25 अगस्त 2026
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भारत-रूस व्यापार 2030 तक $100 अरब के लक्ष्य की ओर, जयशंकर ने IRIGC-TEC में रखे तीन अहम सुझाव

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भारत-रूस व्यापार 2030 तक $100 अरब के लक्ष्य की ओर, जयशंकर ने IRIGC-TEC में रखे तीन अहम सुझाव

सारांश

भारत-रूस व्यापार पाँच वर्षों में चार गुना बढ़कर 60 अरब डॉलर पहुँचा, लेकिन असंतुलन भी 50 अरब डॉलर से पार हो गया। जयशंकर ने IRIGC-TEC में 2030 तक 100 अरब डॉलर के लक्ष्य के लिए तीन सूत्री रणनीति पेश की — परिणाम, व्यापार जुड़ाव और नए अवसर।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 25 अगस्त 2026 को रूस में IRIGC-TEC के 27वें सत्र की संयुक्त अध्यक्षता की।
भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार 2021-22 के 13 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 60 अरब डॉलर हो गया — पाँच वर्षों में चार गुने से अधिक की वृद्धि।
व्यापार असंतुलन 6.6 अरब डॉलर से बढ़कर 50 अरब डॉलर से अधिक हो गया है।
2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य के लिए टैरिफ बाधाएँ हटाने, भुगतान व्यवस्था सुधारने और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर।
जयशंकर ने IRIGC-TEC को प्रभावी बनाने के लिए तीन सुझाव रखे: क्रियान्वयन पर ध्यान, व्यापार जगत से जुड़ाव और नए अवसरों की तलाश।
भारत-EEU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चर्चाओं की समीक्षा का भी प्रस्ताव रखा गया।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 25 अगस्त 2026 को रूस में आयोजित भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) के 27वें सत्र की संयुक्त अध्यक्षता की और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने के साझा लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बाज़ार पहुँच, भुगतान व्यवस्था और व्यापारिक जुड़ाव को मज़बूत करने पर विशेष बल दिया।

पाँच वर्षों में चार गुना बढ़ा व्यापार

जयशंकर ने सत्र में बताया कि भारत और रूस के बीच वस्तुओं का व्यापार पिछले पाँच वर्षों में चार गुने से भी अधिक बढ़ा है। यह 2021-22 में लगभग 13 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2025-26 में करीब 60 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है। उन्होंने इसे दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी की व्यापक संभावनाओं का प्रमाण बताया।

हालाँकि, इस तेज़ वृद्धि के साथ व्यापार असंतुलन भी तेज़ी से बढ़ा है। विदेश मंत्री के अनुसार, यह असंतुलन लगभग 6.6 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 50 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है, जिसे पाटना अब दोनों देशों की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।

व्यापार असंतुलन दूर करने के उपाय

जयशंकर ने 100 अरब डॉलर के लक्ष्य को हासिल करने और असंतुलन घटाने के लिए कई ठोस उपाय सुझाए। इनमें बाज़ार तक बेहतर पहुँच, टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाना, भुगतान व्यवस्था को मज़बूत बनाना और दोनों देशों के व्यवसायों के बीच सहयोग बढ़ाना शामिल है।

इसके अलावा, उन्होंने भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EEU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हुई चर्चाओं की समीक्षा का भी सुझाव दिया। गौरतलब है कि यह FTA दोनों पक्षों के व्यापारिक संबंधों को एक नई संस्थागत बुनियाद दे सकता है।

IRIGC-TEC को प्रभावी बनाने के तीन सुझाव

विदेश मंत्री ने IRIGC-TEC व्यवस्था के कार्य समूहों और उप-समूहों के सह-अध्यक्षों के लिए तीन सुझाव रखे:

पहलाक्रियान्वयन और परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना; दूसराव्यापार जगत के साथ जुड़ाव को मज़बूत करना; और तीसरानए अवसरों की लगातार तलाश करना। ये सुझाव इस बात का संकेत देते हैं कि भारत इस आयोग को केवल कूटनीतिक मंच नहीं, बल्कि व्यावसायिक परिणाम देने वाली व्यवस्था के रूप में देखना चाहता है।

रणनीतिक साझेदारी की पृष्ठभूमि

जयशंकर ने याद दिलाया कि दिसंबर 2025 में आयोजित 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को मज़बूत बनाने की साझा प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की गई थी। उन्होंने कहा कि भारत और रूस की विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी ने हमेशा बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में भी अपनी मज़बूती बनाए रखी है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार पुनर्संरेखण की प्रक्रिया जारी है। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच FTA वार्ता और भुगतान व्यवस्था पर हुई प्रगति इस साझेदारी की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 50 अरब डॉलर से अधिक का असंतुलन यह भी बताता है कि यह वृद्धि मुख्यतः एकतरफा — रूसी ऊर्जा आयात की ओर झुकी — रही है। 100 अरब डॉलर का लक्ष्य तभी टिकाऊ होगा जब भारतीय निर्यात को रूसी बाज़ार में वास्तविक प्रवेश मिले, जो टैरिफ से अधिक संरचनात्मक और लॉजिस्टिक बाधाओं का सामना करता है। FTA की समीक्षा सही दिशा है, लेकिन पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच भुगतान व्यवस्था की चुनौती बिना किसी ठोस वैकल्पिक तंत्र के हल होना मुश्किल है। IRIGC-TEC के तीन सुझाव नीतिगत रूप से सही हैं, पर असली कसौटी उनके क्रियान्वयन की निगरानी और जवाबदेही तय करने में होगी।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IRIGC-TEC क्या है और इसका 27वाँ सत्र क्यों महत्वपूर्ण है?
IRIGC-TEC यानी भारत-रूस व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर अंतर-सरकारी आयोग एक द्विपक्षीय संस्था है जो दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की दिशा तय करती है। 27वाँ सत्र इसलिए अहम है क्योंकि इसमें 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य और बढ़ते असंतुलन को दूर करने की रणनीति पर चर्चा हुई।
भारत-रूस व्यापार में इतनी तेज़ वृद्धि कैसे हुई?
पिछले पाँच वर्षों में भारत-रूस व्यापार 2021-22 के लगभग 13 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में करीब 60 अरब डॉलर हो गया — यानी चार गुने से भी अधिक की वृद्धि। यह वृद्धि मुख्यतः रूस से भारत के ऊर्जा आयात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी के कारण हुई।
भारत-रूस व्यापार असंतुलन कितना बड़ा है और इसे कैसे दूर किया जाएगा?
व्यापार असंतुलन लगभग 6.6 अरब डॉलर से बढ़कर 50 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। जयशंकर ने इसे दूर करने के लिए बाज़ार पहुँच बढ़ाने, टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएँ हटाने, भुगतान व्यवस्था सुधारने और दोनों देशों के व्यवसायों के बीच सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया।
जयशंकर ने IRIGC-TEC के लिए कौन से तीन सुझाव दिए?
विदेश मंत्री जयशंकर ने IRIGC-TEC के कार्य समूहों के सह-अध्यक्षों के लिए तीन सुझाव रखे: पहला — क्रियान्वयन और परिणामों पर ध्यान देना; दूसरा — व्यापार जगत के साथ जुड़ाव को मज़बूत करना; और तीसरा — नए अवसरों की लगातार तलाश करना।
भारत-EEU मुक्त व्यापार समझौते का क्या महत्व है?
भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EEU) के बीच प्रस्तावित FTA दोनों पक्षों के व्यापारिक संबंधों को एक संस्थागत ढाँचा दे सकता है। जयशंकर ने IRIGC-TEC सत्र में इस FTA पर हुई चर्चाओं की समीक्षा का सुझाव दिया, जो 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य को हासिल करने में सहायक हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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