पश्चिम बंगाल: 'सेबाश्रय' कैंप में बिना अनुमति शामिल डॉक्टरों पर कार्रवाई के कगार पर स्वास्थ्य विभाग
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने उन सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार शुरू कर दिया है, जिन्होंने कथित तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों की पूर्व अनुमति लिए बिना तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी द्वारा आयोजित 'सेबाश्रय' स्वास्थ्य शिविरों में मरीजों की जाँच और इलाज किया। 29 सितंबर 2026 को सामने आई इस जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने इन शिविरों से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जाँच के लिए चार सदस्यीय जाँच कमेटी गठित की है।
जाँच कमेटी की कार्यवाही
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, चार सदस्यीय जाँच कमेटी ने उन सरकारी डॉक्टरों से पूछताछ शुरू कर दी है जो बिना सीनियर अधिकारियों की मंजूरी के इन शिविरों में शामिल हुए थे। विभाग के एक सूत्र ने बताया, 'उनके जवाब कितने संतोषजनक हैं, इस आधार पर कमेटी तय करेगी कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए या नहीं और उस कार्रवाई का स्वरूप क्या होगा।' कमेटी मुख्य रूप से यह जानना चाहती है कि क्या संबंधित डॉक्टरों ने अपने रिपोर्टिंग मैनेजरों से विधिवत मंजूरी ली थी, और यदि हाँ, तो किन अधिकारियों ने यह अनुमति दी।
गंभीर आरोप: इंटर्न और उपकरणों पर भी सवाल
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जाँच के दायरे में केवल अनुमति का मामला नहीं है, बल्कि दो और गंभीर आरोप भी हैं। पहला, राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के मेडिकल इंटर्न और अंतिम वर्ष के छात्रों को कथित तौर पर इन शिविरों में शामिल होने के लिए दबाव डाला गया। दूसरा, राज्य द्वारा संचालित मेडिकल कॉलेजों से अल्ट्रासोनोग्राफी मशीनों सहित अत्याधुनिक उपकरण बिना अनुमति के इन शिविरों में ले जाए गए और उपयोग किए गए।
जाँच कमेटी यह भी पता करेगी कि मेडिकल इंटर्न और छात्र स्वेच्छा से इन शिविरों में गए थे या किसी वरिष्ठ अधिकारी अथवा राजनीतिक व्यक्ति के दबाव में।
छात्रों के प्रति नरम रुख, डॉक्टरों पर सख्ती संभव
हालाँकि विभाग ने मेडिकल इंटर्न और छात्रों के भविष्य के करियर को देखते हुए उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई से परहेज का संकेत दिया है। अधिकारी के अनुसार, 'उन्हें बख्शा जा सकता है, लेकिन कड़ी चेतावनी जरूर दी जाएगी।' वहीं, सरकारी डॉक्टरों के मामले में, जाँच के निष्कर्षों के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 'सेबाश्रय' शिविरों का आयोजन TMC के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने किया था, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में स्वास्थ्य क्षेत्र पहले से ही राजनीतिक विवादों के केंद्र में रहा है। यह स्पष्ट नहीं है कि स्वास्थ्य विभाग की यह कार्रवाई पार्टी के भीतर किसी आंतरिक दबाव की परिणति है या प्रशासनिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा।
आगे क्या होगा
जाँच कमेटी के निष्कर्षों के बाद स्वास्थ्य विभाग अंतिम निर्णय लेगा। संबंधित रिपोर्टिंग अधिकारियों से भी सीधे पुष्टि की जाएगी कि उन्होंने डॉक्टरों को शिविर में जाने की अनुमति दी थी या नहीं। यह मामला पश्चिम बंगाल में सरकारी चिकित्साकर्मियों की सेवा-शर्तों और राजनीतिक दबाव के प्रश्नों पर एक महत्त्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।