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मेघालय में पीएम ई-बस सेवा लॉन्च: सीएम कॉनराड संगमा ने शिलांग में 5 इलेक्ट्रिक बसों को दिखाई हरी झंडी

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मेघालय में पीएम ई-बस सेवा लॉन्च: सीएम कॉनराड संगमा ने शिलांग में 5 इलेक्ट्रिक बसों को दिखाई हरी झंडी

सारांश

शिलांग को लंबे समय से जाम और प्रदूषण की समस्या से जूझना पड़ रहा है — पीएम ई-बस सेवा के तहत 5 इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत उस बदलाव की पहली कड़ी है। GCC मॉडल के तहत डीजल बसों में यात्री संख्या 300 से 3,000 तक पहुँची; अब लक्ष्य है 150 बसें और रोज़ 60,000 यात्री।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री कॉनराड के.
संगमा ने 9 जून 2026 को शिलांग में पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत 5 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाई।
प्रत्येक बस एक बार चार्ज पर 180–200 किमी चलती है; क्षमता 25 यात्री ; व्हीलचेयर रैंप, GPS और ई-टिकटिंग सुविधा उपलब्ध।
केंद्र की योजना के तहत शिलांग को कुल 50 इलेक्ट्रिक बसें स्वीकृत; शहर GCC मॉडल अपना रहा है।
GCC मॉडल के तहत डीजल बसों में दैनिक यात्री संख्या लगभग 300 से लगभग 3,000 हो गई।
6 महीनों में 150 बसों का बेड़ा तैयार कर प्रतिदिन लगभग 60,000 यात्रियों को सेवा देने का लक्ष्य।
इलेक्ट्रिक वाहनों पर रजिस्ट्रेशन शुल्क और रोड टैक्स छूट नीति को कैबिनेट की मंजूरी के बाद नवीनीकृत किया जाएगा।

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 9 जून 2026 को शिलांग के स्टेट गेस्ट हाउस 'ताराघर' में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्र सरकार की पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत 5 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाई। यह राज्य में टिकाऊ शहरी परिवहन और शून्य-उत्सर्जन पब्लिक ट्रांसपोर्ट की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य शिलांग में यातायात भीड़ कम करना, कार्बन उत्सर्जन घटाना और सार्वजनिक परिवहन ढाँचे को सुदृढ़ करना है।

बसों की विशेषताएँ

नई शुरू की गई ये एयर-कंडीशंड इलेक्ट्रिक बसें जीरो-एमिशन वाहन हैं, जो एक बार चार्ज होने पर 180 से 200 किलोमीटर तक चल सकती हैं। प्रत्येक बस में 25 यात्रियों की बैठने की क्षमता है। इनमें व्हीलचेयर के लिए समर्पित स्थान, फोल्डेबल रैंप, जीपीएस-आधारित निगरानी प्रणाली और ई-टिकटिंग सुविधा भी उपलब्ध है, जो इन्हें दिव्यांगजनों और आम यात्रियों दोनों के लिए सुलभ बनाती है।

मुख्यमंत्री का बयान और व्यापक विज़न

मुख्यमंत्री संगमा ने कार्यक्रम में कहा, "धीरे-धीरे लेकिन लगातार, हम एक ऐसे मॉडल तक पहुँच रहे हैं, जो हमारे शहर की जरूरतों के हिसाब से अधिक अनुकूल और खासतौर पर तैयार किया गया है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल का मुख्य लक्ष्य शिलांग में भीड़ कम करना और नागरिकों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

संगमा ने इलेक्ट्रिक बस पहल को एक व्यापक शहरी विज़न का हिस्सा बताया, जिसमें पार्किंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना और मावदियांगडियांग में एक प्रस्तावित प्रशासनिक शहर का विकास शामिल है — जो शिलांग के मुख्य शहरी क्षेत्र पर दबाव कम करने के लिए बनाया जाएगा।

इलेक्ट्रिक वाहन नीति को मिलेगा नवीनीकरण

मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए घोषणा की कि इलेक्ट्रिक वाहनों पर रजिस्ट्रेशन शुल्क और रोड टैक्स में छूट देने वाली राज्य नीति को कैबिनेट की मंजूरी के बाद नवीनीकृत किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन मेघालय के पहाड़ी भूगोल के लिए विशेष रूप से उपयुक्त हैं और इन्हें घर पर भी सहजता से चार्ज किया जा सकता है।

ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मॉडल और भविष्य की योजना

राज्य के शहरी मामलों के विभाग के कमिश्नर एवं सचिव विजय कुमार डी ने बताया कि केंद्र की पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत शिलांग को कुल 50 इलेक्ट्रिक बसें स्वीकृत की गई हैं। शहर 'ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट' (GCC) मॉडल अपना रहा है, जिसमें ऑपरेटरों को यात्री किराए के बजाय सेवा गुणवत्ता और समय-सारणी के पालन के आधार पर भुगतान किया जाता है।

इस मॉडल की सफलता का प्रमाण पहले से मिल रहा है — इसी प्रारूप के तहत संचालित 15 डीजल बसों में दैनिक यात्री संख्या कुछ ही महीनों में लगभग 300 से बढ़कर लगभग 3,000 हो गई है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि छह महीनों के भीतर डीजल और इलेक्ट्रिक मिलाकर लगभग 150 बसों का बेड़ा तैयार हो, जो पूरे शिलांग में प्रतिदिन लगभग 60,000 यात्रियों को सेवा दे सके। यह पहल उत्तर-पूर्व भारत में हरित शहरी परिवहन के एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर उसकी समयसीमा और फंडिंग पर स्पष्टता अभी नहीं है। बिना इन सवालों के जवाब के, 60,000 दैनिक यात्रियों का लक्ष्य एक सुर्खी भर रह सकता है।
RashtraPress
8 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम ई-बस सेवा योजना क्या है और मेघालय को इससे क्या मिला?
पीएम ई-बस सेवा केंद्र सरकार की एक योजना है जिसके तहत शहरों को सब्सिडी पर इलेक्ट्रिक बसें दी जाती हैं। इस योजना के तहत शिलांग को कुल 50 इलेक्ट्रिक बसें स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 5 को 9 जून 2026 को लॉन्च किया गया।
शिलांग की नई इलेक्ट्रिक बसों की क्या विशेषताएँ हैं?
ये एयर-कंडीशंड, जीरो-एमिशन बसें हैं जो एक चार्ज में 180–200 किलोमीटर चलती हैं। इनमें 25 यात्रियों की क्षमता है और व्हीलचेयर रैंप, GPS निगरानी तथा ई-टिकटिंग की सुविधा है।
ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) मॉडल क्या होता है?
GCC मॉडल में बस ऑपरेटरों को यात्री किराए की आय के बजाय सेवा की गुणवत्ता और समय-सारणी के पालन के आधार पर भुगतान किया जाता है। शिलांग में इस मॉडल के तहत डीजल बसों की दैनिक सवारी संख्या कुछ महीनों में लगभग 300 से बढ़कर लगभग 3,000 हो गई।
शिलांग में कब तक पूरा बस बेड़ा तैयार होगा?
राज्य सरकार के अनुसार छह महीनों के भीतर डीजल और इलेक्ट्रिक मिलाकर लगभग 150 बसों का बेड़ा तैयार होने की उम्मीद है, जो प्रतिदिन लगभग 60,000 यात्रियों को सेवा दे सकेगा।
मेघालय में इलेक्ट्रिक वाहनों पर क्या टैक्स छूट मिलेगी?
मुख्यमंत्री संगमा ने घोषणा की है कि इलेक्ट्रिक वाहनों पर रजिस्ट्रेशन शुल्क और रोड टैक्स में छूट देने वाली राज्य नीति को कैबिनेट की मंजूरी के बाद नवीनीकृत किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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