30 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत की धर्मनिरपेक्षता हिंदू समाज की देन: BJP सांसद प्रदीप कुमार वर्मा का भागवत के बयान पर समर्थन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत की धर्मनिरपेक्षता हिंदू समाज की देन: BJP सांसद प्रदीप कुमार वर्मा का भागवत के बयान पर समर्थन

सारांश

BJP सांसद प्रदीप कुमार वर्मा ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क बयान को 1893 में विवेकानंद की शिकागो स्पीच से जोड़ा और कहा — भारत की धर्मनिरपेक्षता हिंदू समाज की सहिष्णुता का प्रमाण है। साथ ही उन्होंने उज़्बेकिस्तान के साथ हुए ऊर्जा समझौते को भी ऐतिहासिक बताया।

मुख्य बातें

BJP सांसद प्रदीप कुमार वर्मा ने 30 अगस्त 2026 को RSS प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क बयान का समर्थन किया।
वर्मा के अनुसार, भारत की धर्मनिरपेक्षता हिंदू समाज की समावेशी एवं सहिष्णु प्रकृति के कारण कायम है।
उन्होंने भागवत के बयान की तुलना 1893 में स्वामी विवेकानंद के शिकागो संबोधन से की।
उज़्बेकिस्तान द्वारा PM मोदी को सर्वोच्च सम्मान दिए जाने को वर्मा ने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रमाण बताया।
भारत-उज़्बेकिस्तान के बीच हुए ऊर्जा समझौते को वर्मा ने देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद एवं राष्ट्रीय सचिव प्रदीप कुमार वर्मा ने 30 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में दिए गए बयान का पुरज़ोर समर्थन किया। वर्मा ने कहा कि भारत में धर्मनिरपेक्षता का वातावरण मुख्यतः हिंदू समाज की सहिष्णु और समावेशी प्रकृति के कारण जीवित है।

वर्मा का मुख्य तर्क

प्रदीप कुमार वर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा, 'भारत में जो धर्मनिरपेक्ष माहौल है, वह मुख्य रूप से हिंदू समाज की वजह से है। हिंदू बहुसंख्यक हैं, इसलिए भारत हमेशा से ऐसा समाज रहा है जो सभी को साथ लेकर चलता है और सभी धर्मों एवं पंथों का बराबर सम्मान करता है।' उनके अनुसार, बहुसंख्यक समुदाय की यह समावेशी भावना ही भारतीय धर्मनिरपेक्षता की नींव है।

भागवत और विवेकानंद से जोड़ा धागा

BJP नेता ने मोहन भागवत को उसी भावना का प्रतिनिधि बताया जिसे भारतीय विचारकों ने सदियों से वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि 1893 में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में जो विचार रखे थे, वही सत्य आज मोहन भागवत न्यूयॉर्क में दोहरा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भागवत की विदेश यात्राओं और उनके वैश्विक संबोधनों पर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है।

PM मोदी को उज़्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान पर प्रतिक्रिया

वर्मा ने उज़्बेकिस्तान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च सम्मान दिए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2014 से अब तक मोदी के नेतृत्व को वैश्विक स्तर पर जो मान्यता मिली है, वह अभूतपूर्व है। उनके अनुसार, दुनिया भर के कई देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाज़ा है।

भारत-उज़्बेकिस्तान ऊर्जा समझौता

वर्मा ने इस अवसर पर भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच हुए ऊर्जा समझौते को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच भारत की ऊर्जा ज़रूरतों को लेकर हुआ यह करार आने वाले समय में ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज़ से सकारात्मक सिद्ध होगा। गौरतलब है कि भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा माँग को पूरा करने के लिए मध्य एशियाई देशों के साथ संबंध मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

राजनीतिक संदर्भ

मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे और वहाँ दिए गए बयानों ने भारत में राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दी है। BJP नेताओं का इस बयान को समर्थन देना दर्शाता है कि सत्तारूढ़ दल और RSS के बीच वैचारिक समन्वय बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि धर्मनिरपेक्षता को किसी एक समुदाय की 'देन' बताना संवैधानिक ढाँचे की व्यापक समझ से अलग है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि किसी बहुसंख्यक की सदाशयता में, निहित मानती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अल्पसंख्यक अधिकारों पर वैश्विक मंचों पर भारत की जाँच बढ़ रही है। मुख्यधारा की कवरेज इस वैचारिक दावे के संवैधानिक तनाव को अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BJP सांसद प्रदीप कुमार वर्मा ने भागवत के बयान पर क्या कहा?
वर्मा ने कहा कि भारत में धर्मनिरपेक्ष माहौल मुख्यतः हिंदू समाज की समावेशी प्रकृति के कारण है, क्योंकि हिंदू बहुसंख्यक होते हुए भी सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। उन्होंने इसे RSS प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क बयान के संदर्भ में कहा।
मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में क्या कहा था?
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में एक संबोधन में भारतीय संस्कृति की सर्वधर्म समभाव की परंपरा पर बात की थी। BJP नेताओं ने उनके इस बयान को 1893 में स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण की निरंतरता बताया है।
उज़्बेकिस्तान ने PM मोदी को कौन-सा सम्मान दिया?
उज़्बेकिस्तान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से नवाज़ा। BJP सांसद वर्मा के अनुसार, 2014 से अब तक कई देशों ने मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मानों से सम्मानित किया है।
भारत-उज़्बेकिस्तान ऊर्जा समझौता किस बारे में है?
वर्मा के अनुसार, दोनों देशों के बीच भारत की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए एक समझौता हुआ है। उन्होंने कहा कि यह करार आने वाले समय में भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सकारात्मक साबित होगा।
आलोचक इस बयान पर क्या कह रहे हैं?
आलोचकों का कहना है कि धर्मनिरपेक्षता को किसी एक समुदाय की 'देन' बताना भारतीय संविधान की उस अवधारणा से अलग है जो इसे राज्य के ढाँचे में निहित मानती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर वैश्विक बहस जारी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 घंटे पहले
  2. 6 घंटे पहले
  3. 8 घंटे पहले
  4. 9 घंटे पहले
  5. 14 घंटे पहले
  6. 23 घंटे पहले
  7. कल
  8. 4 दिन पहले