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विदेश सचिव विक्रम मिस्री रूस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में शामिल, भारत-रूस व्यापार 2030 तक $100 अरब का लक्ष्य

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विदेश सचिव विक्रम मिस्री रूस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में शामिल, भारत-रूस व्यापार 2030 तक $100 अरब का लक्ष्य

सारांश

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने रूस के राष्ट्रीय दिवस पर दोनों देशों के गहरे रिश्ते को रेखांकित किया — $60 अरब का व्यापार, 2030 तक $100 अरब का लक्ष्य, और स्किल मोबिलिटी से रक्षा तक फैला सहयोग। वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच यह साझेदारी भारत की बहुध्रुवीय कूटनीति की धुरी बनी हुई है।

मुख्य बातें

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 11 जून 2025 को नई दिल्ली में रूसी फेडरेशन के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
मिस्री ने भारत-रूस विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
लगातार दो वित्तीय वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार $60 अरब से अधिक; 2030 तक $100 अरब का लक्ष्य।
दिसंबर 2024 में राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्कटिक, रक्षा सहित कई क्षेत्रों में एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
स्किल मोबिलिटी और नई कनेक्टिविटी पहलें आर्थिक सहयोग के नए स्तंभ के रूप में उभरी हैं।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 11 जून 2025 को नई दिल्ली में आयोजित रूसी फेडरेशन के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया और दोनों देशों के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। मिस्री ने इस अवसर पर रूसी फेडरेशन को 12 जून के राष्ट्रीय दिवस पर बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

मुख्य संबोधन: भरोसे और समझ की नींव

समारोह में विदेश सचिव मिस्री ने कहा, 'भारत और रूस के बीच एक खास संबंध है जो समय की कसौटी पर खरा उतरा है।' उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच भरोसा और सम्मान एक-दूसरे के विशेष हितों और संवेदनशीलता के बारे में आपसी समझ को बढ़ाने में सहायक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निरंतर उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय संवाद इस मज़बूत रिश्ते का प्रमाण है।

भू-राजनीतिक तनाव में स्थिरता का सहारा

विदेश सचिव ने कहा कि बढ़ते वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत-रूस संबंध दोनों देशों के आपसी हितों को आगे बढ़ाने के लिए स्थिरता का आधार बने हुए हैं। उन्होंने दिसंबर 2024 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा का उल्लेख किया, जब वे 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे और इसे दोनों देशों के संबंधों में एक अहम पड़ाव बताया।

समझौते और सहयोग के नए क्षेत्र

मिस्री ने बताया कि दोनों देशों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, समुद्री सहयोग, आर्कटिक, अकादमिक एवं आर्थिक सहयोग और कुशल श्रम गतिशीलता (Skilled Labour Mobility) सहित कई क्षेत्रों में एमओयू और समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। रक्षा, असैन्य परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग भी जारी है।

व्यापार और आर्थिक साझेदारी का विस्तार

विदेश सचिव ने बताया कि लगातार दो वित्तीय वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार $60 अरब से अधिक रहा है। दोनों देशों के नेताओं ने इसे 2030 तक $100 अरब तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि भारत का विशाल पेशेवर प्रतिभा पूल रूस की कुशल जनशक्ति की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है, और स्किल मोबिलिटी आर्थिक सहयोग ढाँचे का एक अनिवार्य स्तंभ बन चुकी है।

आगे की राह: कनेक्टिविटी और नई संभावनाएँ

मिस्री ने कहा कि दोनों देश नई कनेक्टिविटी पहलों पर भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जो आर्थिक साझेदारी की पूरी क्षमता को साकार करने के लिए आवश्यक हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ पुनर्गठित हो रही हैं और भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखते हुए बहुध्रुवीय कूटनीति को आगे बढ़ा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो भारत की ऊर्जा निर्भरता की तस्वीर को जटिल बनाता है। स्किल मोबिलिटी का उल्लेख उस संदर्भ में भी उल्लेखनीय है जब यूक्रेन संघर्ष में भारतीय नागरिकों की भर्ती की खबरें सामने आई थीं। भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की असली परीक्षा यह होगी कि वह इस साझेदारी को अपनी विकास प्राथमिकताओं और वैश्विक साख दोनों के अनुरूप कैसे संतुलित करता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेश सचिव विक्रम मिस्री रूस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में क्यों शामिल हुए?
विक्रम मिस्री ने 11 जून 2025 को नई दिल्ली में आयोजित रूसी फेडरेशन के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व किया और भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। यह समारोह 12 जून को मनाए जाने वाले रूस के राष्ट्रीय दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित हुआ।
भारत और रूस के बीच व्यापार का लक्ष्य क्या है?
लगातार दो वित्तीय वर्षों में भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार $60 अरब से अधिक रहा है। दोनों देशों के नेताओं ने इसे 2030 तक $100 अरब तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
23वाँ भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन कब हुआ था?
दिसंबर 2024 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत के सरकारी दौरे पर आए थे। इस दौरे में शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, आर्कटिक सहयोग और स्किल मोबिलिटी सहित कई क्षेत्रों में एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
भारत-रूस सहयोग के कौन-से नए क्षेत्र उभरे हैं?
परंपरागत रक्षा और ऊर्जा सहयोग के अलावा, स्किल्ड लेबर मोबिलिटी, आर्कटिक सहयोग, समुद्री क्षेत्र, असैन्य परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और नई कनेक्टिविटी पहलें भारत-रूस आर्थिक साझेदारी के नए स्तंभ बन रहे हैं। भारत का पेशेवर प्रतिभा पूल रूस की कुशल जनशक्ति की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक माना जा रहा है।
वैश्विक तनाव के बीच भारत-रूस संबंध कितने महत्वपूर्ण हैं?
विदेश सचिव मिस्री के अनुसार, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत-रूस संबंध दोनों देशों के आपसी हितों को आगे बढ़ाने के लिए स्थिरता का आधार हैं। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता की नीति के तहत रूस के साथ संबंध बनाए रखता है, भले ही पश्चिमी देश रूस पर प्रतिबंध लगाए हुए हों।
राष्ट्र प्रेस
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