जयशंकर-मंटुरोव की मॉस्को बैठक: भारत-रूस व्यापार पाँच साल में चार गुना, $60 अरब पार
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 24 अगस्त को मॉस्को में व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) के 27वें सत्र की सह-अध्यक्षता की, जहाँ रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ अहम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए। दो दिवसीय यात्रा के दौरान जयशंकर ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2021-22 के लगभग $13 अरब से बढ़कर 2025-26 में लगभग $60 अरब तक पहुँच गया है।
मुख्य घटनाक्रम
बैठक में जयशंकर ने कहा कि जटिल अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के बावजूद भारत-रूस साझेदारी ने लगातार लचीलापन और अनुकूलन क्षमता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, 'जटिल अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के बीच भी हमारा जुड़ाव गहरा होता रहा है, जो हमारे द्विपक्षीय साझेदारी को परिभाषित करने वाले आपसी हित और विश्वास को दर्शाता है।' उन्होंने दिसंबर 2025 में आयोजित 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसने दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को गहरा करने की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
व्यापार असंतुलन: सबसे बड़ी चुनौती
व्यापार में तेज़ वृद्धि के साथ-साथ असंतुलन भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। जयशंकर ने स्वीकार किया कि व्यापार घाटा $6.6 अरब से बढ़कर $50 अरब से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा, 'इस असंतुलन को दूर करना आज हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।' गौरतलब है कि भारत रूस से बड़े पैमाने पर ऊर्जा और उर्वरक आयात करता है, जबकि भारतीय निर्यात उस अनुपात में नहीं बढ़ा है।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट में बताया कि बैठक में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु, कनेक्टिविटी, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और गतिशीलता के क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई। उन्होंने IRIGC-TEC के कार्य समूहों को निर्देश दिया कि प्रत्येक समूह अगले सत्र से पहले प्राथमिकता-आधारित परिणाम तय करे और समस्या-समाधान में सक्रिय भूमिका निभाए।
उद्योग जगत से जुड़ाव पर ज़ोर
विदेश मंत्री ने उद्योग जगत के साथ संस्थागत जुड़ाव को मज़बूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकारें सक्षम ढाँचे बना सकती हैं, लेकिन व्यापार, निवेश, नवाचार और रोज़गार सृजन का काम व्यापार जगत ही करता है। आने वाले हफ्तों में भारत में INNOPROM के आयोजन को उन्होंने इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत बताया।
आगे की राह
जयशंकर ने बैठक को 'बहुत उत्पादक' करार दिया और मंटुरोव को सह-अध्यक्षता के लिए धन्यवाद दिया। दोनों पक्षों ने मौलिक पूरकताओं को और गहराई से तलाशने पर सहमति जताई। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार असंतुलन को कम करने के लिए भारतीय निर्यात में विविधता लाना और रुपये-रूबल भुगतान व्यवस्था को सुदृढ़ करना अगले चरण की प्रमुख परीक्षाएँ होंगी।