दिल्ली में 'स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली' परियोजना: विश्व बैंक देगा ₹5,395 करोड़, सीएम रेखा गुप्ता ने किया ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 3 जुलाई 2026 को घोषणा की कि दिल्ली सरकार का पर्यावरण विभाग 'स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली' नामक एक महत्वाकांक्षी सात वर्षीय परियोजना शुरू करने जा रहा है, जिसे विश्व बैंक सहित बहुपक्षीय संस्थाओं के सहयोग से लागू किया जाएगा। ₹8,300 करोड़ की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना सितंबर 2026 से अगस्त 2033 तक दिल्ली के सभी जिलों में चलेगी और राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने का काम करेगी।
परियोजना की वित्तीय संरचना
कुल ₹8,300 करोड़ की लागत में से 65 प्रतिशत — यानी लगभग ₹5,395 करोड़ — विश्व बैंक वित्तीय सहायता के रूप में उपलब्ध कराएगा। शेष 35 प्रतिशत राशि यानी करीब ₹2,905 करोड़ दिल्ली सरकार वहन करेगी। यह वित्तपोषण मॉडल भारत में किसी राज्य सरकार द्वारा वायु गुणवत्ता सुधार के लिए विश्व बैंक के साथ की गई बड़ी साझेदारियों में से एक है।
परियोजना की तैयारियों को अंतिम रूप देने और सभी हितधारकों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए 10 जुलाई को एक विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों और एजेंसियों की भूमिकाएँ तय की जाएंगी तथा कार्यक्रम के समयबद्ध क्रियान्वयन की रूपरेखा पर चर्चा होगी।
दो प्रमुख स्तंभों पर टिकी परियोजना
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार परियोजना दो मुख्य आधारों पर काम करेगी। पहला स्तंभ वायु गुणवत्ता प्रबंधन को मजबूत बनाने पर केंद्रित है — इसके तहत एक समर्पित प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) बनाई जाएगी, आधुनिक एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्रणाली और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) विकसित किया जाएगा तथा इंडो-गंगा के मैदानी राज्यों के साथ मिलकर प्रदूषण नियंत्रण पर काम होगा।
दूसरा स्तंभ प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों से उत्सर्जन कम करने पर केंद्रित है। इसके अंतर्गत पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा, सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाया जाएगा और वाहनों से होने वाले प्रदूषण की निगरानी के लिए अत्याधुनिक प्रदूषण जाँच (PUC) प्रणाली विकसित की जाएगी।
कौन-से क्षेत्र होंगे लक्षित
परियोजना के तहत परिवहन, सड़क की धूल, निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (C&D) अपशिष्ट, ठोस कचरा प्रबंधन, उद्योग, हरित क्षेत्र और जल प्रदूषण जैसे क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इसे 'केवल प्रदूषण नियंत्रण की योजना नहीं, बल्कि दिल्लीवासियों के लिए एक दीर्घकालिक निवेश' बताया।
कौन-से विभाग होंगे शामिल
परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए दिल्ली सरकार के कई प्रमुख विभाग और एजेंसियाँ मिलकर काम करेंगी। इनमें पर्यावरण विभाग, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC), परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग (PWD), दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली जल बोर्ड (DJB), दिल्ली परिवहन निगम (DTC), दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) सहित अन्य संस्थाएँ शामिल हैं। भारत सरकार का आर्थिक कार्य विभाग (DEA) और विश्व बैंक भी इसके प्रमुख साझेदार होंगे।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली लगातार देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार होती है और सर्दियों में AQI 'गंभीर' श्रेणी में पहुँच जाता है। गौरतलब है कि NCAP के तहत 2026 तक PM2.5 और PM10 के स्तर में 40 प्रतिशत कमी का राष्ट्रीय लक्ष्य है। 10 जुलाई की कार्यशाला के बाद विभागीय जिम्मेदारियाँ तय होंगी और परियोजना का औपचारिक शुभारंभ सितंबर 2026 में अपेक्षित है।