यूपी चुनाव 2027 से पहले संजय निषाद का बड़ा बयान: निषाद, राजभर, पटेल समुदायों का आरक्षण पर पहला हक
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के बीच आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। यूपी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने 17 अगस्त 2026 को लखनऊ में एक बातचीत के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि निषाद, राजभर, पटेल और अन्य समुदायों का आरक्षण पर 'पहला हक' है, क्योंकि इन समुदायों ने देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया था। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल भी पिछड़े और दलित वर्गों के आरक्षण को चुनावी मुद्दा बनाने में जुटे हैं।
आरक्षण पर समुदायों का ऐतिहासिक दावा
संजय निषाद ने तर्क दिया कि निषाद, राजभर, पटेल और संबद्ध समुदाय राष्ट्रवादी और वफादार रहे हैं। उनके अनुसार इन समुदायों के पूर्वजों ने अंग्रेजों और मुगलों के विरुद्ध लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक योगदान और बलिदान के आधार पर इन जातियों को आरक्षण का अधिकार सबसे पहले मिलना चाहिए।
निषाद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने हमेशा इन समुदायों के वोट लिए, लेकिन आरक्षण के मुद्दे पर उनके साथ धोखा किया। उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारें इन्हीं समुदायों के समर्थन से सत्ता में आईं, परंतु उनके आरक्षण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
सपा और बसपा पर सीधा हमला
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के आरक्षण संबंधी बयानों पर पलटवार करते हुए संजय निषाद ने कहा कि अखिलेश पर यह आरोप है कि उन्होंने निषाद समुदाय का आरक्षण छीना। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह समुदाय अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी में आता है, तो 1992-94 में उसे अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में क्यों डाला गया। निषाद के अनुसार यह मंडल आयोग के दौर में किया गया था।
उन्होंने यह भी कहा कि 31 दिसंबर 2012 को विरोध प्रदर्शन के बाद तत्कालीन राज्यपाल ने पद छोड़ने से ठीक पहले संशोधन किया, लेकिन यह कार्य एक वर्ष पूर्व ही हो जाना चाहिए था। उन्होंने बसपा प्रमुख मायावती पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने भी इन समुदायों के आरक्षण पर रोक लगवाने की कोशिश की।
छात्र आंदोलन और राष्ट्रीय गीत विवाद पर प्रतिक्रिया
लखनऊ में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बारे में पूछे जाने पर संजय निषाद ने कहा कि सरकार ने इस मामले का संज्ञान लिया है और छात्रों से जुड़े मुद्दों को सुलझाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
15 अगस्त को कांग्रेस द्वारा 'वंदे मातरम' के कथित अपमान के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत का सम्मान होना अनिवार्य है और इस विषय पर किसी भी प्रकार का विवाद स्वीकार्य नहीं है।
निषाद पार्टी की संगठनात्मक बैठक
इसी क्रम में लखनऊ में निषाद पार्टी की एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक आयोजित की गई, जिसमें राष्ट्रीय, प्रदेश, जोनल, मंडल, जिला, विधानसभा और सेक्टर स्तर के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बैठक में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा देने और आगामी राजनीतिक तथा सामाजिक चुनौतियों के लिए एकजुट होकर काम करने पर विस्तृत चर्चा हुई।
यूपी 2027 विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आएगा, आरक्षण का यह मुद्दा और अधिक तीखा होने की संभावना है — और निषाद पार्टी स्पष्ट रूप से इसे अपनी राजनीतिक पहचान का केंद्रबिंदु बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।