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विक्रम मिस्री ने भाविनी और आईआईटी मद्रास का दौरा किया, पीएफबीआर की प्रगति की समीक्षा

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विक्रम मिस्री ने भाविनी और आईआईटी मद्रास का दौरा किया, पीएफबीआर की प्रगति की समीक्षा

सारांश

विदेश सचिव विक्रम मिस्री का कल्पक्कम और आईआईटी मद्रास दौरा महज़ औपचारिकता नहीं था — यह भारत के स्वदेशी परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को कूटनीतिक महत्व देने का संकेत है। अप्रैल 2026 में फर्स्ट क्रिटिकलिटी हासिल करने के बाद पीएफबीआर अब व्यावसायिक संचालन की दहलीज़ पर है।

मुख्य बातें

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 5 जून 2026 को भाविनी (कल्पक्कम) और आईआईटी मद्रास का दौरा किया।
500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने 6 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक फर्स्ट क्रिटिकलिटी हासिल की थी।
पीएफबीआर की तकनीक इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र ने स्वदेशी रूप से विकसित की है; निर्माण और संचालन भाविनी के जिम्मे है।
मिस्री ने आईआईटी मद्रास के अंतरराष्ट्रीय छात्रों के डिग्री वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।
उन्होंने छात्रों से वैश्विक दक्षिण के विकास में योगदान देने का आग्रह किया।

विदेश सचिव एवं परमाणु ऊर्जा आयोग के सदस्य विक्रम मिस्री ने 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर तमिलनाडु के कल्पक्कम स्थित भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास का दौरा किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शनिवार को एक्स पर पोस्ट कर इस दौरे की जानकारी साझा की।

भाविनी में पीएफबीआर की प्रगति की समीक्षा

भाविनी परिसर में मिस्री ने वैज्ञानिकों और वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने भारत के 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) की नवीनतम प्रगति की जानकारी ली। गौरतलब है कि 6 अप्रैल 2026 की रात इस रिएक्टर ने सफलतापूर्वक फर्स्ट क्रिटिकलिटी हासिल की थी — वह निर्णायक चरण जब रिएक्टर में नियंत्रित परमाणु विखंडन की प्रक्रिया आरंभ होती है। यह भारत के परमाणु ऊर्जा इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी गई।

विश्व पर्यावरण दिवस के प्रतीक के रूप में मिस्री ने भाविनी परिसर में बकुल (मौलश्री) का पौधा भी रोपा।

पीएफबीआर की तकनीकी विशेषताएँ

यह रिएक्टर भारत की दीर्घकालिक परमाणु ऊर्जा रणनीति की धुरी है। पारंपरिक थर्मल रिएक्टरों के विपरीत, पीएफबीआर में यूरेनियम-प्लूटोनियम मिक्स्ड ऑक्साइड (एमओएक्स) फ्यूल का उपयोग किया जाता है, जो ऊर्जा उत्पादन को अधिक कुशल बनाता है और ईंधन उपयोग की क्षमता को भी बढ़ाता है। इस रिएक्टर की तकनीक और डिजाइन परमाणु ऊर्जा विभाग के अनुसंधान केंद्र इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र ने स्वदेशी रूप से विकसित किया है, जबकि निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी भाविनी को सौंपी गई है।

आईआईटी मद्रास में अंतरराष्ट्रीय छात्रों को संबोधन

उसी दिन मिस्री आईआईटी मद्रास के अंतरराष्ट्रीय छात्रों के डिग्री वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। इस समारोह में विभिन्न देशों से आए छात्रों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।

अपने संबोधन में मिस्री ने सभी स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए कहा, 'आज दुनिया तेजी से तकनीकी परिवर्तन के दौर से गुजर रही है और ऐसे समय में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।' उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे आईआईटी मद्रास में अर्जित ज्ञान, कौशल और अनुभव का उपयोग मानवता की चुनौतियों के समाधान और वैश्विक दक्षिण के देशों के विकास में योगदान देने के लिए करें।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्व

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को तेज़ी से विस्तारित करने की दिशा में काम कर रहा है। फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कार्यक्रम भारत की तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा रणनीति का दूसरा चरण है, जिसका उद्देश्य देश के विशाल थोरियम भंडार का दोहन करने की दिशा में आगे बढ़ना है। पीएफबीआर की फर्स्ट क्रिटिकलिटी इस दिशा में दशकों की वैज्ञानिक मेहनत का परिणाम है। आने वाले महीनों में रिएक्टर के पूर्ण व्यावसायिक संचालन की ओर प्रगति की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कूटनीतिक प्राथमिकता के रूप में भी देख रहा है। पीएफबीआर की फर्स्ट क्रिटिकलिटी दशकों की देरी के बाद आई है — असली कसौटी अब व्यावसायिक संचालन की समयसीमा और लागत-दक्षता होगी। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत 2047 तक ऊर्जा स्वतंत्रता के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और परमाणु ऊर्जा उसमें एक बड़ी भूमिका निभाने की उम्मीद है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विक्रम मिस्री ने भाविनी का दौरा क्यों किया?
विदेश सचिव एवं परमाणु ऊर्जा आयोग के सदस्य विक्रम मिस्री ने 5 जून 2026 को भाविनी का दौरा कर 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने वैज्ञानिकों और अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की और परिसर में पौधारोपण भी किया।
प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) क्या है?
पीएफबीआर कल्पक्कम, तमिलनाडु में स्थित 500 मेगावाट क्षमता का स्वदेशी परमाणु रिएक्टर है, जिसे इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र ने डिजाइन किया है। यह यूरेनियम-प्लूटोनियम एमओएक्स फ्यूल का उपयोग करता है और भारत की तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा रणनीति का दूसरा चरण है।
पीएफबीआर ने फर्स्ट क्रिटिकलिटी कब हासिल की?
पीएफबीआर ने 6 अप्रैल 2026 की रात सफलतापूर्वक फर्स्ट क्रिटिकलिटी हासिल की। यह वह चरण होता है जब रिएक्टर में नियंत्रित परमाणु विखंडन की प्रक्रिया पहली बार आरंभ होती है।
आईआईटी मद्रास में मिस्री ने छात्रों से क्या कहा?
मिस्री ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के डिग्री वितरण समारोह में कहा कि तेज़ी से बदलते तकनीकी दौर में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग वैश्विक दक्षिण के देशों के विकास में योगदान देने के लिए करें।
भाविनी क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी) परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत एक सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है। इसे पीएफबीआर के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है और यह भारत के फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कार्यक्रम का केंद्र है।
राष्ट्र प्रेस
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