'कृष्ण' नाटक से नई पीढ़ी को जोड़ेगा श्रीराम भारतीय कला केंद्र, शोभा दीपक सिंह ने बताया उद्देश्य
सारांश
मुख्य बातें
श्रीराम भारतीय कला केंद्र की चेयरपर्सन और पद्म श्री से सम्मानित शोभा दीपक सिंह ने 28 अगस्त को नई दिल्ली में प्रतिष्ठित नाटक 'कृष्ण' को लेकर विस्तृत बातचीत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रस्तुति भगवान कृष्ण के जीवन और उनके कालजयी संदेशों को नाट्य माध्यम से आज की पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सुविचारित प्रयास है। यह नाटक लंबे समय से दर्शकों के बीच अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।
नाटक की परिकल्पना और विषय-वस्तु
शोभा दीपक सिंह के अनुसार, 'कृष्ण' नाटक की परिकल्पना और प्रस्तुति वर्षों पुरानी है। इसमें भगवान कृष्ण के जन्म से लेकर उनके जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों को नाट्य रूप में प्रस्तुत किया जाता है। 'यदा यदा हि धर्मस्य...' जैसे संदेशों के माध्यम से धर्म और कर्तव्य की अवधारणा को दर्शकों तक पहुँचाने का प्रयास किया जाता है।
उन्होंने बताया कि आज के समय में बहुत से लोग कृष्ण के जीवन के उन पहलुओं से अनजान हैं जिन्हें समझना वर्तमान पीढ़ी के लिए आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुति को अधिक सहज और बोधगम्य बनाया गया है।
द्विभाषी प्रस्तुति की व्यवस्था
मंच पर प्रस्तुति मुख्यतः हिंदी में होती है, किंतु दर्शकों की सुविधा के लिए मंच के दोनों ओर स्क्रीन लगाई गई हैं। कलाकारों के संवादों का अंग्रेजी अनुवाद इन स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जाता है, ताकि हिंदी से अपरिचित दर्शक भी कहानी और संदेश को सुगमता से समझ सकें। यह व्यवस्था नाटक को व्यापक और विविध दर्शक वर्ग तक पहुँचाने में सहायक है।
बच्चों और परिवारों से विशेष अपील
शोभा दीपक सिंह ने विशेष रूप से अभिभावकों से बच्चों को साथ लेकर नाटक देखने आने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रस्तुति में बच्चों को ध्यान में रखते हुए सामग्री और प्रस्तुति तैयार की गई है। उनके अनुसार, ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक कथाओं से जोड़ने में उपयोगी भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि कई लोग कृष्ण के जीवन के केवल कुछ प्रसिद्ध प्रसंगों से परिचित हैं, जबकि उनके जीवन के अन्य आयामों और विचारों की जानकारी अपेक्षाकृत कम है। इस नाटक के माध्यम से उन अनजाने पहलुओं को भी सामने लाने का प्रयास है।
दर्शकों की सुविधा का ध्यान
केंद्र ने इंटरवल के दौरान बच्चों और परिवारों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की है, ताकि पूरा परिवार इस सांस्कृतिक अनुभव का आनंद ले सके। शोभा दीपक सिंह ने उम्मीद जताई कि नाटक देखने के बाद दर्शक कृष्ण के जीवन के विभिन्न पहलुओं को बेहतर ढंग से समझेंगे और इस ज्ञान को अपने परिवार तथा बच्चों के साथ साझा करने की प्रेरणा महसूस करेंगे।