15 जुलाई 2026
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अभिषेक बनर्जी 30 मई से लौटेंगे सक्रिय राजनीति में, चुनाव बाद हिंसा पीड़ित TMC कार्यकर्ताओं से मिलेंगे

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अभिषेक बनर्जी 30 मई से लौटेंगे सक्रिय राजनीति में, चुनाव बाद हिंसा पीड़ित TMC कार्यकर्ताओं से मिलेंगे

सारांश

बंगाल में सत्ता गँवाने के बाद लगभग चार हफ्तों की चुप्पी तोड़ते हुए TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी 30 मई से मैदान में उतर रहे हैं — चुनाव बाद हिंसा पीड़ित कार्यकर्ताओं से मुलाकात के साथ। सुरक्षा कटौती, KMC नोटिस और FIR के बीच यह वापसी पार्टी के लिए सांकेतिक है।

मुख्य बातें

अभिषेक बनर्जी 30 मई 2026 (शनिवार) से सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियाँ फिर से शुरू करेंगे।
4 मई को पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों के बाद से वे सार्वजनिक जीवन से लगभग अनुपस्थित थे।
शनिवार को सोनारपुर-दक्षिण और बेलेघाटा में चुनाव बाद हिंसा पीड़ित TMC कार्यकर्ताओं से मुलाकात तय।
राज्य सरकार ने उनकी हाई-प्रोफाइल सुरक्षा वापस ली; अब केवल सांसद-स्तर की सुरक्षा।
KMC ने उनकी 17 संपत्तियों को नोटिस जारी किए हैं।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने FIR मामले में जुलाई तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और डायमंड हार्बर से तीन बार के सांसद अभिषेक बनर्जी 30 मई 2026 (शनिवार) से अपनी सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियाँ फिर से शुरू करेंगे। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित होने के बाद से वे काफी हद तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहे थे और केवल सोशल मीडिया के ज़रिए बयान जारी कर रहे थे।

शनिवार के कार्यक्रम

तृणमूल कांग्रेस द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी के 30 मई को दो कार्यक्रम निर्धारित हैं। दोनों ही कार्यक्रम उन पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात से जुड़े हैं, जो कथित तौर पर चुनाव बाद हुई हिंसा से प्रभावित बताए जा रहे हैं।

TMC के एक नेता ने बताया कि अभिषेक बनर्जी सबसे पहले दक्षिण 24 परगना जिले की सोनारपुर-दक्षिण विधानसभा सीट पर पार्टी कार्यकर्ता संजू कर्मकार से मिलेंगे, जो इस महीने की शुरुआत में चुनाव के बाद हुई हिंसा का शिकार हुए थे। इसके बाद वे उत्तरी कोलकाता की बेलेघाटा विधानसभा सीट पर पार्टी कार्यकर्ता बिस्वजीत पट्टनायक से मुलाकात करेंगे, जो चुनाव बाद हिंसा से प्रभावित बताए जा रहे हैं।

सुरक्षा घटाई गई, KMC का नोटिस

4 मई को चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद से अभिषेक बनर्जी की स्थिति में कई बड़े बदलाव आए हैं। राज्य सरकार ने उनकी वह हाई-प्रोफाइल सुरक्षा व्यवस्था वापस ले ली है, जो उन्हें ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के दौरान मिली हुई थी। अब उन्हें केवल वही सुरक्षा दी गई है जिसके वे लोकसभा सदस्य के रूप में हकदार हैं।

इसके साथ ही, कोलकाता नगर निगम (KMC) ने 17 संपत्तियों को नोटिस जारी किए हैं, जिनका मालिकाना हक या तो अभिषेक बनर्जी के पास है या जिनमें वे सह-मालिक हैं। KMC ने इन संपत्तियों की 'एलिवेशन कॉपी' माँगी है ताकि यह जाँचा जा सके कि मूल ढाँचे में बिना पूर्व अनुमति कोई बदलाव या निर्माण तो नहीं हुआ।

FIR और अदालत से अंतरिम राहत

चुनाव से पहले एक प्रचार रैली में कथित तौर पर भड़काऊ बयान देने के आरोप में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक FIR भी दर्ज की गई है। हालाँकि, कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश पीठ ने पिछले सप्ताह उन्हें इस मामले में जुलाई तक किसी भी पुलिस कार्रवाई — जिसमें गिरफ्तारी भी शामिल है — से अंतरिम राहत प्रदान की है। साथ ही, अदालत ने उनके विदेश दौरे पर कुछ पाबंदियाँ भी लगाई हैं।

राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद TMC विपक्ष की भूमिका में आ गई है और पार्टी अपनी संगठनात्मक रणनीति को नए सिरे से तय करने में जुटी है। गौरतलब है कि अभिषेक बनर्जी लंबे समय से TMC के भीतर दूसरी पंक्ति के सबसे प्रमुख चेहरे माने जाते रहे हैं। चुनाव बाद हिंसा पीड़ित कार्यकर्ताओं से मुलाकात के ज़रिए उनकी वापसी पार्टी के ज़मीनी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

आने वाले हफ्तों में अभिषेक बनर्जी की सक्रियता और TMC की विपक्षी रणनीति की दिशा स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि TMC के भीतर उनकी प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश है — ऐसे समय में जब पार्टी सत्ता से बाहर है और उनके खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक दबाव बढ़ रहा है। हिंसा पीड़ित कार्यकर्ताओं से मुलाकात एक सोची-समझी छवि-निर्माण रणनीति है, जो उन्हें 'जमीन से जुड़े नेता' के रूप में स्थापित करती है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या KMC नोटिस और FIR जैसे मामले उनकी सक्रियता को आगे भी बाधित कर सकते हैं, और क्या TMC एक मजबूत विपक्षी ताकत के रूप में खुद को पुनर्गठित कर पाएगी।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी 30 मई को कहाँ जाएंगे?
अभिषेक बनर्जी 30 मई को दक्षिण 24 परगना की सोनारपुर-दक्षिण विधानसभा सीट पर TMC कार्यकर्ता संजू कर्मकार से और उत्तरी कोलकाता की बेलेघाटा विधानसभा सीट पर कार्यकर्ता बिस्वजीत पट्टनायक से मुलाकात करेंगे। दोनों कार्यकर्ता चुनाव बाद हुई हिंसा से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
चुनाव नतीजों के बाद अभिषेक बनर्जी सार्वजनिक जीवन से क्यों दूर थे?
4 मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC की हार के बाद अभिषेक बनर्जी काफी हद तक सार्वजनिक गतिविधियों से दूर रहे और केवल सोशल मीडिया के ज़रिए बयान जारी कर रहे थे। इस दौरान उनकी सुरक्षा कटौती, KMC नोटिस और FIR जैसे कई मामले भी सामने आए।
KMC ने अभिषेक बनर्जी की संपत्तियों को नोटिस क्यों दिया?
कोलकाता नगर निगम (KMC) ने उन 17 संपत्तियों को नोटिस जारी किए हैं जिनके मालिक या सह-मालिक अभिषेक बनर्जी हैं। KMC ने 'एलिवेशन कॉपी' माँगी है ताकि जाँचा जा सके कि मूल ढाँचे में बिना अनुमति कोई बदलाव या निर्माण तो नहीं हुआ।
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज FIR किस मामले में है?
चुनाव से पहले एक प्रचार रैली में कथित तौर पर भड़काऊ बयान देने के आरोप में उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है। कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश पीठ ने उन्हें जुलाई तक गिरफ्तारी सहित किसी भी पुलिस कार्रवाई से अंतरिम राहत दी है, हालाँकि विदेश यात्रा पर कुछ पाबंदियाँ लगाई गई हैं।
अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में क्या बदलाव हुआ है?
राज्य सरकार ने चुनाव नतीजों के बाद अभिषेक बनर्जी की वह हाई-प्रोफाइल सुरक्षा व्यवस्था वापस ले ली है जो उन्हें ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के दौरान मिली थी। अब उन्हें केवल लोकसभा सदस्य के रूप में मिलने वाली मानक सुरक्षा दी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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