सिचुआन में 5.1 तीव्रता का भूकंप, नेपाल बाढ़ के बीच 47 ग्लेशियर झीलों पर मंडराया खतरा
सारांश
मुख्य बातें
चीन के दक्षिण-पश्चिमी सिचुआन प्रांत के लोंगचांग शहर में 28 अगस्त को दोपहर 1:13 बजे (बीजिंग समय) 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर (CENC) के अनुसार, भूकंप का केंद्र 29.23° उत्तरी अक्षांश और 105.22° पूर्वी देशांतर पर 13 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया। अधिकारियों के अनुसार, अभी तक किसी हताहत या संपत्ति के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
भूकंप का विवरण
CENC द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, यह भूकंप मध्यम तीव्रता का था और इसका केंद्र अपेक्षाकृत उथली गहराई पर था, जिससे सतह पर कंपन अधिक महसूस होने की संभावना रहती है। फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आपातकालीन अलर्ट जारी नहीं किया गया है और स्थिति पर नज़र रखी जा रही है।
नेपाल में बाढ़ की भीषण तबाही
यह भूकंप ऐसे समय आया है जब पड़ोसी देश नेपाल में भोटेकोसी नदी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है, जबकि 977 लोग अभी भी लापता हैं। यह बाढ़ तब उत्पन्न हुई जब भोटेकोसी की सहायक नदी 'ल्हेन्डे' का प्रवाह एक हिमस्खलन के कारण अवरुद्ध हो गया। सबसे पहले नेपाल-चीन सीमा के निकट रसुवागढ़ी क्षेत्र का तिमुरे गांव इस आपदा की चपेट में आया।
गौरतलब है कि बाढ़ आने से पूर्व इलाके में कोई वर्षा नहीं हुई थी, जिससे स्थानीय लोगों को इस आपदा का कोई पूर्वाभास नहीं हो सका। बाढ़ के समय अधिकांश लोग अपनी दैनिक दिनचर्या में व्यस्त थे।
47 ग्लेशियर झीलों पर बढ़ा खतरा
इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) और नेपाल सरकार के वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार, 47 ग्लेशियल झीलों को 'संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियल झीलें' (PDGLs) के रूप में चिन्हित किया गया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इन झीलों से कभी भी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) आ सकता है, जो नेपाल की नदी प्रणालियों में विनाशकारी बाढ़ का कारण बन सकता है।
इन 47 झीलों में से 21 नेपाल में स्थित हैं, जबकि 25 झीलें तिब्बत में हैं और सीमा-पार श्रेणी में आती हैं। ये झीलें उन नदियों के ऊपरी हिस्सों में स्थित हैं जो दक्षिण की ओर बहते हुए नेपाल में प्रवेश करती हैं, जिससे निचले इलाकों में बसे समुदायों और बुनियादी ढाँचे को गंभीर खतरा है।
भूकंप और बाढ़ का संयुक्त जोखिम
विशेषज्ञों के अनुसार, भूकंप के झटके ग्लेशियर झीलों की दीवारों को कमज़ोर कर सकते हैं, जिससे GLOF की संभावना और बढ़ जाती है। यह ऐसे समय में और भी चिंताजनक है जब नेपाल पहले से ही बाढ़ की विभीषिका झेल रहा है और राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं। आने वाले दिनों में इस पूरे क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम बना रहेगा।