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दिल्ली-NCR में पुराने ट्रक-बस बदलने को ₹9,585 करोड़ की ग्रीन योजना मंज़ूर, 2.07 लाख वाहन मालिकों को फ़ायदा

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दिल्ली-NCR में पुराने ट्रक-बस बदलने को ₹9,585 करोड़ की ग्रीन योजना मंज़ूर, 2.07 लाख वाहन मालिकों को फ़ायदा

सारांश

दिल्ली-NCR की ज़हरीली हवा पर केंद्र का सबसे ठोस वार — ₹9,585 करोड़ की दो-वर्षीय योजना पुराने डीज़ल ट्रक-बस को निशाने पर लेती है। 2.07 लाख मालिकों को ब्याज सब्सिडी, ईंधन वाउचर, कर माफ़ी और OEM छूट का पैकेज, बशर्ते वे BS-VI या इलेक्ट्रिक पर शिफ़्ट हों। असली परीक्षा क्रियान्वयन की।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 3 जून को ₹9,585 करोड़ की दो-वर्षीय ग्रीन योजना मंज़ूर की।
केंद्र का हिस्सा ₹5,041 करोड़ , राज्यों की कर रियायतें लगभग ₹1,601 करोड़ ।
लाभार्थी लगभग 2.07 लाख वाहन मालिक — 1.91 लाख ट्रक और 16,329 बसें ।
नए ऋण पर 5 वर्ष तक 5% ब्याज सब्सिडी, हर माह ₹4,800 तक ईंधन वाउचर, OEM से 8% तक छूट।
दिल्ली में हल्के मालवाहक केवल इलेक्ट्रिक; बसों के लिए केवल BS-VI CNG या इलेक्ट्रिक मान्य।
सरकारी वाहन योजना के दायरे से बाहर; संचालन पूर्णतः डिजिटल पोर्टल पर।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 3 जून को दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण घटाने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए ₹9,585 करोड़ की दो-वर्षीय ग्रीन योजना को मंज़ूरी दे दी, जिसके तहत पुराने डीज़ल ट्रकों और बसों को नए BS-VI, बेहतर मानकों वाले या इलेक्ट्रिक वाहनों से बदला जाएगा। आधिकारिक बयान के अनुसार, इस योजना से लगभग 2.07 लाख वाहन मालिकों को सीधा लाभ मिलेगा, जिनमें करीब 1.91 लाख ट्रक और 16,329 बसें शामिल हैं।

योजना का वित्तीय ढाँचा

₹9,585 करोड़ की कुल लागत में केंद्र सरकार ₹5,041 करोड़ का योगदान देगी, जबकि भाग लेने वाले राज्यों की ओर से लगभग ₹1,601 करोड़ की कर रियायतें दी जाएँगी। यह योजना आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के अधीन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) द्वारा वित्तपोषित होगी, जबकि क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) की होगी।

कौन-से वाहन, कौन-सा रास्ता

योजना उन वाहन मालिकों को लक्षित करती है जिनके ट्रक या बस BS-IV या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों के हैं। BS-III या उससे पुराने वाहनों को पंजीकृत स्क्रैपिंग केंद्रों में स्क्रैप कराना अनिवार्य होगा। BS-IV वाहनों को या तो स्क्रैप किया जा सकता है, या NCR से बाहर ऐसे शहरों में बेचा जा सकता है जो राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के दायरे में नहीं आते।

इसके बाद मालिकों को NCR के भीतर ही नया BS-VI, उससे बेहतर मानकों वाला या इलेक्ट्रिक वाहन ख़रीदकर पंजीकृत कराना होगा। दिल्ली में योजना के तहत ख़रीदे जाने वाले हल्के मालवाहक वाहन केवल इलेक्ट्रिक होंगे, और बसों के लिए केवल BS-VI CNG या इलेक्ट्रिक मॉडल मान्य होंगे। सरकारी वाहनों को योजना से बाहर रखा गया है।

प्रोत्साहन की परतें

केंद्र सरकार नए वाहन के ऋण पर पाँच वर्षों तक 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देगी, साथ ही वाहन श्रेणी के अनुसार हर महीने ₹4,800 तक के ईंधन वाउचर मिलेंगे। इलेक्ट्रिक वाहन ख़रीदने या डिपॉज़िट सर्टिफ़िकेट ट्रेडिंग पर एकमुश्त लाभ अलग से मिलेगा।

राज्य सरकारें नए वाहनों के पंजीकरण शुल्क से छूट देंगी, 10 वर्षों तक मोटर वाहन कर में 100 प्रतिशत तक और पुराने वाहनों पर 50 प्रतिशत तक राहत मिलेगी। पुराने वाहनों पर बकाया देनदारियाँ भी माफ़ की जाएँगी। ऑटोमोबाइल कंपनियाँ (OEM) एक्स-शोरूम कीमत पर 8 प्रतिशत तक की छूट देंगी।

डिजिटल संचालन और निगरानी

योजना का पूरा संचालन एक एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होगा, जहाँ पात्रता जाँच, ब्याज सब्सिडी दावे, मासिक ईंधन वाउचर और प्रदूषण कटौती की निगरानी रियल-टाइम में होगी। केंद्र के लाभ नए वाहन के पंजीकरण की तारीख़ से पाँच वर्षों तक जारी रहेंगे — यानी दो-वर्षीय नामांकन अवधि समाप्त होने के बाद भी प्रभाव बना रहेगा।

क्यों मायने रखता है

यह योजना दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सहयोग से लागू होगी। गौरतलब है कि दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण, ख़ासकर सर्दियों में, लंबे समय से एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है, और भारी डीज़ल वाहन इसमें प्रमुख योगदानकर्ताओं में गिने जाते रहे हैं। आने वाले हफ़्तों में पोर्टल और विस्तृत दिशानिर्देशों की अधिसूचना पर निगाहें टिकी होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

585 करोड़ का यह पैकेज दिल्ली-NCR की हवा पर कागज़ी दबाव नहीं, संरचनात्मक हस्तक्षेप का दावा करता है — पर असली कसौटी क्रियान्वयन की है, नीयत की नहीं। पिछली स्क्रैपिंग नीतियों में सबसे बड़ी कमज़ोरी रही है BS-IV वाहनों का NCR से बाहर ‘रीसाइकल’ होकर दूसरे ज़िलों की हवा बिगाड़ना — नई योजना इसे सीमित तो करती है, पर NCAP-मुक्त शहरों में बिक्री की छूट देकर समस्या को विस्थापित भी करती है। दूसरा सवाल: ट्रक उद्योग का बड़ा हिस्सा छोटे ऑपरेटरों का है जिनके लिए 5% ब्याज सब्सिडी पर्याप्त प्रोत्साहन है या नहीं, यह पहले छह महीनों में स्पष्ट हो जाएगा। डिजिटल-फ़र्स्ट संचालन स्वागत-योग्य है, बशर्ते पोर्टल वास्तव में चले।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली-NCR की ₹9,585 करोड़ की ग्रीन योजना क्या है?
यह 3 जून को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंज़ूर दो-वर्षीय योजना है, जिसके तहत दिल्ली-NCR में पंजीकृत पुराने BS-IV या उससे पुराने ट्रक और बस मालिकों को नए BS-VI, बेहतर मानकों वाले या इलेक्ट्रिक वाहन ख़रीदने पर प्रोत्साहन मिलेगा। इसकी कुल लागत ₹9,585 करोड़ है, जिसमें केंद्र का योगदान ₹5,041 करोड़ है।
योजना से किसे और कितना लाभ मिलेगा?
आधिकारिक बयान के अनुसार लगभग 2.07 लाख वाहन मालिकों को लाभ मिलेगा, जिनमें करीब 1.91 लाख ट्रक और 16,329 बसें शामिल हैं। लाभों में 5 वर्ष तक 5% ब्याज सब्सिडी, हर माह ₹4,800 तक ईंधन वाउचर, पंजीकरण शुल्क माफ़ी, मोटर वाहन कर में राहत और OEM से 8% तक छूट शामिल है।
पुराने BS-III और BS-IV वाहनों का क्या होगा?
BS-III या उससे पुराने वाहनों को पंजीकृत स्क्रैपिंग केंद्रों पर स्क्रैप कराना अनिवार्य होगा। BS-IV वाहनों को या तो स्क्रैप किया जा सकता है, या NCR से बाहर उन शहरों में बेचा जा सकता है जो राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के दायरे में नहीं आते।
दिल्ली में किस तरह के नए वाहन ख़रीदे जा सकेंगे?
दिल्ली में योजना के तहत ख़रीदे जाने वाले हल्के मालवाहक वाहन केवल इलेक्ट्रिक होने चाहिए, जबकि बसों के लिए केवल BS-VI CNG या इलेक्ट्रिक मॉडल मान्य होंगे। सरकारी वाहनों को योजना से बाहर रखा गया है।
योजना का संचालन और निगरानी कैसे होगी?
पूरी योजना एक एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से डिजिटल रूप से संचालित होगी, जहाँ पात्रता जाँच, ब्याज सब्सिडी दावे, मासिक ईंधन वाउचर और प्रदूषण कटौती की निगरानी रियल-टाइम में होगी। केंद्र के लाभ नए वाहन के पंजीकरण की तारीख़ से पाँच वर्षों तक जारी रहेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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