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केंद्र सरकार ने कहा: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर देगा विश्वसनीय और उच्च तापीय दक्षता

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केंद्र सरकार ने कहा: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर देगा विश्वसनीय और उच्च तापीय दक्षता

सारांश

भारत का पहला 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने क्रिटिकैलिटी हासिल की है। केंद्र सरकार का कहना है कि यह रिएक्टर कम कार्बन वाली ऊर्जा में देश की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा। जानें इसके महत्व और भविष्य की योजनाओं के बारे में।

मुख्य बातें

भारत का पहला 500 मेगावाट फास्ट ब्रीडर रिएक्टर सफलतापूर्वक क्रिटिकैलिटी हासिल कर चुका है।
यह रिएक्टर कम कार्बन वाली ऊर्जा प्रदान करेगा।
यह भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा।
इसका निर्माण आईजीसीएआर द्वारा किया गया है।
यह थोरियम का उपयोग करके ऊर्जा उत्पादन के दीर्घकालिक लक्ष्य का समर्थन करता है।

नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के पहले 500 मेगावाट के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने सफलतापूर्वक क्रिटिकैलिटी (सुरक्षित और सामान्य रूप से काम करना) हासिल कर लिया है। केंद्र सरकार ने मंगलवार को घोषणा की कि यह पहला फास्ट ब्रीडर रिएक्टर विश्वसनीय, कम कार्बन वाली और उच्च तापीय दक्षता प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पीएफबीआर को भारत के न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी क्षेत्र की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जो देश को ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।

इस रिएक्टर ने सोमवार को ऑटोमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (एईआरबी) द्वारा निर्धारित सभी सुरक्षा मानकों को पूरा करते हुए क्रिटिकैलिटी प्राप्त की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में इस उपलब्धि को भारत के नागरिक परमाणु कार्यक्रम की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया।

उन्होंने कहा, "भारत ने अपने नागरिक परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण को आगे बढ़ाते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने कलपक्कम में क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है।"

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि यह उन्नत रिएक्टर, जो खपत से अधिक ईंधन उत्पादन करने में सक्षम है, देश की वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग क्षमता को प्रदर्शित करता है। यह कार्यक्रम का तीसरा चरण है, जो विशाल थोरियम भंडार का दोहन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा, "भारत के लिए यह एक गौरवपूर्ण क्षण है। हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई।"

इस रिएक्टर को इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आईजीसीएआर) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया है और इसका निर्माण एवं संचालन भारतीय परमाणु विद्युत निगम लिमिटेड (बीएचएवीआईएनआई) द्वारा किया गया है, जो केंद्र सरकार का एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण घटक हैं। पारंपरिक रिएक्टरों के विपरीत, पीएफआरबी यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (एमओएक्स) ईंधन का उपयोग करता है और यूरेनियम-238 को प्लूटोनियम-239 में परिवर्तित करके खपत से अधिक विखंडनीय पदार्थ उत्पन्न कर सकता है।

इस रिएक्टर को अंततः थोरियम-232 का उपयोग करके यूरेनियम-233 का उत्पादन करने के लिए भी डिजाइन किया गया है, जो स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए भारत के विशाल थोरियम भंडार का दीर्घकालिक लक्ष्य समर्थन करता है।

अधिकारियों ने कहा कि यह उपलब्धि मौजूदा परमाणु प्रौद्योगिकियों को भविष्य के थोरियम-आधारित रिएक्टरों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, साथ ही ईंधन दक्षता और स्थिरता को भी बढ़ाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो भविष्य की ऊर्जा नीति को आकार देगा।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर क्या है?
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर एक प्रकार का परमाणु रिएक्टर है जो यूरेनियम और प्लूटोनियम मिश्रित ईंधन का उपयोग करता है और खपत से अधिक विखंडनीय पदार्थ उत्पन्न करने में सक्षम है।
क्रिटिकैलिटी का क्या अर्थ है?
क्रिटिकैलिटी का अर्थ है जब एक रिएक्टर सुरक्षित और सामान्य रूप से काम करने की स्थिति में हो जाता है।
इस रिएक्टर का निर्माण किसने किया?
इस रिएक्टर को इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आईजीसीएआर) द्वारा डिजाइन किया गया है और भारतीय परमाणु विद्युत निगम लिमिटेड (बीएचएवीआईएनआई) द्वारा निर्मित और संचालित किया गया है।
भारत के लिए यह उपलब्धि क्यों महत्वपूर्ण है?
यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती है और देश के न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी क्षेत्र की क्षमताओं को दर्शाती है।
क्या यह रिएक्टर थोरियम का उपयोग करेगा?
हाँ, यह रिएक्टर भविष्य में थोरियम-232 का उपयोग करके यूरेनियम-233 का उत्पादन करने के लिए भी डिजाइन किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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