'परिवर्तन' स्कीम: डेढ़ महीने में 1,300 से अधिक ट्रक-बस मालिकों ने कराया रजिस्ट्रेशन, ₹9,585 करोड़ की योजना को मिली रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'परिवर्तन' स्कीम ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने की दिशा में उल्लेखनीय गति पकड़ी है। 14 जुलाई 2026 को शुरू हुई इस योजना के तहत 27 अगस्त 2026 तक 1,300 से अधिक ट्रक और बस मालिकों ने आधिकारिक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करा लिया है — यानी महज डेढ़ महीने में यह आँकड़ा पार हो गया। ₹9,585 करोड़ के कुल वित्तीय परिव्यय वाली यह योजना दिल्ली-एनसीआर के पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को स्वच्छ विकल्पों से बदलने का लक्ष्य रखती है।
योजना का उद्देश्य और दायरा
परिवर्तन — जिसका पूरा नाम 'ट्रांसपोर्ट से होने वाले वायु प्रदूषण और नेटवर्क उत्सर्जन को कम करने के लिए वाहन संपत्तियों के तेजी से नवीनीकरण और प्रोत्साहन का कार्यक्रम' है — का मूल उद्देश्य दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) और हरियाणा, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश के एनसीआर जिलों में पंजीकृत भारत स्टेज (बीएस)-4 या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले 2 लाख से अधिक ट्रकों और बसों को बीएस-6 या उससे सख्त मानकों वाले वाहनों अथवा इलेक्ट्रिक वाहनों से प्रतिस्थापित करना है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को 3 जून 2026 को औपचारिक मंजूरी दी थी। इसकी फंडिंग आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) से हो रही है, जबकि क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की है। कुल परिव्यय में से ₹5,041 करोड़ केंद्र सरकार की बजटीय सहायता के रूप में आ रहे हैं।
लाभार्थियों को मिलने वाले प्रोत्साहन
योजना के तहत पात्र वाहन मालिकों को कई स्तरों पर वित्तीय राहत दी जा रही है। इनमें प्रमुख हैं:
5 वर्षों तक योग्य वाहन ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज की बचत, 10 वर्षों की अवधि के लिए 100 प्रतिशत रोड टैक्स माफी और रजिस्ट्रेशन शुल्क में पूर्ण छूट। इसके अलावा भाग लेने वाले ऑरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (ओईएम) से एक्स-शोरूम कीमत पर कम से कम 8 प्रतिशत की छूट भी सुनिश्चित की गई है।
बीएस-6 डीजल या सीएनजी वाहन खरीदने वालों को 5 वर्षों तक वाहन श्रेणी के अनुसार ₹1,200 से ₹4,800 प्रतिमाह के ईंधन वाउचर मिलेंगे। वहीं, इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को ₹64,000 से ₹2.56 लाख तक का एकमुश्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों ने इस संबंध में अधिसूचनाएँ पहले ही जारी कर दी हैं।
उद्योग और बैंकिंग क्षेत्र की भागीदारी
योजना को ज़मीन पर उतारने के लिए 42 बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को वाहन ऋण पर ब्याज सब्सिडी देने हेतु शामिल किया गया है। ऑटो उद्योग की ओर से 15 ओईएम के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित किए गए हैं, जो पात्र लाभार्थियों को निर्धारित छूट सुनिश्चित करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र में पुराने बेड़े के नवीनीकरण की दर ऐतिहासिक रूप से धीमी रही है।
जागरूकता अभियान और आउटरीच
पात्र वाहन मालिकों तक पहुँचने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसमें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के साथ-साथ दिल्ली-एनसीआर के ईंधन स्टेशनों, ट्रांसपोर्ट नगरों, टोल प्लाजा और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) पर आउटडोर प्रचार भी शामिल है। गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक सर्दियों में 'गंभीर' श्रेणी में पहुँचता रहा है, और पुराने डीजल वाहन इसके प्रमुख कारणों में से एक माने जाते हैं।
आगे की राह
योजना का लक्ष्य दिल्ली-एनसीआर के 2 लाख से अधिक पुराने वाणिज्यिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से बदलना है। शुरुआती डेढ़ महीने में 1,300 से अधिक रजिस्ट्रेशन एक सकारात्मक संकेत हैं, हालाँकि लक्ष्य की तुलना में यह अभी शुरुआती चरण ही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक प्रभाव तब दिखेगा जब बड़े बेड़ा संचालकों की भागीदारी बढ़ेगी और ईंधन वाउचर व ऋण सब्सिडी की प्रक्रिया और सरल होगी।