20 सितंबर 2026
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आरक्षण पर अनिल राजभर का सपा पर हमला: 'आरक्षण चुराने वाले अब इसकी बात करें, इससे बड़ा आश्चर्य क्या'

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आरक्षण पर अनिल राजभर का सपा पर हमला: 'आरक्षण चुराने वाले अब इसकी बात करें, इससे बड़ा आश्चर्य क्या'

सारांश

वाराणसी में UP मंत्री अनिल राजभर ने सपा पर आरक्षण 'चुराने' का आरोप लगाया — राजभर, निषाद, मौर्य समेत पिछड़े समुदायों के नाम गिनाए। 2027 चुनाव से पहले यह हमला बताता है कि OBC-दलित वोट बैंक पर लड़ाई अभी से शुरू हो गई है।

मुख्य बातें

UP मंत्री अनिल राजभर ने 20 सितंबर 2026 को वाराणसी में समाजवादी पार्टी पर आरक्षण अधिकार छीनने का आरोप लगाया।
राजभर ने कहा कि सपा की चार सरकारों के दौरान राजभर, निषाद, मौर्य, विश्वकर्मा समेत कई पिछड़े समुदायों के हितों को नुकसान पहुँचाया गया।
2012-2017 की सपा सरकार पर अंबेडकर मूर्तियों को नुकसान पहुँचाने वालों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
प्रमोशन में आरक्षण और दलित महापुरुषों के नाम पर बने जिलों के नाम बदलने का मुद्दा भी उठाया।
राजभर ने दावा किया कि सपा 2027 विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र आरक्षण के मुद्दे को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है।

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने 20 सितंबर 2026 को वाराणसी में समाजवादी पार्टी (सपा) पर आरक्षण के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला। राजभर ने आरोप लगाया कि सपा की सरकारों के दौरान पिछड़े और दलित समुदायों के आरक्षण अधिकारों की व्यवस्थित रूप से अनदेखी की गई और कुछ विशेष वर्गों को लाभ पहुँचाया गया। उनका कहना था कि अब इन समुदायों को गुमराह करना संभव नहीं रहा।

सपा पर सीधा आरोप

मंत्री राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी प्रदेश में चार बार सरकार में रहने के दौरान राजभर, चौहान-नोनिया, निषाद-केवट-मल्लाह, मौर्य, गोंड-खरवार, विश्वकर्मा और प्रजापति समेत तमाम पिछड़े समुदायों के आरक्षण हितों को नुकसान पहुँचाती रही। उन्होंने व्यंग्यपूर्ण लहजे में कहा, 'आरक्षण की चोरी करने वाले आज आरक्षण की बात करें, इससे बड़ा कोई दूसरा आश्चर्य नहीं हो सकता।'

राजभर के अनुसार, 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए सपा चुनावी लाभ के लिए आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठा रही है। उन्होंने इसे 'राजनीतिक अवसरवाद' करार दिया।

अंबेडकर की मूर्तियों पर गंभीर आरोप

मंत्री ने 2012 से 2017 के बीच की सपा सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि उस दौर में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की मूर्तियों को नुकसान पहुँचाने की घटनाएँ हुईं और इसमें शामिल लोगों को तत्कालीन सरकार का संरक्षण प्राप्त था। राजभर ने आशंका जताई कि भविष्य में भी अंबेडकर की मूर्तियों और उनसे जुड़े पार्कों को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की जा सकती है, और उन्होंने प्रदेशवासियों से सजग रहने की अपील की।

गौरतलब है कि अंबेडकर की मूर्तियों और दलित प्रतीकों को लेकर उत्तर प्रदेश में राजनीतिक तनाव का इतिहास रहा है, और यह मुद्दा चुनावी माहौल में विशेष रूप से संवेदनशील हो जाता है।

प्रमोशन में आरक्षण और जिलों के नाम का मुद्दा

राजभर ने प्रमोशन में आरक्षण के सवाल पर भी सपा को घेरा और पूछा कि जब दलितों को प्रमोशन में आरक्षण देने का प्रस्ताव आया था, तब इसका विरोध किसने किया था। इसके अलावा उन्होंने दलित महापुरुषों के नाम पर बनाए गए जिलों के नाम बदलने का मुद्दा भी उठाया, जिसे वे सपा की 'दलित-विरोधी मानसिकता' का प्रमाण मानते हैं।

पिछड़े-दलित मतदाताओं को संदेश

मंत्री ने दावा किया कि पिछड़ा और दलित समाज अब सपा की नीति और सोच को 'पहचान चुका है' और उसे अब गुमराह नहीं किया जा सकता। यह बयान ऐसे समय में आया है जब 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ दोनों प्रमुख दलों — भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी — की ओर से तेज होती दिख रही हैं। आरक्षण का मुद्दा उत्तर प्रदेश की जातीय राजनीति में हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाता आया है, और आने वाले महीनों में यह बहस और तीखी होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पहचान की लड़ाई है — और 2027 से पहले यह बयानबाज़ी तेज़ होती जाएगी।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनिल राजभर ने सपा पर आरक्षण के मुद्दे पर क्या आरोप लगाए?
UP मंत्री अनिल राजभर ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने प्रदेश में चार बार सरकार में रहते हुए राजभर, निषाद, मौर्य, विश्वकर्मा समेत पिछड़े समुदायों के आरक्षण अधिकारों को नुकसान पहुँचाया। उन्होंने कहा कि सपा अब 2027 चुनाव की दृष्टि से आरक्षण का मुद्दा उठा रही है, जो राजनीतिक अवसरवाद है।
अंबेडकर की मूर्तियों पर राजभर ने क्या कहा?
राजभर ने आरोप लगाया कि 2012 से 2017 के बीच सपा सरकार के कार्यकाल में अंबेडकर की मूर्तियों को नुकसान पहुँचाने की घटनाएँ हुईं और इसमें शामिल लोगों को तत्कालीन सरकार का संरक्षण प्राप्त था। उन्होंने भविष्य में भी ऐसी कोशिशों की आशंका जताई और जनता से सजग रहने की अपील की।
राजभर ने प्रमोशन में आरक्षण का मुद्दा क्यों उठाया?
अनिल राजभर ने सवाल किया कि जब दलितों को प्रमोशन में आरक्षण देने का प्रस्ताव आया था, तब उसका विरोध किसने किया था — इशारा सपा की ओर था। यह मुद्दा दलित कर्मचारियों की सरकारी सेवाओं में पदोन्नति को लेकर लंबे समय से विवादास्पद रहा है।
क्या इस बयान का 2027 UP चुनाव से कोई संबंध है?
राजभर ने स्वयं स्वीकार किया कि सपा 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए आरक्षण जैसे मुद्दे उठा रही है। उनका दावा है कि पिछड़ा और दलित समाज अब सपा की राजनीतिक मंशा को पहचान चुका है और उसे गुमराह नहीं किया जा सकता।
अनिल राजभर कौन हैं और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है?
अनिल राजभर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं और पिछड़े समुदाय — विशेषकर राजभर जाति — के प्रमुख राजनीतिक प्रतिनिधि माने जाते हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी के रूप में योगी आदित्यनाथ सरकार में शामिल हैं और OBC-दलित राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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