महाराष्ट्र विधानसभा में पेश होगा ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’, जबरन धर्मांतरण पर रोक

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महाराष्ट्र विधानसभा में पेश होगा ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’, जबरन धर्मांतरण पर रोक

सारांश

महाराष्ट्र सरकार शुक्रवार को विधानसभा में ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’ पेश करेगी। इससे जबरन धर्मांतरण के मामलों में संलिप्त व्यक्तियों को दंडित करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

Key Takeaways

  • धर्मांतरण पर रोक
  • सख्त दंड का प्रावधान
  • 60 दिन पहले सूचना अनिवार्य
  • 25 दिन में पंजीकरण आवश्यक
  • रक्त संबंधियों को शिकायत का अधिकार

मुंबई, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र सरकार शुक्रवार को विधानसभा में ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’ पेश करने वाली है। इसके साथ, ‘जबरन’ धर्मांतरण से जुड़े व्यक्तियों और संगठनों की पहचान कर उन्हें दंडित करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य धोखाधड़ी, जबरदस्ती या लालच के माध्यम से होने वाले धार्मिक धर्मांतरण को रोकना है। ५ मार्च को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में एक उच्च-स्तरीय विशेष समिति की सिफारिशों के आधार पर इसे मंजूरी दी गई थी।

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की अध्यक्षता में गठित इस समिति का गठन १४ फरवरी, २०२५ को हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य कानूनी ढांचे का अध्ययन करना और अवैध धर्मांतरण से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित करना था।

जब यह विधेयक राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों से पारित हो जाएगा, तो इसे राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह कानून लागू होगा।

महाराष्ट्र विधानमंडल सचिवालय द्वारा जारी एजेंडा के अनुसार, प्रश्नकाल के बाद इस विधेयक को विधानसभा में पेश किया जाएगा।

इस विधेयक में कठोर प्रशासनिक प्रावधान और आपराधिक दंड का प्रावधान है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि धर्म परिवर्तन केवल व्यक्तिगत पसंद का मामला हो, न कि जबरदस्ती का।

इस विधेयक के अंतर्गत, जो लोग धर्म परिवर्तन करना चाहते हैं, उन्हें जिला अधिकारियों को ६० दिन पहले इसकी सूचना देनी होगी। धर्म परिवर्तन के बाद, इसे कानूनी रूप से मान्य माना जाने के लिए २५ दिनों के भीतर आधिकारिक रूप से पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा।

इसके अतिरिक्त, विधेयक में यह भी प्रस्तावित किया गया है कि जिस व्यक्ति का धर्म परिवर्तन हो रहा है, उसके रक्त संबंधी यदि उन्हें संदेह हो कि इस प्रक्रिया में जबरदस्ती या लालच है, तो वे शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

सरकार का कहना है कि यह कानून कमजोर वर्गों को धर्म परिवर्तन के गलत तरीकों से बचाने के लिए आवश्यक है।

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे सहित अन्य मंत्री जबरदस्ती धर्म परिवर्तन के खिलाफ इस कानून के प्रबल समर्थक रहे हैं। यह कानून उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे अन्य राज्यों में देखे गए एक चलन का अनुसरण करता है, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में इसी प्रकार के "धर्म की स्वतंत्रता" संबंधी कानून बनाए हैं।

Point of View

लेकिन इसके कार्यान्वयन के दौरान संभावित कानूनी और सामाजिक चुनौतियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
NationPress
13/03/2026

Frequently Asked Questions

महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य जबरन, धोखाधड़ी या लालच से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है।
कब तक धर्म परिवर्तन की सूचना देनी होगी?
जो लोग धर्म परिवर्तन करना चाहते हैं, उन्हें जिला अधिकारियों को 60 दिन पहले इसकी सूचना देनी होगी।
इस विधेयक में किन बातों का ध्यान रखा गया है?
इस विधेयक में सख्त प्रशासनिक शर्तें और आपराधिक दंड का प्रावधान है।
धर्म परिवर्तन के बाद क्या करना होगा?
धर्म परिवर्तन के बाद, इसे कानूनी रूप से मान्य मानने के लिए 25 दिनों के भीतर आधिकारिक रूप से पंजीकृत करवाना अनिवार्य होगा।
क्या कोई शिकायत दर्ज कर सकता है?
हाँ, यदि किसी को धर्म परिवर्तन में जबरदस्ती या लालच का संदेह है, तो वे शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
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