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'परिवर्तन' स्कीम: डेढ़ महीने में 1,300 से अधिक ट्रक-बस मालिकों ने कराया रजिस्ट्रेशन, ₹9,585 करोड़ की योजना को मिली रफ्तार

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'परिवर्तन' स्कीम: डेढ़ महीने में 1,300 से अधिक ट्रक-बस मालिकों ने कराया रजिस्ट्रेशन, ₹9,585 करोड़ की योजना को मिली रफ्तार

सारांश

डेढ़ महीने में 1,300 से अधिक रजिस्ट्रेशन के साथ 'परिवर्तन' स्कीम ने रफ्तार पकड़ी है। ₹9,585 करोड़ की यह केंद्रीय योजना दिल्ली-एनसीआर के 2 लाख पुराने ट्रकों-बसों को बीएस-6 या इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने का लक्ष्य रखती है — और इसके साथ जुड़े हैं 42 बैंक, 15 ओईएम और चार राज्य।

मुख्य बातें

'परिवर्तन' स्कीम 14 जुलाई 2026 को शुरू हुई; 27 अगस्त 2026 तक 1,300 से अधिक लाभार्थियों ने पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया।
योजना का कुल वित्तीय परिव्यय ₹9,585 करोड़ ; इसमें केंद्र सरकार की बजटीय सहायता ₹5,041 करोड़ है।
दिल्ली-एनसीआर के 2 लाख से अधिक बीएस-4 या पुराने ट्रकों-बसों को बीएस-6 या इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलना लक्ष्य।
लाभार्थियों को 5 साल तक 5% ब्याज बचत , 10 साल रोड टैक्स माफी , ओईएम से 8% छूट और ईवी पर ₹64,000–₹2.56 लाख एकमुश्त प्रोत्साहन मिलेगा।
फाइनेंसिंग के लिए 42 बैंक व एनबीएफसी और छूट के लिए 15 ओईएम के साथ एमओयू हस्ताक्षरित।
दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों ने संबंधित अधिसूचनाएँ जारी कर दी हैं।

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'परिवर्तन' स्कीम ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने की दिशा में उल्लेखनीय गति पकड़ी है। 14 जुलाई 2026 को शुरू हुई इस योजना के तहत 27 अगस्त 2026 तक 1,300 से अधिक ट्रक और बस मालिकों ने आधिकारिक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करा लिया है — यानी महज डेढ़ महीने में यह आँकड़ा पार हो गया। ₹9,585 करोड़ के कुल वित्तीय परिव्यय वाली यह योजना दिल्ली-एनसीआर के पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को स्वच्छ विकल्पों से बदलने का लक्ष्य रखती है।

योजना का उद्देश्य और दायरा

परिवर्तन — जिसका पूरा नाम 'ट्रांसपोर्ट से होने वाले वायु प्रदूषण और नेटवर्क उत्सर्जन को कम करने के लिए वाहन संपत्तियों के तेजी से नवीनीकरण और प्रोत्साहन का कार्यक्रम' है — का मूल उद्देश्य दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) और हरियाणा, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश के एनसीआर जिलों में पंजीकृत भारत स्टेज (बीएस)-4 या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले 2 लाख से अधिक ट्रकों और बसों को बीएस-6 या उससे सख्त मानकों वाले वाहनों अथवा इलेक्ट्रिक वाहनों से प्रतिस्थापित करना है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को 3 जून 2026 को औपचारिक मंजूरी दी थी। इसकी फंडिंग आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) से हो रही है, जबकि क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की है। कुल परिव्यय में से ₹5,041 करोड़ केंद्र सरकार की बजटीय सहायता के रूप में आ रहे हैं।

लाभार्थियों को मिलने वाले प्रोत्साहन

योजना के तहत पात्र वाहन मालिकों को कई स्तरों पर वित्तीय राहत दी जा रही है। इनमें प्रमुख हैं:

5 वर्षों तक योग्य वाहन ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज की बचत, 10 वर्षों की अवधि के लिए 100 प्रतिशत रोड टैक्स माफी और रजिस्ट्रेशन शुल्क में पूर्ण छूट। इसके अलावा भाग लेने वाले ऑरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (ओईएम) से एक्स-शोरूम कीमत पर कम से कम 8 प्रतिशत की छूट भी सुनिश्चित की गई है।

बीएस-6 डीजल या सीएनजी वाहन खरीदने वालों को 5 वर्षों तक वाहन श्रेणी के अनुसार ₹1,200 से ₹4,800 प्रतिमाह के ईंधन वाउचर मिलेंगे। वहीं, इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को ₹64,000 से ₹2.56 लाख तक का एकमुश्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों ने इस संबंध में अधिसूचनाएँ पहले ही जारी कर दी हैं।

उद्योग और बैंकिंग क्षेत्र की भागीदारी

योजना को ज़मीन पर उतारने के लिए 42 बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को वाहन ऋण पर ब्याज सब्सिडी देने हेतु शामिल किया गया है। ऑटो उद्योग की ओर से 15 ओईएम के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित किए गए हैं, जो पात्र लाभार्थियों को निर्धारित छूट सुनिश्चित करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र में पुराने बेड़े के नवीनीकरण की दर ऐतिहासिक रूप से धीमी रही है।

जागरूकता अभियान और आउटरीच

पात्र वाहन मालिकों तक पहुँचने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसमें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के साथ-साथ दिल्ली-एनसीआर के ईंधन स्टेशनों, ट्रांसपोर्ट नगरों, टोल प्लाजा और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) पर आउटडोर प्रचार भी शामिल है। गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक सर्दियों में 'गंभीर' श्रेणी में पहुँचता रहा है, और पुराने डीजल वाहन इसके प्रमुख कारणों में से एक माने जाते हैं।

आगे की राह

योजना का लक्ष्य दिल्ली-एनसीआर के 2 लाख से अधिक पुराने वाणिज्यिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से बदलना है। शुरुआती डेढ़ महीने में 1,300 से अधिक रजिस्ट्रेशन एक सकारात्मक संकेत हैं, हालाँकि लक्ष्य की तुलना में यह अभी शुरुआती चरण ही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक प्रभाव तब दिखेगा जब बड़े बेड़ा संचालकों की भागीदारी बढ़ेगी और ईंधन वाउचर व ऋण सब्सिडी की प्रक्रिया और सरल होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

300 रजिस्ट्रेशन एक सकारात्मक शुरुआत है, लेकिन 2 लाख वाहनों के लक्ष्य के सामने यह महज 0.65% है — और यहीं असली परीक्षा शुरू होती है। दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाणिज्यिक वाहनों के नवीनीकरण की दर ऐतिहासिक रूप से धीमी रही है, क्योंकि छोटे ट्रक-बस मालिकों के लिए अग्रिम लागत सबसे बड़ी बाधा है — ब्याज सब्सिडी और वाउचर कागज़ पर आकर्षक हैं, पर वास्तविक लाभ की सरलता और समयसीमा निर्णायक होगी। यह भी ध्यान देने योग्य है कि सर्दियाँ आने से पहले बड़े बेड़ा संचालकों की भागीदारी के बिना वायु गुणवत्ता पर ठोस असर दिखना मुश्किल होगा।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'परिवर्तन' स्कीम क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
'परिवर्तन' केंद्र सरकार की ₹9,585 करोड़ की योजना है, जिसे 3 जून 2026 को मंजूरी मिली और 14 जुलाई 2026 को लॉन्च किया गया। इसका उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में पंजीकृत 2 लाख से अधिक बीएस-4 या पुराने ट्रकों और बसों को बीएस-6 या इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलकर वायु प्रदूषण कम करना है।
'परिवर्तन' स्कीम के तहत वाहन मालिकों को क्या-क्या लाभ मिलते हैं?
पात्र लाभार्थियों को 5 साल तक वाहन ऋण पर 5% ब्याज बचत, 10 साल के लिए 100% रोड टैक्स माफी, रजिस्ट्रेशन शुल्क में पूरी छूट और ओईएम से कम से कम 8% एक्स-शोरूम छूट मिलती है। बीएस-6 वाहन खरीदने वालों को ₹1,200–₹4,800 मासिक ईंधन वाउचर और इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को ₹64,000–₹2.56 लाख तक का एकमुश्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।
इस योजना के लिए कौन पात्र है?
दिल्ली एनसीटी और हरियाणा, राजस्थान व उत्तर प्रदेश के एनसीआर जिलों में पंजीकृत बीएस-4 या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले ट्रक और बस मालिक इस योजना के लिए पात्र हैं। चारों राज्य सरकारों ने इस संबंध में अधिसूचनाएँ जारी कर दी हैं।
योजना के लिए फंडिंग कहाँ से आ रही है और इसे कौन लागू कर रहा है?
फंडिंग आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) से हो रही है, जिसमें केंद्र सरकार ₹5,041 करोड़ की बजटीय सहायता दे रही है। क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की है।
अब तक कितने लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है और आगे क्या होगा?
27 अगस्त 2026 तक 1,300 से अधिक लाभार्थियों ने 'परिवर्तन' पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया है। योजना से जुड़े 42 बैंक व एनबीएफसी और 15 ओईएम के साथ एमओयू हो चुके हैं; जागरूकता अभियान ईंधन स्टेशनों, टोल प्लाजा और आरटीओ कार्यालयों के माध्यम से जारी है।
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