विदेश सचिव विक्रम मिस्री रूस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में शामिल, भारत-रूस व्यापार 2030 तक $100 अरब का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 11 जून 2025 को नई दिल्ली में आयोजित रूसी फेडरेशन के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया और दोनों देशों के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। मिस्री ने इस अवसर पर रूसी फेडरेशन को 12 जून के राष्ट्रीय दिवस पर बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
मुख्य संबोधन: भरोसे और समझ की नींव
समारोह में विदेश सचिव मिस्री ने कहा, 'भारत और रूस के बीच एक खास संबंध है जो समय की कसौटी पर खरा उतरा है।' उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच भरोसा और सम्मान एक-दूसरे के विशेष हितों और संवेदनशीलता के बारे में आपसी समझ को बढ़ाने में सहायक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निरंतर उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय संवाद इस मज़बूत रिश्ते का प्रमाण है।
भू-राजनीतिक तनाव में स्थिरता का सहारा
विदेश सचिव ने कहा कि बढ़ते वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत-रूस संबंध दोनों देशों के आपसी हितों को आगे बढ़ाने के लिए स्थिरता का आधार बने हुए हैं। उन्होंने दिसंबर 2024 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा का उल्लेख किया, जब वे 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे और इसे दोनों देशों के संबंधों में एक अहम पड़ाव बताया।
समझौते और सहयोग के नए क्षेत्र
मिस्री ने बताया कि दोनों देशों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, समुद्री सहयोग, आर्कटिक, अकादमिक एवं आर्थिक सहयोग और कुशल श्रम गतिशीलता (Skilled Labour Mobility) सहित कई क्षेत्रों में एमओयू और समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। रक्षा, असैन्य परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग भी जारी है।
व्यापार और आर्थिक साझेदारी का विस्तार
विदेश सचिव ने बताया कि लगातार दो वित्तीय वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार $60 अरब से अधिक रहा है। दोनों देशों के नेताओं ने इसे 2030 तक $100 अरब तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि भारत का विशाल पेशेवर प्रतिभा पूल रूस की कुशल जनशक्ति की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है, और स्किल मोबिलिटी आर्थिक सहयोग ढाँचे का एक अनिवार्य स्तंभ बन चुकी है।
आगे की राह: कनेक्टिविटी और नई संभावनाएँ
मिस्री ने कहा कि दोनों देश नई कनेक्टिविटी पहलों पर भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जो आर्थिक साझेदारी की पूरी क्षमता को साकार करने के लिए आवश्यक हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ पुनर्गठित हो रही हैं और भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखते हुए बहुध्रुवीय कूटनीति को आगे बढ़ा रहा है।