दिल्ली को मिलेंगी 2,800 नई इलेक्ट्रिक AC लो-फ्लोर बसें, PM ई-ड्राइव योजना से प्रदूषण पर लगाम का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने और सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने की दिशा में रेखा गुप्ता सरकार ने बड़ा कदम उठाया है — केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव योजना के फेज-1 के तहत राजधानी को 2,800 नई एसी लो-फ्लोर इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की जाएंगी, जिन्हें अगले वर्ष से चरणबद्ध रूप से सड़कों पर उतारा जाएगा। यह कदम 2028-29 तक दिल्ली के बस बेड़े को 14,000 तक पहुँचाने की दीर्घकालिक योजना का अहम हिस्सा है।
मुख्य घटनाक्रम
पीएम ई-ड्राइव योजना केंद्र सरकार की उस पहल का हिस्सा है जो देशभर में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। इस योजना के पहले चरण में दिल्ली को आवंटित 2,800 इलेक्ट्रिक बसें पूरी तरह शून्य-उत्सर्जन वाली होंगी — यानी इनसे न धुआं निकलेगा, न कार्बन का उत्सर्जन होगा। बसों को चरणबद्ध तरीके से तैनात किया जाएगा ताकि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और परिचालन व्यवस्था समानांतर रूप से तैयार हो सके।
बसों की विशेषताएँ
नई इलेक्ट्रिक बसों में यात्री-सुविधा को प्राथमिकता दी गई है। इनमें आरामदायक एसी सीटें, आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, दिव्यांगजनों के लिए विशेष प्रवेश सुविधा और बेहतर वेंटिलेशन जैसी सुविधाएँ शामिल होंगी। लो-फ्लोर डिज़ाइन बुजुर्गों और विकलांग यात्रियों के लिए चढ़ने-उतरने को सहज बनाता है — जो पुरानी बसों में एक बड़ी कमी रही है।
प्रदूषण पर असर
दिल्ली लंबे समय से देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, सार्वजनिक परिवहन का विद्युतीकरण वायु गुणवत्ता सुधारने का एक कारगर और दीर्घकालिक उपाय है। यदि अधिक नागरिक निजी वाहनों की जगह आधुनिक और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन अपनाएँ, तो ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण — दोनों में उल्लेखनीय कमी संभव है। यह ऐसे समय में आया है जब सर्दियों में दिल्ली का AQI कई बार 'गंभीर' श्रेणी में पहुँच जाता है।
2028-29 का बड़ा लक्ष्य
दिल्ली सरकार ने 2028-29 तक राजधानी में बसों की कुल संख्या बढ़ाकर लगभग 14,000 करने का लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए इलेक्ट्रिक बसों की संख्या में क्रमिक वृद्धि की जाएगी और डीजल चालित वाहनों पर निर्भरता घटाई जाएगी। सरकार का उद्देश्य केवल बेड़ा बढ़ाना नहीं, बल्कि राजधानी के हर कोने तक समयबद्ध और विश्वसनीय परिवहन सेवा पहुँचाना भी है।
आगे की राह
इलेक्ट्रिक बसों के साथ-साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और परिचालन प्रबंधन को भी मज़बूत किया जाएगा। सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में दिल्ली का सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह हरित, आधुनिक और तकनीक-आधारित बनाया जाएगा। यदि 2028-29 तक 14,000 बसों का लक्ष्य हासिल होता है, तो दिल्ली देश के सबसे बड़े और स्वच्छतम सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क वाले शहरों में शामिल हो सकती है।