अभिषेक बनर्जी 30 मई से लौटेंगे सक्रिय राजनीति में, चुनाव बाद हिंसा पीड़ित TMC कार्यकर्ताओं से मिलेंगे
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और डायमंड हार्बर से तीन बार के सांसद अभिषेक बनर्जी 30 मई 2026 (शनिवार) से अपनी सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियाँ फिर से शुरू करेंगे। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित होने के बाद से वे काफी हद तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहे थे और केवल सोशल मीडिया के ज़रिए बयान जारी कर रहे थे।
शनिवार के कार्यक्रम
तृणमूल कांग्रेस द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी के 30 मई को दो कार्यक्रम निर्धारित हैं। दोनों ही कार्यक्रम उन पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात से जुड़े हैं, जो कथित तौर पर चुनाव बाद हुई हिंसा से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
TMC के एक नेता ने बताया कि अभिषेक बनर्जी सबसे पहले दक्षिण 24 परगना जिले की सोनारपुर-दक्षिण विधानसभा सीट पर पार्टी कार्यकर्ता संजू कर्मकार से मिलेंगे, जो इस महीने की शुरुआत में चुनाव के बाद हुई हिंसा का शिकार हुए थे। इसके बाद वे उत्तरी कोलकाता की बेलेघाटा विधानसभा सीट पर पार्टी कार्यकर्ता बिस्वजीत पट्टनायक से मुलाकात करेंगे, जो चुनाव बाद हिंसा से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
सुरक्षा घटाई गई, KMC का नोटिस
4 मई को चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद से अभिषेक बनर्जी की स्थिति में कई बड़े बदलाव आए हैं। राज्य सरकार ने उनकी वह हाई-प्रोफाइल सुरक्षा व्यवस्था वापस ले ली है, जो उन्हें ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के दौरान मिली हुई थी। अब उन्हें केवल वही सुरक्षा दी गई है जिसके वे लोकसभा सदस्य के रूप में हकदार हैं।
इसके साथ ही, कोलकाता नगर निगम (KMC) ने 17 संपत्तियों को नोटिस जारी किए हैं, जिनका मालिकाना हक या तो अभिषेक बनर्जी के पास है या जिनमें वे सह-मालिक हैं। KMC ने इन संपत्तियों की 'एलिवेशन कॉपी' माँगी है ताकि यह जाँचा जा सके कि मूल ढाँचे में बिना पूर्व अनुमति कोई बदलाव या निर्माण तो नहीं हुआ।
FIR और अदालत से अंतरिम राहत
चुनाव से पहले एक प्रचार रैली में कथित तौर पर भड़काऊ बयान देने के आरोप में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक FIR भी दर्ज की गई है। हालाँकि, कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश पीठ ने पिछले सप्ताह उन्हें इस मामले में जुलाई तक किसी भी पुलिस कार्रवाई — जिसमें गिरफ्तारी भी शामिल है — से अंतरिम राहत प्रदान की है। साथ ही, अदालत ने उनके विदेश दौरे पर कुछ पाबंदियाँ भी लगाई हैं।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद TMC विपक्ष की भूमिका में आ गई है और पार्टी अपनी संगठनात्मक रणनीति को नए सिरे से तय करने में जुटी है। गौरतलब है कि अभिषेक बनर्जी लंबे समय से TMC के भीतर दूसरी पंक्ति के सबसे प्रमुख चेहरे माने जाते रहे हैं। चुनाव बाद हिंसा पीड़ित कार्यकर्ताओं से मुलाकात के ज़रिए उनकी वापसी पार्टी के ज़मीनी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
आने वाले हफ्तों में अभिषेक बनर्जी की सक्रियता और TMC की विपक्षी रणनीति की दिशा स्पष्ट होगी।