मेघालय में पीएम सूर्य घर योजना की समीक्षा, CM कॉनराड संगमा ने बनाई नवीकरणीय ऊर्जा कार्ययोजना
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने मंगलवार, 23 जून 2026 को शिलांग स्थित राज्य अतिथि गृह में केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर–मुफ्त बिजली योजना की प्रगति की समीक्षा की और राज्य के लिए एक व्यापक नवीकरणीय ऊर्जा रणनीति तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेघालय की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्वच्छ ऊर्जा के विकल्पों का विस्तार करना राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए।
पीएम सूर्य घर योजना: लक्ष्य और प्रावधान
पीएम सूर्य घर–मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाकर हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार की ओर से ₹78,000 तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को योजना की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया।
मेघालय में चुनौतियाँ
अधिकारियों ने बताया कि मेघालय में इस योजना के क्रियान्वयन में कई व्यावहारिक बाधाएँ सामने आ रही हैं। परिवहन लागत अधिक होना, दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र और छतों पर सौर संयंत्रों के सीमित विस्तार के कारण स्थापना लागत बढ़ जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर के कई राज्य नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने में बुनियादी ढाँचे की कमी से जूझ रहे हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश और प्राथमिकताएँ
संगमा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सौर ऊर्जा को आम नागरिकों के लिए अधिक किफायती और आकर्षक बनाया जाए, ताकि निवेश की लागत जल्दी वापस मिल सके और उपभोक्ताओं को अधिकतम लाभ हो। उन्होंने पीएम सूर्य घर योजना को राज्य की मुख्यमंत्री सौर मिशन योजना से जोड़ने पर भी जोर दिया, ताकि दोनों योजनाओं का समन्वित लाभ मिल सके।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने बैटरी आधारित सौर ऊर्जा प्रणालियों के विकल्पों पर काम करने का आह्वान किया, ताकि बिजली आपूर्ति अधिक भरोसेमंद बनाई जा सके। इसके अलावा, सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में भी छत पर सौर संयंत्र लगाने की संभावनाएँ तलाशने के निर्देश दिए गए।
विकेंद्रीकृत ऊर्जा और जन-जागरूकता
दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में संगमा ने ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बायोमास, बायोगैस, सूक्ष्म जलविद्युत परियोजनाओं और सौर ऊर्जा आधारित सामुदायिक ढाँचों जैसे विकेंद्रीकृत विकल्पों को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और युवा संगठनों को नवीकरणीय ऊर्जा जागरूकता अभियान से जोड़ने का सुझाव भी दिया।
आगे की राह
बैठक के अंत में अधिकारियों को एक समन्वित कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया, जो बिजली की लागत कम करने, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने और मेघालय के टिकाऊ ऊर्जा भविष्य को मजबूत करने पर केंद्रित हो। राज्य सरकार के इस कदम से उम्मीद है कि आने वाले समय में मेघालय में सौर ऊर्जा अपनाने की दर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।