मोहन भागवत के न्यूयॉर्क बयान पर मोहम्मद अदीब का पलटवार: बजरंग दल और VHP को हिंदू मानने से इनकार करें भागवत
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व राज्यसभा सांसद और मुस्लिम विद्वान मोहम्मद अदीब ने 4 सितंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। अदीब ने माँग की कि भागवत भारत में आकर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करें कि बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद (VHP) और अन्य हिंदू संगठन उनके प्रतिनिधि नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने वंदे मातरम विवाद और उत्तराखंड के निकाह संबंधी फैसले पर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
भागवत के बयान पर अदीब का सीधा सवाल
अदीब ने कहा, मोहन भागवत को हिंदुस्तान में आकर ऐलान करना चाहिए कि 'बजरंग दल हिंदू नहीं है, विश्व हिंदू परिषद हिंदू नहीं है।' उन्होंने यह भी पूछा कि हिंदू महासभा से लेकर बजरंग दल और VHP — ये सभी संगठन आखिर किससे ताल्लुक रखते हैं? उनके अनुसार, जब तक भागवत इन संगठनों से खुद को अलग करने का स्पष्ट बयान नहीं देते, तब तक उनके न्यूयॉर्क वाले वक्तव्य का कोई अर्थ नहीं।
अदीब ने आरोप लगाया कि RSS और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने मस्जिदों, खानकाहों और कब्रस्तानों पर कथित हमलों के बारे में कभी कोई बयान नहीं दिया। उन्होंने कहा, 'अगर वो यह समझते हैं कि ये संगठन हिंदू नहीं हैं, तो आज तक चुप क्यों रहे?'
आरएसएस की वैश्विक छवि पर टिप्पणी
अदीब ने कहा कि अमेरिका और पश्चिमी देशों में पहले RSS की पहचान सीमित थी, लेकिन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे के बाद वहाँ के लोगों ने संघ को गहराई से समझना शुरू किया। उनके अनुसार, पश्चिमी दुनिया को अब यह स्पष्ट हो रहा है कि RSS वास्तव में क्या है और उसके उद्देश्य क्या हैं।
वंदे मातरम विवाद: सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी
पश्चिम बंगाल के विधानसभा अध्यक्ष सुवेंदु अधिकारी के वंदे मातरम संबंधी निर्देश पर अदीब ने स्पष्ट किया कि जिस तरह सिखों ने इस मामले में अपना रुख सार्वजनिक किया है, उसी तरह वे भी ऐलान कर रहे हैं कि वंदे मातरम नहीं पढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएँगे और यह तर्क देंगे कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहाँ किसी एक धार्मिक आस्था को थोपा नहीं जा सकता।
उत्तराखंड निकाह फैसले पर आपत्ति
उत्तराखंड में निकाह से जुड़े कानूनी फैसले पर अदीब ने कहा कि जिन लोगों का खुद का धार्मिक आधार अभी तय नहीं है, वे मुस्लिम विवाह कानून पर निर्णय नहीं कर सकते। उन्होंने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को सनातन धर्म की परंपराओं के विपरीत बताया और कहा कि यह 'हिंदुत्व को एक नए मज़हब' के रूप में स्थापित करने का प्रयास है। अदीब ने यह भी कहा कि वे इस मामले में याचिका दायर करेंगे और कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।
सोनिया गांधी की आत्मकथा पर टिप्पणी
अदीब ने सोनिया गांधी की आत्मकथा के प्रकाशन विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन संस्थान का इस मामले में पीछे हटना चिंताजनक है। उनके अनुसार, किताब में लिखी बातें सोनिया गांधी के अपने विचार हैं और जैसे-जैसे किताब के और अंश सामने आएँगे, 'तल्ख हकीकतें' उजागर होंगी। अदीब ने कहा कि जो यह दावा करता है कि यह देश लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष है, उसे इस घटनाक्रम पर पुनर्विचार करना चाहिए।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में धर्म, कानून और राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर बहस तेज़ हो रही है। आने वाले दिनों में सर्वोच्च न्यायालय में दायर होने वाली याचिकाएँ इस मुद्दे को नई दिशा दे सकती हैं।