नेपाल भूस्खलन: शी चिनफिंग ने राष्ट्रपति पौडेल को भेजा शोक संदेश, चीन ने दिया हर संभव मदद का भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने शुक्रवार, 28 अगस्त को नेपाल में हुई विनाशकारी भूस्खलन आपदा पर नेपाली राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल को औपचारिक शोक संदेश भेजा। चीन-नेपाल सीमा पर चिलोंग-रासोवा सीमा चौकी के निकट हुई इस भीषण आपदा में कई लोगों की जान गई है और अनेक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
आपदा का विवरण और नुकसान
शी चिनफिंग ने अपने शोक संदेश में कहा कि चीन-नेपाल सीमा पर चिलोंग-रासोवा सीमा चौकी के समीप भीषण भूस्खलन हुआ, जिसमें भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि कई लोग लापता हैं और कई लोगों की जान चली गई है। चीनी सरकार और जनता की ओर से उन्होंने पीड़ितों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और मृतकों के परिवारों, घायलों तथा आपदाग्रस्त क्षेत्र के निवासियों के प्रति हार्दिक सहानुभूति प्रकट की।
चीन के राहत एवं बचाव प्रयास
शी चिनफिंग ने जोर देकर कहा कि चीन लापता लोगों की तलाश, प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने और उनके पुनर्वास के साथ-साथ घायलों को शीघ्र चिकित्सा उपचार दिलाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य हताहतों की संख्या को न्यूनतम रखना और संभावित द्वितीयक आपदाओं को रोकना है।
द्विपक्षीय संबंध और सहयोग का संकल्प
राष्ट्रपति शी ने अपने संदेश में कहा कि चीन और नेपाल भौगोलिक रूप से जुड़े हुए पड़ोसी देश हैं और दोनों देशों के लोगों का भविष्य एक-दूसरे से अविभाज्य रूप से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि चीन, नेपाल के राहत और बचाव अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग करने और अपनी क्षमता के अनुसार हर संभव समर्थन व सहायता प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
प्रधानमंत्री स्तर पर भी शोक संदेश
इसी दिन, चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने भी नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह को अलग से शोक संदेश भेजा। यह इस बात का संकेत है कि बीजिंग इस आपदा को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है और कूटनीतिक स्तर पर अपनी संवेदनशीलता प्रदर्शित करना चाहता है।
आगे की स्थिति
शी चिनफिंग ने विश्वास जताया कि दोनों देशों के लोग मिलकर इस आपदा से उबरेंगे और प्रभावित परिवारों को अपने घरों के पुनर्निर्माण में शीघ्र सहायता मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब हिमालयी क्षेत्र में मानसून के दौरान भूस्खलन की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं और दोनों देशों के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन सहयोग की माँग तेज़ हो रही है।