रीवा अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत: 4 अधिकारी निलंबित, उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने दिए जांच के आदेश
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गांधी स्मारक चिकित्सालय में एक प्रसूता महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत के मामले में राज्य सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए अस्पताल के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने 28 अगस्त 2026 को वरिष्ठ चिकित्सकों की एक जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए और स्पष्ट किया कि चिकित्सकीय लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्य घटनाक्रम
कल्पना मिश्रा को 26 अगस्त को गांधी स्मारक चिकित्सालय के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में भर्ती कराया गया था। उसी रात उपचार के दौरान उनकी और उनके गर्भस्थ शिशु दोनों की मृत्यु हो गई। परिजनों ने न केवल चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया, बल्कि अस्पताल कर्मचारियों पर दुर्व्यवहार का भी आरोप लगाया है।
परिजनों की मांग पर मृतिका एवं उनके गर्भस्थ शिशु का शव परीक्षण जिला चिकित्सालय एवं चिकित्सा महाविद्यालय, रीवा की संयुक्त टीम द्वारा कराया गया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों शव शव वाहन से उनके गृह ग्राम भेजे गए।
निलंबित अधिकारी
ड्यूटी चिकित्सक डॉ. सोनल अग्रवाल (प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग) और डॉ. निधि पाण्डेय (निश्चेतना विभाग) को प्रथम दृष्टया घोर लापरवाही एवं गंभीर अनुशासनहीनता के आधार पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। इसके अतिरिक्त, दुर्व्यवहार की शिकायत के आधार पर दो नर्सिंग ऑफिसरों को भी निलंबित किया गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा, 'मरीजों एवं उनके परिजनों के साथ संवेदनशील एवं सम्मानजनक व्यवहार और निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।' उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर तथ्यों के अनुरूप कठोर कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब सरकारी अस्पतालों में प्रसव के दौरान होने वाली मौतों को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। शुक्ल ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक प्रावधान किए जाएंगे।
आम जनता पर असर
रीवा जैसे अर्ध-शहरी क्षेत्र में सरकारी अस्पताल ही अधिकांश गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एकमात्र स्वास्थ्य सेवा का सहारा है। इस घटना ने जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि समय पर उचित उपचार मिलता तो इस दोहरी त्रासदी को टाला जा सकता था।
क्या होगा आगे
वरिष्ठ चिकित्सकों की जांच समिति अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। निलंबित चिकित्सकों और नर्सिंग ऑफिसरों के विरुद्ध विभागीय जांच प्रक्रिया जारी रहेगी। राज्य सरकार से अपेक्षा है कि वह इस मामले में पारदर्शी जांच सुनिश्चित करे और दोषियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कदम उठाए।