दिल्ली की नई ईवी नीति: 2028 से केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया और 2027 से ई-ऑटो होंगे रजिस्टर
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली सरकार ने नई ईवी नीति का ड्राफ्ट पेश किया है।
- 2027 से केवल ई-ऑटो और 2028 से केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया रजिस्टर होंगे।
- सरकार ईवी खरीदने पर सब्सिडी देगी।
- स्कूल बसों में E-V का अनुपात बढ़ाना अनिवार्य होगा।
- प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए यह नीति एक महत्वपूर्ण कदम है।
नई दिल्ली, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सरकार ने बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 'दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2026-2030' का नया ड्राफ्ट पेश किया है। यह चार साल की योजना इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के प्रचार, वायु गुणवत्ता में सुधार, और स्वच्छ ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है।
यह नीति भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 से प्रेरित है, जो स्वच्छ हवा और प्रदूषणमुक्त वातावरण को जीवन के अधिकार का एक हिस्सा मानती है। इस नीति में एमसी मेहता बनाम भारत संघ के फैसले और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 एवं मोटर वाहन अधिनियम, 1988 जैसे कानूनों को भी शामिल किया गया है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में सर्दियों के दौरान 23 प्रतिशत प्रदूषण वाहनों के कारण होता है। खासकर, दोपहिया वाहन कुल वाहनों का लगभग 67 प्रतिशत हैं, इसलिए इनका तेजी से इलेक्ट्रिक में परिवर्तन अनिवार्य है। इसके अलावा, तीन पहिया, व्यावसायिक कारें, और छोटे माल वाहक वाहन (एन1) भी प्रदूषण में योगदान देते हैं।
इस नीति का मुख्य उद्देश्य सभी वाहन वर्गों में ईवी के इस्तेमाल को बढ़ावा देना, चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करना, बैटरी रीसाइक्लिंग प्रणाली विकसित करना और पेट्रोल-डीजल वाहनों पर निर्भरता को कम करना है।
सरकार ईवी खरीदने पर सीधे बैंक में सब्सिडी (डीबीटी) प्रदान करेगी। दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों पर पहले साल 10,000 रुपए प्रति किलोवाट (अधिकतम 30,000 रुपए), दूसरे साल 6,600 रुपए (अधिकतम 20,000 रुपए) और तीसरे साल 3,300 रुपए (अधिकतम 10,000 रुपए) की सब्सिडी उपलब्ध होगी।
ई-ऑटो (तीन पहिया) के लिए पहले साल 50,000 रुपए, दूसरे साल 40,000 रुपए और तीसरे साल 30,000 रुपए की सहायता दी जाएगी। वहीं, छोटे इलेक्ट्रिक ट्रक (एन1) पर पहले साल 1 लाख रुपए, दूसरे साल 75,000 रुपए और तीसरे साल 50,000 रुपए का लाभ मिलेगा।
पुरानी बीएस-IV या उससे कम के वाहनों के स्क्रैप करने पर भी प्रोत्साहन दिया जाएगा। दोपहिया पर 10,000 रुपए, तीन पहिया पर 25,000 रुपए, कार पर 1 लाख रुपए (30 लाख तक की कीमत वाली, पहले 1 लाख लोगों तक) और एन1 ट्रक पर 50,000 रुपए मिलेंगे।
दिल्ली में रजिस्ट्रेशन कराने पर सभी ईवी को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100 प्रतिशत छूट मिलेगी। 30 लाख तक की इलेक्ट्रिक कारों को पूरी छूट और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड को 50 प्रतिशत छूट प्राप्त होगी, जबकि 30 लाख से ऊपर की कारों पर कोई छूट नहीं होगी।
चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क के लिए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड को नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। यह संस्था प्लानिंग, लोकेशन तय करने और बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। इसके साथ ही, एक डिजिटल पोर्टल और सिंगल विंडो सिस्टम भी विकसित किया जाएगा ताकि चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना सरल हो सके।
वाहन निर्माता कंपनियों को हर डीलरशिप पर कम से कम एक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना अनिवार्य होगा। इसमें 2-3 व्हीलर और 4 व्हीलर के लिए अलग-अलग चार्जिंग पॉइंट होंगे।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति बैटरी संग्रहण केंद्र बनाने और सुरक्षित निपटान के लिए नियम निर्धारित करेगी। बैटरी ट्रैकिंग प्रणाली भी विकसित की जाएगी ताकि रीसाइक्लिंग और पुनः उपयोग सुरक्षित रूप से किया जा सके।
1 जनवरी 2027 से केवल इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहन रजिस्टर किए जाएंगे। 1 अप्रैल 2028 से केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन रजिस्टर किए जाएंगे। स्कूल बसों में भी ईवी का अनुपात बढ़ाना अनिवार्य होगा। पहले 2 वर्षों में 10 प्रतिशत, तीसरे वर्ष 20 प्रतिशत, और 2030 तक 30 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकारी विभागों में नई खरीदी जाने वाली सभी गाड़ियां इलेक्ट्रिक होंगी। दिल्ली परिवहन निगम की नई बसें भी इलेक्ट्रिक होंगी, और डिलीवरी तथा फ्लीट कंपनियों को 2026 से पेट्रोल-डीजल वाहनों को शामिल करने से रोका जाएगा। पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाया जाएगा। ट्रांसपोर्ट विभाग इस नीति को लागू करेगा और एक विशेष ईवी सेल का गठन करेगा।
यह नीति दिल्ली को प्रदूषणमुक्त और आधुनिक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाने का एक बड़ा प्रयास मानी जा रही है।