'विकसित भारत' 2047 तक अवश्य बनेगा, 140 करोड़ देशवासियों का पुरुषार्थ है असली ताकत: PM मोदी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए 'विकसित भारत' के संकल्प को एक बार फिर दृढ़ता से दोहराया। उन्होंने कहा कि जब 2047 में देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे होंगे, तब भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने खड़ा होगा — और यह लक्ष्य 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक पुरुषार्थ से हासिल किया जाएगा।
बड़े सपने और दृढ़ संकल्प की पुकार
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कोई भी राष्ट्र तब महान बनता है जब वह अपने सपनों, संकल्पों और सामर्थ्य के दम पर आगे बढ़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब 'छोटे सपनों' से काम नहीं चलेगा — बड़े सपने ही सोच के क्षितिज को विस्तृत करते हैं और राष्ट्र की ऊर्जा को नई दिशा देते हैं।
मोदी ने कहा कि जब संकल्प दृढ़ होता है, तो कठिनाइयों और आपदाओं के बीच से रास्ता निकालने का सामर्थ्य स्वतः उभर कर आता है। उनके अनुसार, ऊँचे सपने और ऊँचे संकल्प मिलकर राष्ट्र के प्रयासों की ऊँचाई को भी बढ़ाते हैं।
पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियाँ
प्रधानमंत्री ने कहा कि वे यह दावा खाली हाथ नहीं कर रहे। उनके अनुसार, पिछले 12 वर्षों में देशवासियों ने संकल्प और समर्पण के साथ भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने में अथक प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा, 'यह उसी का परिणाम है कि इतने कम समय में 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर निकले हैं।' इन्हीं प्रयासों के चलते भारत आज दुनिया की तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
'फ्रेजाइल फाइव' से विश्व-शक्ति की ओर
मोदी ने याद दिलाया कि 2014 तक भारत को वैश्विक स्तर पर 'फ्रेजाइल फाइव' देशों की सूची में रखा जाता था — यानी वे अर्थव्यवस्थाएँ जो सबसे कमजोर मानी जाती थीं। उन्होंने कहा कि उस दौर में 'होती है, चलती है, हो जाएगा' की मानसिकता हावी थी। गौरतलब है कि पिछले एक दशक में भारत ने इस छवि को पलटते हुए वैश्विक विकास की अगली पंक्ति में जगह बनाई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश 'विकसित' होने का संकल्प लेता है, तो यह वैश्विक नजरिए को बदलने पर मजबूर करता है और भारत के साहस का परिचायक बन जाता है।
आम जनता पर असर
'विकसित भारत' का यह विज़न केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है — इसमें सामाजिक उत्थान, बुनियादी ढाँचे का विस्तार और नागरिकों के जीवन-स्तर में सुधार भी शामिल है। प्रधानमंत्री के अनुसार, 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक संकल्प और सामर्थ्य को अब रोकना नामुमकिन है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और प्रमुख क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है। 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को लेकर आने वाले महीनों में नीतिगत घोषणाओं और क्षेत्र-विशेष रोडमैप की उम्मीद है।