दिल्ली का आर्थिक सर्वे 2025-26: सीएम रेखा गुप्ता ने प्रस्तुत किया आर्थिक रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली की जीएसडीपी 2025-26 में 13,27,055 करोड़ रुपए तक पहुँचने का अनुमान।
- प्रति व्यक्ति आय 5,31,610 रुपए, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
- सेवा क्षेत्र का योगदान 86.32 प्रतिशत।
- राजस्व अधिशेष 9661.31 करोड़ रुपए।
- वायु गुणवत्ता में सुधार और पशु चिकित्सा सेवाओं की वृद्धि।
नई दिल्ली, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे सदन के पटल पर रखते हुए बताया कि यह सर्वेक्षण राजधानी की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, मजबूत बुनियादी ढांचे और जनकल्याणकारी नीतियों का स्पष्ट प्रमाण है। दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि राजधानी को एक वैश्विक, समावेशी, न्यायसंगत और रहने योग्य शहर बनाया जाए, जिससे हर नागरिक की आकांक्षाएं पूरी की जा सकें।
अग्रिम अनुमान के अनुसार, वर्ष 2025-26 में दिल्ली की अर्थव्यवस्था (जीएसडीपी) मौजूदा कीमतों पर लगभग 13,27,055 करोड़ रुपए पहुँचने की संभावना है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.42 प्रतिशत अधिक है। प्रति व्यक्ति आय भी बढ़कर लगभग 5,31,610 रुपए रहने का अनुमान है, जो राष्ट्रीय औसत से लगभग ढाई गुना अधिक है। हालाँकि, सर्वेक्षण में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से धीमी रही है।
दिल्ली की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का योगदान 86.32 प्रतिशत है, जबकि उद्योग का हिस्सा 12.88 प्रतिशत और कृषि का 0.80 प्रतिशत है। राज्य का राजस्व अधिशेष भी बरकरार है, जो लगभग 9661.31 करोड़ रुपए (जीएसडीपी का 0.73 प्रतिशत) रहने का अनुमान है। वहीं, एक लाख करोड़ रुपए के कुल बजट में से 59,300 करोड़ रुपए योजनाओं और कार्यक्रमों पर आवंटित किए गए हैं।
दिल्ली सरकार द्वारा वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, जिससे वर्ष 2018 में ‘अच्छे दिनों’ (अच्छे, संतोषजनक और मध्यम श्रेणी) की संख्या 159 से बढ़कर 2025 में 200 हो गई है। कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में, शहर में 46 सरकारी पशु चिकित्सालय, 25 औषधालय, एक प्रयोगशाला, एक किसान सूचना केंद्र और तीन मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों का एक मजबूत नेटवर्क है। इन केंद्रों पर उपचार सेवाएं लेने वाले पशुओं की संख्या भी वर्ष 2011-12 के 4,15,986 से बढ़कर मार्च 2026 तक 5,45,754 होने का अनुमान है।