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महाराष्ट्र धर्मांतरण विरोधी कानून पर वारिस पठान का हमला: 'सरकार ध्यान भटका रही है, एक समुदाय को टारगेट कर रही है'

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महाराष्ट्र धर्मांतरण विरोधी कानून पर वारिस पठान का हमला: 'सरकार ध्यान भटका रही है, एक समुदाय को टारगेट कर रही है'

सारांश

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने महाराष्ट्र के प्रस्तावित धर्मांतरण विरोधी कानून को संविधान का उल्लंघन करार दिया और सरकार पर एक समुदाय को टारगेट करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने नेपाल बाढ़ में 100 से अधिक लापता भारतीयों के लिए सरकार से समर्पित सूचना डेस्क बनाने की माँग की।

मुख्य बातें

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने 28 अगस्त को महाराष्ट्र के धर्मांतरण विरोधी कानून को संविधान का उल्लंघन बताया।
पठान ने कहा कि स्वेच्छा से धर्म अपनाने वाले को जेल भेजना मौलिक अधिकारों के विरुद्ध है।
उन्होंने सरकार पर अमरावती में नवजातों की मौत और चीनी की बढ़ती कीमतों जैसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
नेपाल बाढ़ में 100 से अधिक भारतीय नागरिक लापता होने की जानकारी देते हुए भारत सरकार से समर्पित सूचना डेस्क बनाने की अपील की।
महिला आरक्षण बिल पर पार्टी का रुख असदुद्दीन ओवैसी अगले संसद सत्र में स्पष्ट करेंगे।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने 28 अगस्त को मुंबई में महाराष्ट्र सरकार के प्रस्तावित धर्मांतरण विरोधी कानून पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे संविधान का सीधा उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह कानून केवल एक समुदाय को निशाना बनाने के लिए लाया जा रहा है, और सरकार असल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

संवैधानिक अधिकारों का सवाल

पठान ने कहा, 'यह संविधान का उल्लंघन है। धर्म मानने की आज़ादी का मतलब है कि हर नागरिक को अपने मन का धर्म अपनाने का अधिकार है। जो कोई भी अपने धर्म को मानना चाहता है, उसे ऐसा करने की इजाज़त होनी चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम में किसी को धर्म परिवर्तन के लिए बाध्य करना सख्त मना है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी धर्म को अपनाना चाहता है तो उसे कानूनी रूप से दंडित करना न्यायसंगत नहीं है।

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई व्यक्ति किसी वीडियो या ऑडियो सामग्री से प्रभावित होकर स्वेच्छा से धर्म अपनाता है, तो क्या उसे जेल भेजा जाएगा? उनके अनुसार ऐसा कानून मौलिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है।

सरकार पर ध्यान भटकाने का आरोप

पठान ने महाराष्ट्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस तरह के विधेयक लाकर बुनियादी समस्याओं से जनता का ध्यान हटा रही है। उन्होंने अमरावती में आग लगने से तीन नवजात शिशुओं की मौत का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में सुरक्षा व्यवस्था की हालत बेहद खराब है। उन्होंने चीनी की बढ़ती कीमतों का भी ज़िक्र किया और कहा कि इन ज्वलंत मुद्दों पर सरकार चुप्पी साधे है, जबकि धर्म के नाम पर एक विशेष समुदाय को टारगेट किया जा रहा है।

आलोचकों का कहना है कि इस तरह के कानून सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं और संविधान के अनुच्छेद 25 में दिए गए धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार से टकराते हैं।

नेपाल बाढ़ पर संवेदना और भारत सरकार से अपील

पठान ने नेपाल में बाढ़ से हुई जनहानि पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'यह बहुत दुख की बात है। हम उन तमाम परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करते हैं जिन्होंने अपने घर-बार और अपने प्रियजनों को खो दिया है। जो घायल हुए हैं, हम दुआ करते हैं कि वे जल्द स्वस्थ हों।'

उन्होंने भारत सरकार से अपील की कि वह नेपाल को राहत पैकेज सहित हर संभव सहायता प्रदान करे और इस मानवीय संकट को राजनीतिक रंग न दे। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार 100 से अधिक भारतीय नागरिक नेपाल में लापता हैं और सरकार को एक समर्पित सूचना डेस्क स्थापित करना चाहिए ताकि परिजनों को सही जानकारी मिल सके।

महिला आरक्षण बिल पर पार्टी का रुख

महिला आरक्षण विधेयक पर पठान ने कहा कि जब संसद का अगला सत्र बुलाया जाएगा, तब AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी इस मुद्दे पर पार्टी का आधिकारिक पक्ष रखेंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब महिला आरक्षण लागू करने की समय-सीमा को लेकर विपक्षी दलों में बहस तेज़ है।

आगे क्या

महाराष्ट्र का प्रस्तावित धर्मांतरण विरोधी कानून अभी विधानसभा में पेश नहीं हुआ है, लेकिन इस पर राजनीतिक बहस तीव्र होती जा रही है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे इस विधेयक को सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह चुनौती देंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

कई संवैधानिक विशेषज्ञों का भी है। पठान का 'ध्यान भटकाने' वाला तर्क राजनीतिक है, लेकिन अमरावती की नवजात मौतें और महँगाई जैसे मुद्दे वास्तविक हैं और उन पर सरकार की चुप्पी सवाल उठाती है। नेपाल में 100 से अधिक लापता भारतीयों का मुद्दा अभी तक मुख्यधारा की कवरेज में उपेक्षित रहा है — यह एक ऐसी माँग है जिस पर सरकार को तत्काल जवाब देना चाहिए।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र धर्मांतरण विरोधी कानून क्या है और AIMIM इसका विरोध क्यों कर रही है?
महाराष्ट्र सरकार एक ऐसे कानून पर विचार कर रही है जो जबरन या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने पर रोक लगाएगा। AIMIM का कहना है कि यह कानून स्वेच्छा से धर्म अपनाने के संवैधानिक अधिकार को भी खतरे में डालता है और मुस्लिम समुदाय को विशेष रूप से निशाना बनाता है।
वारिस पठान ने सरकार पर ध्यान भटकाने का आरोप क्यों लगाया?
पठान ने अमरावती में आग से तीन नवजात शिशुओं की मौत और चीनी की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार इन ज्वलंत मुद्दों पर चुप है और धर्म के नाम पर ध्यान भटकाने के लिए यह कानून लाया जा रहा है।
नेपाल बाढ़ में लापता भारतीयों के बारे में पठान ने क्या कहा?
पठान के अनुसार नेपाल में आई बाढ़ में 100 से अधिक भारतीय नागरिक लापता हैं। उन्होंने भारत सरकार से एक समर्पित सूचना डेस्क स्थापित करने की माँग की ताकि परिजनों को सटीक जानकारी मिल सके और राहत कार्य में राजनीति न हो।
इस्लाम में धर्म परिवर्तन को लेकर AIMIM का क्या कहना है?
पठान ने स्पष्ट किया कि इस्लाम में किसी को जबरन धर्म बदलने के लिए बाध्य करना वर्जित है। हालाँकि, यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी धर्म को अपनाना चाहता है तो उसे कानूनी दंड देना संविधान प्रदत्त धर्म की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
महिला आरक्षण बिल पर AIMIM का रुख क्या है?
पठान ने कहा कि अगले संसद सत्र में AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी महिला आरक्षण विधेयक पर पार्टी का आधिकारिक पक्ष रखेंगे। फिलहाल पार्टी ने इस पर कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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