भारत की धर्मनिरपेक्षता हिंदू समाज की देन: BJP सांसद प्रदीप कुमार वर्मा का भागवत के बयान पर समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद एवं राष्ट्रीय सचिव प्रदीप कुमार वर्मा ने 30 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में दिए गए बयान का पुरज़ोर समर्थन किया। वर्मा ने कहा कि भारत में धर्मनिरपेक्षता का वातावरण मुख्यतः हिंदू समाज की सहिष्णु और समावेशी प्रकृति के कारण जीवित है।
वर्मा का मुख्य तर्क
प्रदीप कुमार वर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा, 'भारत में जो धर्मनिरपेक्ष माहौल है, वह मुख्य रूप से हिंदू समाज की वजह से है। हिंदू बहुसंख्यक हैं, इसलिए भारत हमेशा से ऐसा समाज रहा है जो सभी को साथ लेकर चलता है और सभी धर्मों एवं पंथों का बराबर सम्मान करता है।' उनके अनुसार, बहुसंख्यक समुदाय की यह समावेशी भावना ही भारतीय धर्मनिरपेक्षता की नींव है।
भागवत और विवेकानंद से जोड़ा धागा
BJP नेता ने मोहन भागवत को उसी भावना का प्रतिनिधि बताया जिसे भारतीय विचारकों ने सदियों से वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि 1893 में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में जो विचार रखे थे, वही सत्य आज मोहन भागवत न्यूयॉर्क में दोहरा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भागवत की विदेश यात्राओं और उनके वैश्विक संबोधनों पर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है।
PM मोदी को उज़्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान पर प्रतिक्रिया
वर्मा ने उज़्बेकिस्तान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च सम्मान दिए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2014 से अब तक मोदी के नेतृत्व को वैश्विक स्तर पर जो मान्यता मिली है, वह अभूतपूर्व है। उनके अनुसार, दुनिया भर के कई देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाज़ा है।
भारत-उज़्बेकिस्तान ऊर्जा समझौता
वर्मा ने इस अवसर पर भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच हुए ऊर्जा समझौते को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच भारत की ऊर्जा ज़रूरतों को लेकर हुआ यह करार आने वाले समय में ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज़ से सकारात्मक सिद्ध होगा। गौरतलब है कि भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा माँग को पूरा करने के लिए मध्य एशियाई देशों के साथ संबंध मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
राजनीतिक संदर्भ
मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे और वहाँ दिए गए बयानों ने भारत में राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दी है। BJP नेताओं का इस बयान को समर्थन देना दर्शाता है कि सत्तारूढ़ दल और RSS के बीच वैचारिक समन्वय बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि धर्मनिरपेक्षता को किसी एक समुदाय की 'देन' बताना संवैधानिक ढाँचे की व्यापक समझ से अलग है।