28 अगस्त 2026
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संचार साथी पोर्टल ने जुलाई 2026 में 77,692 चोरी-खोए मोबाइल बरामद किए, मासिक रिकॉर्ड टूटा

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संचार साथी पोर्टल ने जुलाई 2026 में 77,692 चोरी-खोए मोबाइल बरामद किए, मासिक रिकॉर्ड टूटा

सारांश

संचार साथी पोर्टल ने जुलाई 2026 में एक माह में 77,692 मोबाइल बरामद कर नया रिकॉर्ड बनाया — अप्रैल 2025 से अब तक 201% की वृद्धि। DoT, पुलिस और टेलीकॉम कंपनियों के समन्वय से यह मंच अब देश का सबसे प्रभावी मोबाइल ट्रैकिंग तंत्र बन चुका है।

मुख्य बातें

संचार साथी पोर्टल ने जुलाई 2026 में 77,692 खोए या चोरी हुए मोबाइल हैंडसेट बरामद किए — एक माह में 75,000 का आँकड़ा पार करने का पहला मौका।
अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच मासिक मोबाइल बरामदगी में 201% की वृद्धि दर्ज।
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम.
सिंधिया ने DoT, टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं और राज्य पुलिस के समन्वय को इस सफलता का कारण बताया।
DoT की डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट और क्षेत्रीय कार्यालयों ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर डिवाइस ट्रेसिंग का काम किया।
नए सुधारों में SMS, ईमेल और पोर्टल पर पुलिस स्टेशन की जानकारी, नए सिम उपयोग की तत्काल सूचना और बरामदगी के बाद फैक्ट्री रीसेट की सलाह शामिल है।

दूरसंचार विभाग (DoT) की नागरिक-केंद्रित पहल संचार साथी पोर्टल ने जुलाई 2026 में अब तक का सर्वश्रेष्ठ मासिक प्रदर्शन दर्ज किया, जब इस मंच के ज़रिए 77,692 खोए या चोरी हुए मोबाइल हैंडसेट उनके वास्तविक मालिकों तक पहुँचाए गए। संचार मंत्रालय ने 28 अगस्त 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान में बताया कि यह पहला मौका है जब इस मंच पर एक ही माह में बरामद मोबाइल की संख्या 75,000 का आँकड़ा पार कर गई।

मुख्य घटनाक्रम

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि यह संचार साथी मंच के प्रति बढ़ते जनविश्वास और दूरसंचार विभाग, टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं तथा विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस के बीच मज़बूत समन्वय का परिणाम है। मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच मासिक मोबाइल बरामदगी में 201 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है — जो इस योजना की बढ़ती परिचालन क्षमता को रेखांकित करती है।

डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट की भूमिका

इस सफलता में DoT की डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट और उसके क्षेत्रीय कार्यालयों की अहम भूमिका रही। इन इकाइयों ने स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर मोबाइल उपकरणों का पता लगाया और उन्हें उनके वास्तविक मालिकों तक पहुँचाया। यह ऐसे समय में आया है जब मोबाइल चोरी की घटनाएँ शहरी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही हैं और पुलिस के पास परंपरागत तरीकों से डिवाइस ट्रेस करना कठिन होता जा रहा है।

सिस्टम में नए सुधार

मंत्रालय ने बताया कि पोर्टल को अधिक पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने के लिए कई नए बदलाव किए गए हैं। अब नागरिकों को मोबाइल ट्रेसिंग रिपोर्ट के साथ संबंधित पुलिस स्टेशन की जानकारी SMS, ईमेल और पोर्टल — तीनों माध्यमों से उपलब्ध कराई जाती है। इसके अतिरिक्त, चोरी या खोए हुए मोबाइल में किसी नए सिम कार्ड के उपयोग की सूचना तत्काल पुलिस को दी जाती है, और वैकल्पिक मोबाइल नंबरों की जानकारी भी जाँच एजेंसियों के साथ साझा की जाती है। मोबाइल बरामद होने के बाद उपयोगकर्ताओं को फैक्ट्री रीसेट करने की सलाह SMS द्वारा दी जाती है, ताकि किसी संभावित मैलवेयर या अनधिकृत सॉफ्टवेयर से सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

आम नागरिक पर असर

संचार साथी पोर्टल पर कोई भी नागरिक वेब पोर्टल या मोबाइल ऐप के ज़रिए अपने खोए या चोरी हुए मोबाइल की शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायत दर्ज होते ही संबंधित डिवाइस को भारतीय दूरसंचार नेटवर्क पर ब्लॉक कर दिया जाता है, जिससे उसका दुरुपयोग रोका जा सके। यदि कोई व्यक्ति उस ब्लॉक किए गए मोबाइल का उपयोग करने का प्रयास करता है, तो नेटवर्क द्वारा तत्काल अलर्ट संबंधित नागरिक और पुलिस स्टेशन को भेजा जाता है — जिससे बरामदगी की प्रक्रिया तेज़ होती है।

क्या होगा आगे

मंत्रालय के अनुसार, दूरसंचार विभाग हितधारकों से लगातार फीडबैक लेकर इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर काम कर रहा है। गौरतलब है कि 201% की मासिक वृद्धि दर बनाए रखना एक बड़ी परिचालन चुनौती होगी, लेकिन मंत्रालय का लक्ष्य बरामदगी की संख्या को और बढ़ाना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

692 की बरामदगी का आँकड़ा प्रभावशाली है, लेकिन असली सवाल यह है कि हर माह कितने मोबाइल चोरी होते हैं — और उस अनुपात में यह संख्या कितनी है। 201% की वृद्धि दर बताती है कि शुरुआती आधार बेहद कमज़ोर था; अब जब मंच परिपक्व हो रहा है, तो वृद्धि दर स्वाभाविक रूप से धीमी पड़ेगी। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह तंत्र ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में उतना ही प्रभावी है जितना शहरों में — जहाँ पुलिस-DoT समन्वय अभी भी असमान है। बिना ज़िला-स्तरीय बरामदगी डेटा के, यह आँकड़ा एक राष्ट्रीय औसत बनकर रह जाता है जो ज़मीनी विषमताओं को छुपा सकता है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संचार साथी पोर्टल क्या है और यह कैसे काम करता है?
संचार साथी दूरसंचार विभाग (DoT) का एक डिजिटल मंच है जो नागरिकों को खोए या चोरी हुए मोबाइल की शिकायत दर्ज कराने की सुविधा देता है। शिकायत दर्ज होते ही डिवाइस को भारतीय दूरसंचार नेटवर्क पर ब्लॉक कर दिया जाता है और पुलिस को अलर्ट भेजा जाता है।
जुलाई 2026 में संचार साथी ने कितने मोबाइल बरामद किए?
जुलाई 2026 में संचार साथी पोर्टल के ज़रिए 77,692 खोए या चोरी हुए मोबाइल हैंडसेट बरामद किए गए। यह पहली बार है जब एक ही माह में बरामद मोबाइल की संख्या 75,000 का आँकड़ा पार कर गई।
अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच मोबाइल बरामदगी में कितनी वृद्धि हुई?
मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच मासिक मोबाइल बरामदगी में 201 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि DoT, टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं और राज्य पुलिस के बढ़ते समन्वय का परिणाम बताई जा रही है।
खोया या चोरी हुआ मोबाइल वापस पाने के लिए संचार साथी पर शिकायत कैसे दर्ज करें?
नागरिक संचार साथी के वेब पोर्टल या मोबाइल ऐप पर सरल प्रक्रिया के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत के बाद डिवाइस ब्लॉक हो जाती है और मोबाइल ट्रेसिंग रिपोर्ट व संबंधित पुलिस स्टेशन की जानकारी SMS, ईमेल और पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाती है।
मोबाइल बरामद होने के बाद क्या करना चाहिए?
मंत्रालय के अनुसार, मोबाइल बरामद होने के बाद उपयोगकर्ताओं को SMS के ज़रिए फैक्ट्री रीसेट करने की सलाह दी जाती है। यह इसलिए ज़रूरी है ताकि डिवाइस में मौजूद किसी संभावित मैलवेयर या अनधिकृत सॉफ्टवेयर से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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