भारत की परमाणु ऊर्जा में ऐतिहासिक सफलता: वैज्ञानिकों का अभिनंदन
सारांश
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नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने वैज्ञानिक प्रगति और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जिसका विवरण गुरुवार को संसद में प्रस्तुत किया गया। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने बताया कि 6 अप्रैल 2026 को तमिलनाडु के कल्पक्कम में भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। देश का 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने पहली बार क्रिटिकलिटी हासिल की है, जिसका अर्थ है कि रिएक्टर में नियंत्रित और स्थायी परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया सफलतापूर्वक आरंभ हो गई है।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, उद्योगों और परमाणु ऊर्जा विभाग के हजारों कर्मचारियों के सतत प्रयासों का परिणाम है। यह उपलब्धि भारत के परमाणु ऊर्जा मिशन को और अधिक मजबूत करने के साथ ही नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सदन में बताया गया कि इस रिएक्टर का कोर लोडिंग मार्च 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में किया गया था। भारत की परमाणु नीति तीन चरणों पर आधारित है, जिसका उद्देश्य सीमित यूरेनियम संसाधनों और प्रचुर थोरियम भंडार का अधिकतम उपयोग करना है।
पहले चरण में प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग कर प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर के माध्यम से प्लूटोनियम तैयार किया जाता है। दूसरे चरण में, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के जरिए प्लूटोनियम से अधिक परमाणु ईंधन उत्पन्न किया जाएगा। इस तकनीक की विशेषता यह है कि यह जितना ईंधन खर्च करता है, उससे अधिक उत्पन्न कर सकता है। तीसरे चरण में, थोरियम आधारित रिएक्टर विकसित किए जाएंगे, जिससे दीर्घकालिक और टिकाऊ ऊर्जा का भविष्य सुनिश्चित होगा।
सदन को यह भी बताया गया कि दिसंबर 2025 में पारित परमाणु ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित कानून के माध्यम से इस क्षेत्र को व्यापक भागीदारी के लिए खोला गया है। देश 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। यह रिएक्टर पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है, जिसका डिजाइन इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र ने तैयार किया है, जबकि निर्माण भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम द्वारा किया गया है, जिसमें भारतीय उद्योगों की महत्वपूर्ण भागीदारी रही है।
यह ध्यान देने योग्य है कि इस उपलब्धि के साथ, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने इस उन्नत तकनीक में महारत हासिल की है। इसे देश की वैज्ञानिक क्षमता, नवाचार और सामूहिक प्रयास का प्रतीक बताया गया है। सदन में कहा गया कि यह उपलब्धि न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह भारत के सुरक्षित, टिकाऊ और आत्मनिर्भर भविष्य की मजबूत नींव भी रखती है। पूरे सदन ने इस ऐतिहासिक सफलता के लिए सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीशियनों और संबंधित सभी हितधारकों के प्रति आभार व्यक्त किया।