टीएमसी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी का अभिषेक पर वार: CAPF सुरक्षा माँगने और I-PAC से पार्टी चलाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित उलूबेरिया (पूर्व) के विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने मंगलवार, 2 जून 2026 को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद अभिषेक बनर्जी पर सीधा हमला बोला। निष्कासन के महज़ एक दिन बाद की गई इस तीखी प्रतिक्रिया में ऋतब्रत ने अभिषेक पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की सुरक्षा माँगने और इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के ज़रिए TMC को कॉरपोरेट ढंग से चलाने का आरोप लगाया।
CAPF सुरक्षा पर सवाल
ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि 30 मई को दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में जनता के विरोध का सामना करने के बाद अभिषेक बनर्जी ने अपने लिए CAPF सुरक्षा की माँग की है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, "वे किस तरह के जननेता हैं? पार्टी की करारी हार के बाद 26 दिनों तक घर में रहे। अब अपने लिए केंद्रीय बलों की सुरक्षा माँग रहे हैं। पहले कहते थे कि जनता उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त है, तो अब सुरक्षा कवच की ज़रूरत क्यों पड़ रही है?"
उन्होंने यह भी कहा, "हमने अपने लिए कभी ऐसी सुरक्षा नहीं माँगी। कुछ लोग मुझे गद्दार कह सकते हैं, लेकिन कोई मुझे चोर नहीं कह रहा।"
I-PAC और कॉरपोरेट शैली का आरोप
ऋतब्रत बनर्जी ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी ने I-PAC के माध्यम से TMC को कॉरपोरेट शैली में संचालित करने की कोशिश की, जिसका पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने याद दिलाया कि यह वही पार्टी है, जिसे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने अथक परिश्रम से खड़ा किया था। उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी जैसे नेता बहुत कम होते हैं। मैं उनका सम्मान करता था, आज भी करता हूँ और आगे भी करता रहूँगा।"
निष्कासन की पृष्ठभूमि
ऋतब्रत बनर्जी और कोलकाता की एंटाली विधानसभा सीट से TMC विधायक संदीपन साहा को सोमवार, 1 जून को पार्टी से निष्कासित किया गया था। यह कार्रवाई उस समय की गई जब विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने मीडिया को बताया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के लिए आरक्षित चार महत्वपूर्ण पदों के आवंटन-प्रस्ताव में TMC विधायकों के हस्ताक्षरों में गड़बड़ी का मामला सबसे पहले इन्हीं दोनों विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस के कार्यालय के संज्ञान में लाया था।
CID जाँच का आदेश
हस्ताक्षर विसंगति मामले की जाँच अब पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जाँच विभाग (CID) को सौंपी गई है। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब TMC पश्चिम बंगाल में हाल के चुनावी झटकों के बाद आंतरिक एकजुटता बनाए रखने की कोशिश कर रही है। पार्टी के भीतर से उठती ये आवाज़ें नेतृत्व के लिए नई चुनौती बन सकती हैं।