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जुलाई 2026 में IIP 6.7% बढ़ा: विनिर्माण में 7.3%, पूंजीगत वस्तुओं में 16.1% की उछाल

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जुलाई 2026 में IIP 6.7% बढ़ा: विनिर्माण में 7.3%, पूंजीगत वस्तुओं में 16.1% की उछाल

सारांश

जुलाई 2026 में भारत का IIP 6.7% बढ़ा — विनिर्माण की 7.3% और पूंजीगत वस्तुओं की 16.1% वृद्धि ने औद्योगिक तस्वीर को मजबूत किया। खनन अकेला कमज़ोर क्षेत्र रहा। साथ ही सरकार ने IIP गणना पद्धति में WPI की जगह PPI अपनाने का ऐतिहासिक बदलाव भी किया।

मुख्य बातें

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) ने जुलाई 2026 में 6.7 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की।
विनिर्माण क्षेत्र ने 7.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ IIP को सबसे अधिक गति दी; 23 में से 19 उद्योग समूह सकारात्मक रहे।
विद्युत उपकरण निर्माण ( 28.3% ), मोटर वाहन ( 22.2% ) और मशीनरी ( 12.1% ) शीर्ष प्रदर्शन करने वाले उप-क्षेत्र रहे।
पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन 16.1 प्रतिशत बढ़ा — बढ़ते औद्योगिक निवेश का संकेत।
खनन क्षेत्र में 0.9 प्रतिशत की गिरावट रही — जुलाई का एकमात्र कमज़ोर क्षेत्र।
सरकार ने IIP गणना में WPI की जगह PPI अपनाया; 234 वस्तु समूहों पर लागू, जो कुल भार का 36.02% हैं।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) ने जुलाई 2026 में 6.7 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की, जिसे मुख्य रूप से विनिर्माण क्षेत्र की मजबूत रफ्तार ने गति दी। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 28 अगस्त 2026 को यह आँकड़े जारी किए। यह वृद्धि भारत की औद्योगिक गतिविधियों में व्यापक आधार पर सुधार का संकेत देती है।

विनिर्माण क्षेत्र की अगुवाई

IIP में तीन-चौथाई से अधिक भार रखने वाले विनिर्माण क्षेत्र ने जुलाई में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इस क्षेत्र के 23 उद्योग समूहों में से 19 ने सकारात्मक प्रदर्शन किया।

सर्वाधिक वृद्धि दर्ज करने वाले उप-क्षेत्रों में विद्युत उपकरण निर्माण (28.3 प्रतिशत), मोटर वाहन निर्माण (22.2 प्रतिशत) और मशीनरी एवं उपकरण निर्माण (12.1 प्रतिशत) शामिल रहे। यह प्रदर्शन घरेलू माँग और निर्यात दोनों में उत्साह का संकेत माना जा रहा है।

पूंजीगत वस्तुओं और उपभोक्ता माँग का हाल

उपयोग-आधारित वर्गीकरण में पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन जुलाई में 16.1 प्रतिशत बढ़ा — जो अर्थव्यवस्था में बढ़ते निवेश का प्रमुख संकेतक माना जाता है। फैक्ट्रियों में उपयोग होने वाली मशीनें और औद्योगिक उपकरण इसी श्रेणी में आते हैं।

उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं — जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेफ्रिजरेटर और टेलीविजन — के उत्पादन में 10.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसे बढ़ती आय और बेहतर उपभोक्ता विश्वास से समर्थन मिला। हालाँकि, उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं — जैसे साबुन, सौंदर्य प्रसाधन और दैनिक उपयोग की वस्तुएँ — के उत्पादन में 1 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई।

ऊर्जा और बुनियादी ढाँचे का योगदान

बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में जुलाई के दौरान 8.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि जल आपूर्ति, सीवरेज एवं अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में 7.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही।

बुनियादी ढाँचा एवं निर्माण सामग्री क्षेत्र ने 6.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। राजमार्ग, बंदरगाह और रेलवे परियोजनाओं पर सरकार के बड़े निवेश का लाभ इस क्षेत्र को मिल रहा है। गौरतलब है कि ये परियोजनाएँ बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के साथ समग्र आर्थिक विकास को भी गति देती हैं।

खनन क्षेत्र की कमज़ोरी

इस सकारात्मक तस्वीर के बीच खनन क्षेत्र अपेक्षाकृत कमज़ोर रहा और इसमें 0.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह जुलाई के दौरान औद्योगिक परिदृश्य का एकमात्र प्रमुख नकारात्मक पहलू रहा।

IIP गणना पद्धति में बड़ा बदलाव

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने IIP की गणना पद्धति में एक महत्वपूर्ण संशोधन की भी घोषणा की है। मंत्रालय ने कुछ वस्तु समूहों के लिए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के स्थान पर आउटपुट उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) को डिफ्लेटर के रूप में अपनाने का निर्णय लिया है।

यह बदलाव IIP बास्केट की 463 वस्तु समूहों में से 234 समूहों पर लागू होगा, जो कुल सूचकांक भार का 36.02 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करती हैं। मंत्रालय ने इस नए मानक के आधार पर 2022-23 आधार वर्ष वाली अखिल भारतीय IIP श्रृंखला को संशोधित कर पुनः जारी किया है, जो 1 जून 2026 को जारी WPI-आधारित श्रृंखला का स्थान लेगी। आँकड़ों की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय तुलनीयता की दृष्टि से यह कदम दीर्घकालिक महत्व रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह निवेश-आधारित वृद्धि टिकाऊ है या सरकारी पूंजीगत व्यय का अल्पकालिक प्रतिबिंब। उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं में 1 प्रतिशत की गिरावट ग्रामीण और निम्न-आय उपभोक्ता माँग की अभी भी कमज़ोर स्थिति की ओर इशारा करती है। खनन क्षेत्र की गिरावट भी चिंता का विषय है, क्योंकि यह ऊर्जा और इस्पात उत्पादन की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकती है। WPI से PPI की ओर पद्धतिगत बदलाव दीर्घकालिक रूप से डेटा की विश्वसनीयता बढ़ाएगा, लेकिन इससे पिछले आँकड़ों की तुलनीयता पर अल्पकालिक भ्रम की स्थिति भी बन सकती है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जुलाई 2026 में भारत का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) कितना बढ़ा?
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार जुलाई 2026 में IIP में 6.7 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। इस वृद्धि में विनिर्माण क्षेत्र का सबसे बड़ा योगदान रहा।
विनिर्माण क्षेत्र में जुलाई 2026 में कितनी वृद्धि हुई?
विनिर्माण क्षेत्र ने जुलाई 2026 में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इस क्षेत्र के 23 उद्योग समूहों में से 19 सकारात्मक रहे, जिनमें विद्युत उपकरण (28.3%), मोटर वाहन (22.2%) और मशीनरी (12.1%) शीर्ष पर रहे।
पूंजीगत वस्तुओं की वृद्धि का क्या महत्व है?
जुलाई 2026 में पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन 16.1 प्रतिशत बढ़ा, जो अर्थव्यवस्था में बढ़ते निवेश का प्रमुख संकेतक माना जाता है। इस श्रेणी में वृद्धि भविष्य में रोजगार और आय सृजन को बढ़ावा देती है।
IIP गणना पद्धति में क्या बदलाव किया गया है?
सांख्यिकी मंत्रालय ने 234 वस्तु समूहों के लिए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की जगह आउटपुट उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) को डिफ्लेटर के रूप में अपनाया है, जो कुल IIP भार का 36.02 प्रतिशत है। 2022-23 आधार वर्ष वाली संशोधित IIP श्रृंखला 1 जून 2026 की WPI-आधारित श्रृंखला का स्थान लेगी।
जुलाई 2026 में कौन-सा क्षेत्र कमज़ोर रहा?
खनन क्षेत्र जुलाई 2026 में 0.9 प्रतिशत की गिरावट के साथ औद्योगिक परिदृश्य का एकमात्र कमज़ोर क्षेत्र रहा। इसके अलावा उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं में भी 1 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई।
राष्ट्र प्रेस
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