17 अगस्त 2026
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यूपी चुनाव 2027 से पहले संजय निषाद का बड़ा बयान: निषाद, राजभर, पटेल समुदायों का आरक्षण पर पहला हक

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यूपी चुनाव 2027 से पहले संजय निषाद का बड़ा बयान: निषाद, राजभर, पटेल समुदायों का आरक्षण पर पहला हक

सारांश

यूपी 2027 से पहले संजय निषाद ने आरक्षण को हथियार बनाया — निषाद, राजभर, पटेल समुदायों का 'पहला हक' बताते हुए सपा, बसपा और कांग्रेस पर धोखे का सीधा आरोप। लखनऊ में निषाद पार्टी की बड़ी बैठक में बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने का संकल्प।

मुख्य बातें

यूपी मंत्री संजय निषाद ने 17 अगस्त 2026 को कहा कि निषाद, राजभर, पटेल समेत कई समुदायों का आरक्षण पर 'पहला हक' है।
निषाद ने आरोप लगाया कि 1992-94 में इन समुदायों को SC से OBC श्रेणी में डाला गया, जो उनके अधिकारों का हनन था।
सपा, बसपा और कांग्रेस पर आरोप — इन दलों ने इन समुदायों के वोट लिए पर आरक्षण के लिए आवाज नहीं उठाई।
31 दिसंबर 2012 के विरोध प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि राज्यपाल ने पद छोड़ने से पहले संशोधन किया था।
लखनऊ में निषाद पार्टी की संगठनात्मक बैठक में बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने की रणनीति बनाई गई।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के बीच आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। यूपी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने 17 अगस्त 2026 को लखनऊ में एक बातचीत के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि निषाद, राजभर, पटेल और अन्य समुदायों का आरक्षण पर 'पहला हक' है, क्योंकि इन समुदायों ने देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया था। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल भी पिछड़े और दलित वर्गों के आरक्षण को चुनावी मुद्दा बनाने में जुटे हैं।

आरक्षण पर समुदायों का ऐतिहासिक दावा

संजय निषाद ने तर्क दिया कि निषाद, राजभर, पटेल और संबद्ध समुदाय राष्ट्रवादी और वफादार रहे हैं। उनके अनुसार इन समुदायों के पूर्वजों ने अंग्रेजों और मुगलों के विरुद्ध लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक योगदान और बलिदान के आधार पर इन जातियों को आरक्षण का अधिकार सबसे पहले मिलना चाहिए।

निषाद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने हमेशा इन समुदायों के वोट लिए, लेकिन आरक्षण के मुद्दे पर उनके साथ धोखा किया। उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारें इन्हीं समुदायों के समर्थन से सत्ता में आईं, परंतु उनके आरक्षण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

सपा और बसपा पर सीधा हमला

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के आरक्षण संबंधी बयानों पर पलटवार करते हुए संजय निषाद ने कहा कि अखिलेश पर यह आरोप है कि उन्होंने निषाद समुदाय का आरक्षण छीना। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह समुदाय अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी में आता है, तो 1992-94 में उसे अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में क्यों डाला गया। निषाद के अनुसार यह मंडल आयोग के दौर में किया गया था।

उन्होंने यह भी कहा कि 31 दिसंबर 2012 को विरोध प्रदर्शन के बाद तत्कालीन राज्यपाल ने पद छोड़ने से ठीक पहले संशोधन किया, लेकिन यह कार्य एक वर्ष पूर्व ही हो जाना चाहिए था। उन्होंने बसपा प्रमुख मायावती पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने भी इन समुदायों के आरक्षण पर रोक लगवाने की कोशिश की।

छात्र आंदोलन और राष्ट्रीय गीत विवाद पर प्रतिक्रिया

लखनऊ में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बारे में पूछे जाने पर संजय निषाद ने कहा कि सरकार ने इस मामले का संज्ञान लिया है और छात्रों से जुड़े मुद्दों को सुलझाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

15 अगस्त को कांग्रेस द्वारा 'वंदे मातरम' के कथित अपमान के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत का सम्मान होना अनिवार्य है और इस विषय पर किसी भी प्रकार का विवाद स्वीकार्य नहीं है।

निषाद पार्टी की संगठनात्मक बैठक

इसी क्रम में लखनऊ में निषाद पार्टी की एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक आयोजित की गई, जिसमें राष्ट्रीय, प्रदेश, जोनल, मंडल, जिला, विधानसभा और सेक्टर स्तर के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बैठक में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा देने और आगामी राजनीतिक तथा सामाजिक चुनौतियों के लिए एकजुट होकर काम करने पर विस्तृत चर्चा हुई।

यूपी 2027 विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आएगा, आरक्षण का यह मुद्दा और अधिक तीखा होने की संभावना है — और निषाद पार्टी स्पष्ट रूप से इसे अपनी राजनीतिक पहचान का केंद्रबिंदु बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यूपी 2027 की चुनावी बिसात पर एक सोची-समझी चाल है — जो निषाद पार्टी को BJP गठबंधन में अपनी कीमत बढ़ाने का अवसर देती है। गौरतलब है कि SC बनाम OBC वर्गीकरण का यह विवाद दशकों पुराना है और अदालतों तक पहुँच चुका है, फिर भी इसे हर चुनाव से पहले नए सिरे से उठाया जाता है। असली सवाल यह है कि क्या यह माँग केवल चुनावी मोलभाव है या इसके पीछे कोई ठोस विधायी रोडमैप भी है — जो अब तक सामने नहीं आया। जब तक SC-OBC वर्गीकरण पर न्यायिक और संवैधानिक स्पष्टता नहीं आती, ये बयान जमीनी बदलाव से ज्यादा सियासी तापमान बढ़ाने का काम करते हैं।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय निषाद ने आरक्षण पर क्या कहा?
यूपी मंत्री संजय निषाद ने 17 अगस्त 2026 को लखनऊ में कहा कि निषाद, राजभर, पटेल और संबद्ध समुदायों का आरक्षण पर 'पहला हक' है, क्योंकि इन समुदायों के पूर्वजों ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया था। उन्होंने सपा, बसपा और कांग्रेस पर इन समुदायों के साथ धोखा करने का आरोप लगाया।
निषाद समुदाय को SC से OBC में क्यों डाला गया था?
संजय निषाद के अनुसार 1992-94 में मंडल आयोग के दौर में निषाद समुदाय को अनुसूचित जाति (SC) से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में स्थानांतरित किया गया था। निषाद इसे अपने समुदाय के आरक्षण अधिकारों का हनन मानते हैं और इसे वापस SC श्रेणी में शामिल करने की माँग करते रहे हैं।
यूपी चुनाव 2027 में आरक्षण का मुद्दा क्यों अहम है?
उत्तर प्रदेश में निषाद, राजभर, पटेल जैसे समुदाय बड़ी संख्या में मतदाता हैं और इनका समर्थन चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सभी प्रमुख दल इन समुदायों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे आरक्षण का मुद्दा केंद्रीय बहस बन गया है।
निषाद पार्टी की लखनऊ बैठक में क्या तय हुआ?
लखनऊ में आयोजित निषाद पार्टी की संगठनात्मक बैठक में राष्ट्रीय से लेकर सेक्टर स्तर तक के पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए एकजुट रणनीति बनाने पर चर्चा हुई।
संजय निषाद ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
संजय निषाद ने आरोप लगाया कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने निषाद समुदाय का आरक्षण 'छीना' और मंडल आयोग के दौर में उन्हें SC से OBC में डलवाने में भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि सपा ने विधानसभा या सदन में इस मुद्दे को उठाने की जहमत नहीं उठाई।
राष्ट्र प्रेस
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