राजनाथ सिंह ने IASV त्रिवेणी की महिला टीम को सराहा: 'भारत साहस से विश्वास जीतता है'
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 22 जुलाई 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से त्रि-सेवा विश्व परिक्रमा नौकायन अभियान के सफल समापन पर सैन्यकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत शब्दों से नहीं, बल्कि अपने मूल्यों, आचरण और साहस से दुनिया का विश्वास अर्जित करता है। यह अभियान भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की महिला अधिकारियों ने एकजुट होकर एक ही ध्वज तले पूरा किया — जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
अभियान का ऐतिहासिक महत्व
यह पहली बार है जब तीनों सेनाओं की महिला कर्मियों ने संयुक्त रूप से विश्व परिक्रमा नौकायन अभियान को अंजाम दिया। IASV त्रिवेणी — जो भारत में ही डिज़ाइन और निर्मित पोत है — ने दुनिया के समुद्रों में भारत की तकनीकी क्षमता और नवाचार का प्रदर्शन किया। राजनाथ सिंह ने कहा कि त्रिवेणी ने जितनी समुद्री मील तय की हैं, उतने ही कदम भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाए हैं।
संयुक्त सामर्थ्य का संदेश
रक्षा मंत्री ने कहा कि जब पूरा विश्व संयुक्त ऑपरेशन, इंटीग्रेटेड कमांड और मल्टी-डोमेन वॉरफेयर की बात कर रहा है, तब IASV त्रिवेणी ने समुद्र के बीच उस संयुक्तता को जीकर दिखाया है। उन्होंने कहा, 'जहाँ समन्वय होता है, वहाँ सामर्थ्य कई गुना बढ़ जाती है। और जहाँ तीनों सेनाएँ साथ चलती हैं, वहाँ विजय स्वयं रास्ता बना लेती है।'
आत्मनिर्भर भारत की जीवंत पहचान
राजनाथ सिंह ने IASV त्रिवेणी को आत्मनिर्भर भारत की जीवंत पहचान बताया। उन्होंने कहा कि देश में निर्मित इस पोत ने वैश्विक समुद्रों में भारत की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता और रणनीतिक आत्मविश्वास का परिचय दिया। विभिन्न देशों के बंदरगाहों पर महिला अधिकारियों के संवाद और व्यवहार ने भारत की सॉफ्ट पावर को भी मज़बूत किया, जिसकी आज पूरी दुनिया प्रशंसा करती है।
महिला नेतृत्व पर विशेष जोर
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज भारत की नारी केवल अवसर की प्रतीक्षा नहीं करती, बल्कि अवसरों का निर्माण करती है। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल एक समुद्री यात्रा नहीं थी — यह उस दिन की गवाही है जब तीनों सेनाओं की महिला अधिकारियों ने एक ध्वज, एक संकल्प और एक उद्देश्य के साथ विश्व को संदेश दिया कि भारत की शक्ति उसकी एकता में है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की प्रत्येक बेटी इस यात्रा में अपना भविष्य देख रही है।
समुद्री कूटनीति का नया अध्याय
राजनाथ सिंह ने कहा कि इतिहास इस अभियान को केवल एक समुद्री अभियान के रूप में नहीं, बल्कि भारत की समुद्री कूटनीति के एक नए अध्याय के रूप में याद करेगा। उन्होंने महिला सैन्यकर्मियों से कहा, 'आपने केवल पृथ्वी की परिक्रमा नहीं की, बल्कि करोड़ों भारतीयों के हृदयों को भी गर्व से भर दिया है।' यह अभियान यह भी साबित करता है कि नया भारत चुनौतियों को देखकर रुकता नहीं, बल्कि उन्हें पार करके इतिहास लिखता है।