शीत्सांग भूस्खलन का कारण उजागर: नेपाल में ग्लेशियर टूटने से चीलोंग में 27 इमारतें तबाह
सारांश
मुख्य बातें
चीन के शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के चीलोंग काउंटी में हुए विनाशकारी भूस्खलन का कारण अब सामने आ गया है। चीनी विज्ञान अकादमी के छंगतू पर्वत अनुसंधान संस्थान की आपातकालीन आपदा न्यूनीकरण टीम के विश्लेषण के अनुसार, 26 अगस्त को नेपाल में लगभग 5,200 मीटर की ऊंचाई पर एक ग्लेशियर के टूटने से यह तबाही शुरू हुई। 30 अगस्त को शीत्सांग की नगरपालिका के न्यूज कार्यालय द्वारा आयोजित ब्रीफिंग में यह जानकारी साझा की गई।
भूस्खलन का कारण और घटनाक्रम
रिमोट सेंसिंग निगरानी डेटा, ऑन-साइट डेटा के विश्लेषण और साइट निरीक्षण के आधार पर विशेषज्ञों ने पुष्टि की कि 26 अगस्त को सुबह 10 बजकर 52 मिनट (बीजिंग समयानुसार) नेपाल में 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर टूटा, जिससे हिमस्खलन हुआ। इसके बाद अत्यधिक ऊंचाई से लगभग 4,000 मीटर तक तेज़ रफ़्तार से भूस्खलन हुआ।
यह भूस्खलन लगभग 22 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 1,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चीलोंग पोर्ट तक पहुंचा। इस दौरान मलबे की रफ़्तार और आयतन इतना अधिक था कि उसे रोकना संभव नहीं हो सका।
नुकसान का दायरा
भूस्खलन के कारण चीलोंग पोर्ट क्षेत्र में लगभग 0.7 वर्ग किलोमीटर का इलाका तबाह हो गया। इसमें 27 इमारतें और उनसे जुड़ी सुविधाएं पूरी तरह नष्ट हो गईं। गौरतलब है कि यह क्षेत्र नेपाल-चीन सीमा के निकट है, जो इस आपदा की अंतरराष्ट्रीय व्यापकता को रेखांकित करता है।
वैज्ञानिक जांच और निगरानी तंत्र
चीनी विज्ञान अकादमी की टीम ने रिमोट सेंसिंग तकनीक और ज़मीनी निरीक्षण के संयोजन से भूस्खलन की उत्पत्ति और मार्ग का पता लगाया। यह ऐसे समय में आया है जब हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों के पिघलने और टूटने की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च ऊंचाई वाले ग्लेशियरों की निगरानी और पूर्व-चेतावनी प्रणाली को और मज़बूत करने की ज़रूरत है।
आगे की स्थिति
संबंधित अधिकारियों ने बताया कि राहत और बचाव कार्य जारी हैं तथा प्रभावित क्षेत्र में स्थिति का आकलन किया जा रहा है। शीत्सांग प्रशासन ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है ताकि किसी भी संभावित द्वितीयक भूस्खलन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।