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भारत-रूस व्यापार 2030 तक $100 अरब का लक्ष्य, रूसी उप महावाणिज्य दूत बोले — दो महान सभ्यताओं की साझेदारी

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भारत-रूस व्यापार 2030 तक $100 अरब का लक्ष्य, रूसी उप महावाणिज्य दूत बोले — दो महान सभ्यताओं की साझेदारी

सारांश

रूसी उप महावाणिज्य दूत अलेक्जेंडर फर्सोव ने मुंबई में 2030 तक भारत-रूस व्यापार को $100 अरब तक पहुँचाने के संकल्प को दोहराया और इस साझेदारी को दो महान सभ्यताओं का मिलन बताया। सितंबर में होने वाला ग्लोबल इम्पैक्ट फोरम इस दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

मुख्य बातें

रूसी उप महावाणिज्य दूत अलेक्जेंडर फर्सोव ने 27 अगस्त 2026 को मुंबई में भारत-रूस संबंधों पर अपना दृष्टिकोण साझा किया।
भारत और रूस ने 2030 तक $100 अरब के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य निर्धारित किया है।
फर्सोव ने इस साझेदारी को दो महान सभ्यताओं के बीच का जुड़ाव बताया, न केवल कूटनीतिक रिश्ता।
रूसी बाज़ार में भारतीय उत्पादों, फिल्मों और संगीत के प्रति रुचि में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
सितंबर 2026 में होने वाले दूसरे ग्लोबल इम्पैक्ट फोरम में रूसी और भारतीय प्रतिनिधि सहयोग के नए अवसर तलाशेंगे।

रूसी संघ के उप महावाणिज्य दूत अलेक्जेंडर फर्सोव ने 27 अगस्त 2026 को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई देने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का साझा लक्ष्य निर्धारित किया है और इस दिशा में गंभीर प्रयास जारी हैं। फर्सोव ने भारत के साथ रूस की साझेदारी को महज़ कूटनीतिक रिश्ता नहीं, बल्कि दो महान सभ्यताओं के बीच का गहरा जुड़ाव बताया।

व्यापार लक्ष्य और द्विपक्षीय सहयोग

फर्सोव ने कहा, "हम हर क्षेत्र में अपने द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत, विस्तारित और गहरा करते रहेंगे। हमने 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा है — और इसे हासिल करने के लिए हम बहुत मेहनत कर रहे हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लक्ष्य केवल संख्या नहीं है, बल्कि दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारत-रूस व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, विशेष रूप से ऊर्जा, रक्षा और कृषि क्षेत्रों में। $100 अरब का यह लक्ष्य मौजूदा व्यापार स्तर से कई गुना अधिक है, जो दोनों पक्षों की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।

सभ्यतागत साझेदारी का संदेश

रूसी उप महावाणिज्य दूत ने कहा, "हम भारत के साथ अपनी साझेदारी को दो महान सभ्यताओं के बीच की साझेदारी के रूप में देखते हैं। गहरी आपसी समझ विकसित करने के लिए एक-दूसरे की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत को समझना बहुत ज़रूरी है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि व्यापारिक संबंधों को मज़बूत करने के लिए साझेदार देश की संस्कृति, पृष्ठभूमि और सोच को समझना उतना ही आवश्यक है।

फर्सोव ने रेखांकित किया कि सांस्कृतिक सहयोग दोनों देशों की मित्रता का एक प्रमुख स्तंभ है। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में रूसी बाज़ार में भारतीय उत्पादों की संख्या बढ़ी है और रूसी नागरिकों में भारतीय फिल्मों व संगीत के प्रति रुचि भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।

ग्लोबल इम्पैक्ट फोरम की भूमिका

फर्सोव ने सितंबर 2026 की शुरुआत में होने वाले दूसरे ग्लोबल इम्पैक्ट फोरम को लेकर उत्साह जताया। उन्होंने कहा कि इस फोरम में कई रूसी प्रतिनिधि अपने भारतीय समकक्षों से मिलेंगे और सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आयोजन केवल समझौतों या एमओयू पर हस्ताक्षर करने तक सीमित नहीं है, हालाँकि उन्होंने माना कि कुछ समझौते इससे निकल सकते हैं।

फर्सोव के अनुसार, फोरम का असली उद्देश्य आपसी सांस्कृतिक और व्यापारिक समझ को गहरा करना है — एक ऐसा मंच जहाँ संबंध केवल कागज़ पर नहीं, बल्कि व्यवहार में भी मज़बूत हों।

आगे क्या

भारत और रूस के बीच 2030 का व्यापार लक्ष्य दोनों देशों की सरकारों के लिए एक कसौटी बनेगा। ग्लोबल इम्पैक्ट फोरम जैसे मंच इस लक्ष्य की दिशा में व्यापारिक और सांस्कृतिक सेतु का काम कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस लक्ष्य को पाने के लिए भुगतान तंत्र, लॉजिस्टिक्स और नियामक ढाँचे में ठोस सुधार आवश्यक होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे हासिल करने की राह में भुगतान तंत्र, पश्चिमी प्रतिबंधों का दबाव और लॉजिस्टिक्स की बाधाएँ अभी भी बड़ी चुनौतियाँ हैं — जिनका फर्सोव के बयान में कोई उल्लेख नहीं था। सभ्यतागत साझेदारी की भाषा प्रेरक है, लेकिन व्यापार के आँकड़े तभी बदलते हैं जब नीतिगत ढाँचा ठोस हो। ग्लोबल इम्पैक्ट फोरम जैसे मंच संबंध बनाने में उपयोगी हैं, पर असली कसौटी यह होगी कि अगले दो वर्षों में व्यापार की दिशा और गति क्या रहती है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-रूस के बीच 2030 तक $100 अरब व्यापार का लक्ष्य क्या है?
भारत और रूस ने 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को $100 अरब तक पहुँचाने का संयुक्त लक्ष्य निर्धारित किया है। रूसी उप महावाणिज्य दूत अलेक्जेंडर फर्सोव ने 27 अगस्त 2026 को मुंबई में इस लक्ष्य की पुष्टि की और कहा कि दोनों पक्ष इस दिशा में गंभीरता से काम कर रहे हैं।
ग्लोबल इम्पैक्ट फोरम भारत-रूस संबंधों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
सितंबर 2026 में होने वाला दूसरा ग्लोबल इम्पैक्ट फोरम भारत और रूस के व्यापारिक व सांस्कृतिक प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाएगा। फर्सोव के अनुसार, इसका उद्देश्य केवल समझौतों पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि आपसी समझ और सहयोग के अवसरों को गहरा करना है।
रूस में भारतीय उत्पादों और संस्कृति की बढ़ती रुचि कैसी है?
फर्सोव ने बताया कि हाल के वर्षों में रूसी बाज़ार में भारतीय उत्पादों की संख्या बढ़ी है और रूसी नागरिकों में भारतीय फिल्मों व संगीत के प्रति रुचि उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। उन्होंने इसे दोनों देशों के सांस्कृतिक सहयोग का सकारात्मक संकेत बताया।
अलेक्जेंडर फर्सोव ने भारत-रूस साझेदारी को किस रूप में परिभाषित किया?
फर्सोव ने भारत-रूस साझेदारी को 'दो महान सभ्यताओं के बीच की साझेदारी' बताया। उनके अनुसार, व्यापार और कूटनीति के साथ-साथ एक-दूसरे की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत को समझना भी गहरे द्विपक्षीय संबंधों के लिए अनिवार्य है।
भारत-रूस व्यापार लक्ष्य हासिल करने में क्या चुनौतियाँ हैं?
$100 अरब के लक्ष्य को पाने के लिए भुगतान तंत्र, लॉजिस्टिक्स और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों जैसी बाधाओं को पार करना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों देशों को नियामक और वित्तीय ढाँचे में ठोस सुधार करने होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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