वित्त वर्ष 2035 तक इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी 40% तक पहुँचेगी, KPMG रिपोर्ट में बड़ा अनुमान
सारांश
मुख्य बातें
भारत में इलेक्ट्रिक बसों की वार्षिक बिक्री में हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2035 तक 35-40 प्रतिशत तक पहुँच सकती है, जो अभी मात्र 7 प्रतिशत के करीब है। KPMG इंडिया की 14 मई 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, इसी अवधि में सार्वजनिक परिवहन (पब्लिक ट्रांसपोर्ट) में ईवी बसों की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत से भी अधिक हो सकती है। यह रिपोर्ट भारत के बस क्षेत्र को एक निर्णायक विद्युतीकरण मोड़ पर खड़ा बताती है।
मौजूदा स्थिति और बाज़ार का आकार
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बसों की वार्षिक बिक्री 35,000 से 50,000 यूनिट के बीच है और यह क्षेत्र अब इलेक्ट्रिफिकेशन के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। मार्च 2026 तक देश की सड़कों पर लगभग 16,300 इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही थीं। अब तक लगभग 62,000 ई-बस टेंडर जारी किए जा चुके हैं, जिनमें से करीब 46,000 बसें विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत आवंटित की गई हैं।
वर्तमान में देश की कुल ई-बस तैनाती का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सरकारी टेंडरों और सार्वजनिक परिवहन उपक्रमों के ज़रिये हुआ है, जो यह दर्शाता है कि इस क्षेत्र की वृद्धि अभी भी मुख्यतः सरकारी खरीद पर निर्भर है।
क्लीन मोबिलिटी में बसों की अहम भूमिका
रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण तथ्य उजागर किया गया है — भारत में यात्रियों द्वारा तय की जाने वाली कुल दूरी का लगभग 57 प्रतिशत बसों के माध्यम से तय होता है। ऐसे में बस क्षेत्र का विद्युतीकरण देश के कार्बन उत्सर्जन में कटौती और क्लीन मोबिलिटी के लक्ष्यों को हासिल करने में सर्वाधिक प्रभावी कदमों में से एक साबित हो सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए परिवहन क्षेत्र में बड़े बदलावों की दिशा में काम कर रहा है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
KPMG इंडिया के ऑटोमोटिव पार्टनर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लीड रोहन राव ने कहा, 'भारत में इलेक्ट्रिक बसों की ओर बदलाव अब केवल नीतिगत पहल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक मोबिलिटी इकोसिस्टम के लिए एक संरचनात्मक परिवर्तन का अवसर बन रहा है। सरकारी खरीद कार्यक्रमों, लागत में सुधार और इन्फ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश के समर्थन से सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण ने पहले ही मज़बूत गति पकड़ ली है।'
राव ने आगे बताया कि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, फाइनेंसिंग इनोवेशन, चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और परिचालन दक्षता को एक साथ जोड़ने वाले स्केलेबल इकोसिस्टम के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि सार्वजनिक और निजी — दोनों परिवहन क्षेत्रों में दीर्घकालिक और टिकाऊ विकास संभव हो सके।
आगे की राह: वित्त वर्ष 2030 तक नए टेंडर
रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों की अगुवाई वाली पहलों के ज़रिये वित्त वर्ष 2030 तक लगभग 40,000 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसों के लिए टेंडर जारी किए जाने की उम्मीद है। सरकारी खरीद और इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश को इस क्षेत्र की अगली विकास की मुख्य कड़ी बताया गया है। गौरतलब है कि तैनाती में मौजूदा चुनौतियाँ — जैसे चार्जिंग नेटवर्क की कमी और वित्त पोषण की जटिलताएँ — इस लक्ष्य को हासिल करने में सबसे बड़ी परीक्षा होंगी।