8 नए सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित होने की उम्मीद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को केवल असेंबली तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि डिज़ाइन से लेकर विनिर्माण तक संपूर्ण आपूर्ति शृंखला में अपनी भूमिका सुनिश्चित करनी होगी।
उन्होंने कहा, "भारत को केवल कंपोनेंट नहीं, बल्कि जटिल और उन्नत उत्पादों का निर्माण भी करना होगा। डिज़ाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का भरोसेमंद केंद्र बनना है।"
फार्मा और मेडटेक: नवाचार की ओर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय दवा कंपनियों को दुनिया की शीर्ष पाँच फार्मा कंपनियों में स्थान बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल 'दुनिया की फार्मेसी' नहीं रह गया, बल्कि नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। आर एंड डी (R&D), बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स और अत्याधुनिक उपचार तकनीकों पर सरकार विशेष ज़ोर दे रही है।
मेडटेक क्षेत्र में भारत का बाज़ार वर्तमान में 15 से 16 अरब डॉलर का है और लगभग 12 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। यह एशिया का चौथा सबसे बड़ा और दुनिया के शीर्ष 20 मेडटेक बाज़ारों में शामिल है। हालिया आकलनों के अनुसार, यह क्षेत्र 2047 तक 250 अरब डॉलर के बाज़ार के रूप में उभर सकता है। PLI योजना के तहत पहले ही 50 से अधिक उच्च तकनीक वाले मेडिकल उपकरणों का घरेलू उत्पादन शुरू हो चुका है।
वैश्विक कारोबार और 'सप्त धारा'
मोदी ने लक्ष्य रखा कि फॉर्च्यून 500 सूची में 50 भारतीय कंपनियाँ शामिल हों और भारत का कम से कम एक बैंक दुनिया के शीर्ष पाँच बैंकों में अपनी जगह बनाए। उन्होंने 'सप्त धारा' का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सात प्रमुख शक्तियाँ भारत को अगले विकास चरण तक पहुँचाने की गति और क्षमता प्रदान करेंगी। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब ऊर्जा, तकनीक, विनिर्माण, स्वास्थ्य और वैश्विक व्यापार — हर क्षेत्र में भारतीय कंपनियाँ विश्व मंच पर अपनी मजबूत पहचान बनाएँ।