28 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नेपाल भूस्खलन: शी चिनफिंग ने राष्ट्रपति पौडेल को भेजा शोक संदेश, चीन ने दिया हर संभव मदद का भरोसा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नेपाल भूस्खलन: शी चिनफिंग ने राष्ट्रपति पौडेल को भेजा शोक संदेश, चीन ने दिया हर संभव मदद का भरोसा

सारांश

चीन-नेपाल सीमा पर चिलोंग-रासोवा के पास भीषण भूस्खलन में कई मौतें और अनेक लापता। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने नेपाली राष्ट्रपति पौडेल को शोक संदेश भेजकर हर संभव सहायता का भरोसा दिया। चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने भी नेपाली PM बालेंद्र शाह को अलग संदेश भेजा।

मुख्य बातें

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 28 अगस्त को नेपाली राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल को भूस्खलन पर शोक संदेश भेजा।
भूस्खलन चीन-नेपाल सीमा पर चिलोंग-रासोवा सीमा चौकी के निकट हुआ; कई लोगों की मौत, अनेक लापता।
चीन ने लापता लोगों की तलाश, पुनर्वास और घायलों के उपचार के लिए हर संभव प्रयास का संकल्प जताया।
चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने भी नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह को अलग शोक संदेश भेजा।
चीन ने नेपाल के राहत एवं बचाव अभियान में सक्रिय सहयोग देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने शुक्रवार, 28 अगस्त को नेपाल में हुई विनाशकारी भूस्खलन आपदा पर नेपाली राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल को औपचारिक शोक संदेश भेजा। चीन-नेपाल सीमा पर चिलोंग-रासोवा सीमा चौकी के निकट हुई इस भीषण आपदा में कई लोगों की जान गई है और अनेक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

आपदा का विवरण और नुकसान

शी चिनफिंग ने अपने शोक संदेश में कहा कि चीन-नेपाल सीमा पर चिलोंग-रासोवा सीमा चौकी के समीप भीषण भूस्खलन हुआ, जिसमें भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि कई लोग लापता हैं और कई लोगों की जान चली गई है। चीनी सरकार और जनता की ओर से उन्होंने पीड़ितों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और मृतकों के परिवारों, घायलों तथा आपदाग्रस्त क्षेत्र के निवासियों के प्रति हार्दिक सहानुभूति प्रकट की।

चीन के राहत एवं बचाव प्रयास

शी चिनफिंग ने जोर देकर कहा कि चीन लापता लोगों की तलाश, प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने और उनके पुनर्वास के साथ-साथ घायलों को शीघ्र चिकित्सा उपचार दिलाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य हताहतों की संख्या को न्यूनतम रखना और संभावित द्वितीयक आपदाओं को रोकना है।

द्विपक्षीय संबंध और सहयोग का संकल्प

राष्ट्रपति शी ने अपने संदेश में कहा कि चीन और नेपाल भौगोलिक रूप से जुड़े हुए पड़ोसी देश हैं और दोनों देशों के लोगों का भविष्य एक-दूसरे से अविभाज्य रूप से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि चीन, नेपाल के राहत और बचाव अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग करने और अपनी क्षमता के अनुसार हर संभव समर्थन व सहायता प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

प्रधानमंत्री स्तर पर भी शोक संदेश

इसी दिन, चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने भी नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह को अलग से शोक संदेश भेजा। यह इस बात का संकेत है कि बीजिंग इस आपदा को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है और कूटनीतिक स्तर पर अपनी संवेदनशीलता प्रदर्शित करना चाहता है।

आगे की स्थिति

शी चिनफिंग ने विश्वास जताया कि दोनों देशों के लोग मिलकर इस आपदा से उबरेंगे और प्रभावित परिवारों को अपने घरों के पुनर्निर्माण में शीघ्र सहायता मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब हिमालयी क्षेत्र में मानसून के दौरान भूस्खलन की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं और दोनों देशों के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन सहयोग की माँग तेज़ हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कूटनीतिक संकेत है कि बीजिंग नेपाल के साथ अपनी 'साझा नियति' की कथा को मज़बूत करना चाहता है — खासकर तब जब भारत और चीन दोनों काठमांडू पर अपना प्रभाव बनाए रखने की होड़ में हैं। गौरतलब है कि चीन-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन सहयोग अभी भी संस्थागत रूप से कमज़ोर है, और इस त्रासदी के बाद चीन की 'हर संभव सहायता' की घोषणा की ज़मीनी परीक्षा होगी। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि चिलोंग-रासोवा जैसे दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में राहत पहुँचाना कितना जटिल है — और क्या चीन की यह प्रतिबद्धता ठोस तंत्र में बदलती है या केवल कूटनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित रहती है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल में भूस्खलन कहाँ हुआ और कितना नुकसान हुआ?
भूस्खलन चीन-नेपाल सीमा पर चिलोंग-रासोवा सीमा चौकी के निकट हुआ, जिसमें कई लोगों की जान गई और अनेक लोग लापता हैं। भारी जान-माल के नुकसान की पुष्टि की गई है, हालाँकि अभी तक सटीक आँकड़े सामने नहीं आए हैं।
शी चिनफिंग ने नेपाल भूस्खलन पर क्या कहा?
शी चिनफिंग ने नेपाली राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल को शोक संदेश भेजकर पीड़ितों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि चीन लापता लोगों की तलाश, प्रभावितों के पुनर्वास और घायलों के उपचार में हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है।
क्या चीन नेपाल को राहत सहायता भेजेगा?
शी चिनफिंग ने अपने शोक संदेश में स्पष्ट किया कि चीन नेपाल के राहत और बचाव प्रयासों में सक्रिय रूप से सहयोग करेगा और अपनी क्षमता के अनुसार हर संभव समर्थन देगा। हालाँकि, सहायता के ठोस स्वरूप और मात्रा का विवरण अभी सामने नहीं आया है।
चीनी प्रधानमंत्री ने भी नेपाल को संदेश भेजा?
हाँ, चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने 28 अगस्त को ही नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह को अलग से शोक संदेश भेजा। यह दर्शाता है कि बीजिंग ने इस आपदा पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री — दोनों स्तरों पर कूटनीतिक प्रतिक्रिया दी है।
चीन और नेपाल के संबंध इस आपदा के संदर्भ में कैसे हैं?
शी चिनफिंग ने अपने संदेश में कहा कि चीन और नेपाल भौगोलिक रूप से जुड़े पड़ोसी हैं और दोनों देशों का भविष्य एक-दूसरे से जुड़ा है। यह बयान चीन की उस व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह नेपाल के साथ 'साझा नियति' की साझेदारी को रेखांकित करता रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 घंटे पहले
  2. 5 घंटे पहले
  3. कल
  4. कल
  5. कल
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 10 महीने पहले