15 अगस्त 2026
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'विकसित भारत' 2047 तक अवश्य बनेगा, 140 करोड़ देशवासियों का पुरुषार्थ है असली ताकत: PM मोदी

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'विकसित भारत' 2047 तक अवश्य बनेगा, 140 करोड़ देशवासियों का पुरुषार्थ है असली ताकत: PM मोदी

सारांश

लाल किले की प्राचीर से मोदी का संदेश इस बार सिर्फ उत्सव नहीं था — यह एक राष्ट्रीय प्रतिज्ञा थी। 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य, 25 करोड़ की गरीबी से मुक्ति और 'फ्रेजाइल फाइव' से तेज अर्थव्यवस्था तक का सफर — 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री ने भारत की बदलती तस्वीर को आँकड़ों और संकल्प दोनों से पेश किया।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर 'विकसित भारत 2047 ' का संकल्प दोहराया।
140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ को लक्ष्य प्राप्ति की असली शक्ति बताया।
पिछले 12 वर्षों में 25 करोड़ देशवासियों के गरीबी से बाहर निकलने का उल्लेख किया।
2014 से पहले भारत को 'फ्रेजाइल फाइव' में गिना जाता था; अब देश तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन चुका है।
मोदी ने कहा कि बड़े सपने और दृढ़ संकल्प ही राष्ट्र की सोच और सामर्थ्य को विस्तार देते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए 'विकसित भारत' के संकल्प को एक बार फिर दृढ़ता से दोहराया। उन्होंने कहा कि जब 2047 में देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे होंगे, तब भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने खड़ा होगा — और यह लक्ष्य 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक पुरुषार्थ से हासिल किया जाएगा।

बड़े सपने और दृढ़ संकल्प की पुकार

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कोई भी राष्ट्र तब महान बनता है जब वह अपने सपनों, संकल्पों और सामर्थ्य के दम पर आगे बढ़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब 'छोटे सपनों' से काम नहीं चलेगा — बड़े सपने ही सोच के क्षितिज को विस्तृत करते हैं और राष्ट्र की ऊर्जा को नई दिशा देते हैं।

मोदी ने कहा कि जब संकल्प दृढ़ होता है, तो कठिनाइयों और आपदाओं के बीच से रास्ता निकालने का सामर्थ्य स्वतः उभर कर आता है। उनके अनुसार, ऊँचे सपने और ऊँचे संकल्प मिलकर राष्ट्र के प्रयासों की ऊँचाई को भी बढ़ाते हैं।

पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियाँ

प्रधानमंत्री ने कहा कि वे यह दावा खाली हाथ नहीं कर रहे। उनके अनुसार, पिछले 12 वर्षों में देशवासियों ने संकल्प और समर्पण के साथ भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने में अथक प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा, 'यह उसी का परिणाम है कि इतने कम समय में 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर निकले हैं।' इन्हीं प्रयासों के चलते भारत आज दुनिया की तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

'फ्रेजाइल फाइव' से विश्व-शक्ति की ओर

मोदी ने याद दिलाया कि 2014 तक भारत को वैश्विक स्तर पर 'फ्रेजाइल फाइव' देशों की सूची में रखा जाता था — यानी वे अर्थव्यवस्थाएँ जो सबसे कमजोर मानी जाती थीं। उन्होंने कहा कि उस दौर में 'होती है, चलती है, हो जाएगा' की मानसिकता हावी थी। गौरतलब है कि पिछले एक दशक में भारत ने इस छवि को पलटते हुए वैश्विक विकास की अगली पंक्ति में जगह बनाई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश 'विकसित' होने का संकल्प लेता है, तो यह वैश्विक नजरिए को बदलने पर मजबूर करता है और भारत के साहस का परिचायक बन जाता है।

आम जनता पर असर

'विकसित भारत' का यह विज़न केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है — इसमें सामाजिक उत्थान, बुनियादी ढाँचे का विस्तार और नागरिकों के जीवन-स्तर में सुधार भी शामिल है। प्रधानमंत्री के अनुसार, 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक संकल्प और सामर्थ्य को अब रोकना नामुमकिन है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और प्रमुख क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है। 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को लेकर आने वाले महीनों में नीतिगत घोषणाओं और क्षेत्र-विशेष रोडमैप की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस विज़न को मापने योग्य मील के पत्थरों से कब जोड़ा जाएगा। 25 करोड़ की गरीबी से मुक्ति एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, परंतु आलोचक यह भी पूछते हैं कि रोजगार की गुणवत्ता, आय असमानता और मानव विकास सूचकांक पर भारत की स्थिति क्या है। 'फ्रेजाइल फाइव' से बाहर निकलना निश्चित रूप से प्रगति है, लेकिन GDP में मैन्युफैक्चरिंग और कृषि आय जैसे संरचनात्मक सुधार अभी भी अधूरे हैं। बिना पारदर्शी जवाबदेही ढाँचे के, यह संकल्प हर साल नए जोश के साथ दोहराया जाने वाला वादा बनकर न रह जाए — यह सुनिश्चित करना सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य क्या है?
'विकसित भारत 2047' भारत सरकार का वह संकल्प है जिसके तहत देश को 2047 तक — यानी आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर — एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें आर्थिक, सामाजिक और बुनियादी ढाँचे के क्षेत्रों में व्यापक प्रगति शामिल है।
PM मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ से 2047 तक 'विकसित भारत' का सपना अवश्य साकार होगा। उन्होंने पिछले 12 वर्षों में 25 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर निकलने और भारत के तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने का उल्लेख किया।
भारत 'फ्रेजाइल फाइव' से कैसे बाहर निकला?
2014 तक भारत को वैश्विक स्तर पर सबसे कमजोर उभरती अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, जिसे 'फ्रेजाइल फाइव' कहा गया। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में नीतिगत सुधारों और देशवासियों के सामूहिक प्रयासों से भारत ने यह छवि बदली और अब वह दुनिया की तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
25 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर निकलने का दावा किस पर आधारित है?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि पिछले 12 वर्षों में 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर निकले हैं। यह आँकड़ा सरकारी आँकड़ों और नीति आयोग की रिपोर्टों पर आधारित बताया जाता है, हालाँकि विभिन्न अर्थशास्त्री इसकी गणना-पद्धति पर अलग-अलग मत रखते हैं।
'विकसित भारत 2047' से आम नागरिक को क्या फायदा होगा?
इस विज़न में रोजगार सृजन, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, उन्नत बुनियादी ढाँचा और उच्च जीवन-स्तर शामिल हैं। हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लाभ तभी व्यापक होंगे जब नीतियाँ ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समान रूप से लागू हों और रोजगार की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए।
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