दिल्ली में 2,800 एसी इलेक्ट्रिक बसें: PM ई-ड्राइव योजना से बेड़ा 7,500 तक पहुँचेगा
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली सरकार केंद्र की पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रेवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एनहांसमेंट (PM ई-ड्राइव) योजना के अंतर्गत 2,800 वातानुकूलित लो-फ्लोर शून्य-उत्सर्जन बसें अपने सार्वजनिक परिवहन बेड़े में जोड़ने जा रही है। दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने 7 जून 2026 को यह जानकारी देते हुए बताया कि इस विस्तार से राष्ट्रीय राजधानी का कुल इलेक्ट्रिक बस बेड़ा वर्ष के अंत तक लगभग 7,500 तक पहुँच जाएगा।
नई बसों का विवरण
प्रस्तावित 2,800 बसों में 1,400 नौ मीटर और 1,400 बारह मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। परिवहन मंत्री के अनुसार, यह संतुलित बेड़ा घनी आबादी वाले इलाकों के साथ-साथ आस-पड़ोस और कम सुविधा वाले क्षेत्रों की कनेक्टिविटी की जरूरतें एक साथ पूरी करने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। इन बसों के साथ-साथ बस डिपो में आवश्यक चार्जिंग और विद्युत अवसंरचना भी स्थापित की जाएगी।
वर्तमान स्थिति और विस्तार लक्ष्य
फिलहाल दिल्ली में लगभग 4,300 इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही हैं, जिससे यह देश के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक बस बेड़ों में से एक है। 2,800 नई बसें जुड़ने के बाद यह संख्या 7,100 से अधिक हो जाएगी और सरकार का लक्ष्य इसे 7,500 तक ले जाने का है।
PM ई-ड्राइव का अगला चरण
परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने बताया कि PM ई-ड्राइव फेज-दो के तहत 3,330 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने पर भी काम जारी है, जिनमें 500 सात मीटर लंबी बसें होंगी। ये छोटी बसें फीडर सेवाओं और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी, विशेष रूप से आवासीय, ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में।
PM ई-ड्राइव योजना की पृष्ठभूमि
₹10,900 करोड़ के स्वीकृत वित्तीय परिव्यय के साथ PM ई-ड्राइव योजना 1 अक्टूबर 2024 से प्रभावी हो गई है। इसका प्राथमिक उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने में तेजी लाना, चार्जिंग अवसंरचना विकसित करना और देश में सशक्त EV विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र खड़ा करना है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली की वायु गुणवत्ता लगातार चिंता का विषय बनी हुई है और परिवहन क्षेत्र उत्सर्जन के प्रमुख स्रोतों में से एक माना जाता है।
पर्यावरण और यात्री अनुभव पर असर
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार का कहना है कि इस पहल से वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी, वायु गुणवत्ता में सुधार होगा और दिल्लीवासियों को स्वच्छ, सुरक्षित तथा अधिक भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिलेगी। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में यह निरंतर निवेश राष्ट्रीय सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप भविष्य के लिए तैयार परिवहन प्रणाली बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।