1 अक्टूबर 2026
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रुचि ग्लोबल बैंक फ्रॉड: ईडी ने इंदौर कोर्ट में 21 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर, ₹66 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला

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रुचि ग्लोबल बैंक फ्रॉड: ईडी ने इंदौर कोर्ट में 21 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर, ₹66 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला

सारांश

ईडी ने रुचि ग्लोबल लिमिटेड से जुड़े ₹66 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में इंदौर की पीएमएलए कोर्ट में 21 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। फर्जी एलसी, जाली दस्तावेज और शेल कंपनियों के नेटवर्क के ज़रिए पीएनबी, बीओबी और जेएंडके बैंक को नुकसान पहुँचाया गया।

मुख्य बातें

ईडी इंदौर ने 1 अक्टूबर 2026 को इंदौर पीएमएलए स्पेशल कोर्ट में 21 आरोपियों/संस्थाओं के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की।
रुचि ग्लोबल लिमिटेड (अब एग्रोट्रेड एंटरप्राइजेज लिमिटेड ) ने फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए ₹66 करोड़ की नॉन-फंड-बेस्ड क्रेडिट सुविधाएं धोखाधड़ी से हासिल कीं।
प्रभावित बैंकों में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) , बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) और जम्मू एंड कश्मीर बैंक शामिल हैं।
23 दिसंबर 2025 को सर्च ऑपरेशन में ₹23.50 लाख नकदी जब्त; 18 फरवरी 2026 को ₹5.13 करोड़ की संपत्ति अटैच।
अदालत ने प्री-कॉग्निजेंस हियरिंग के लिए सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया; ईडी की जांच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर सब-जोनल ऑफिस ने 1 अक्टूबर 2026 को इंदौर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में रुचि ग्लोबल लिमिटेड — जिसे अब एग्रोट्रेड एंटरप्राइजेज लिमिटेड के नाम से जाना जाता है — से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में 21 आरोपियों/संस्थाओं के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की। अदालत ने इस पर संज्ञान लेने से पहले की सुनवाई (प्री-कॉग्निजेंस हियरिंग) के लिए सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने सीबीआई, भोपाल द्वारा रुचि ग्लोबल लिमिटेड (आरजीएल) और उसके निदेशकों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत जांच शुरू की थी। उस एफआईआर में आरोप था कि कंसोर्टियम बैंकों को जानबूझकर गलत तरीके से नुकसान पहुँचाया गया।

गौरतलब है कि यह मामला कृषि-वस्तुओं के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंकों से ली गई नॉन-फंड-बेस्ड क्रेडिट सुविधाओं के दुरुपयोग से जुड़ा है — एक ऐसा ढाँचा जो भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में एलसी-आधारित धोखाधड़ी के बड़े पैटर्न से मेल खाता है।

धोखाधड़ी का तरीका

जांच में सामने आया कि रुचि ग्लोबल लिमिटेड ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) और जम्मू एंड कश्मीर बैंक (J&K Bank) सहित कंसोर्टियम बैंकों से अपनी सहयोगी कंपनियों के पक्ष में लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) के रूप में नॉन-फंड-बेस्ड क्रेडिट सुविधाएं धोखाधड़ी से हासिल कीं, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹66 करोड़ बताई गई है।

ये एलसी जाली दस्तावेजों — जैसे फर्जी बिल ऑफ एक्सचेंज और नकली लॉरी रसीद — के आधार पर कृषि-वस्तुओं की कथित खरीद के नाम पर खोले गए थे। नेगोशिएटिंग बैंकों के ज़रिए इन बिलों को डिस्काउंट कराने के बाद, अपराध से प्राप्त रकम को शेल कंपनियों और लेयरिंग संस्थाओं के जटिल नेटवर्क के माध्यम से तेज़ी से घुमाया गया। यह पूरी प्रक्रिया एक से तीन दिनों के भीतर पूरी की गई और रकम वापस आरजीएल के बैंक खातों में जमा कर दी गई।

तय तारीखों पर आरजीएल द्वारा भुगतान न किए जाने से एलसी का बोझ जारीकर्ता बैंकों पर आ पड़ा, जिससे कंसोर्टियम बैंकों को सीधा वित्तीय नुकसान हुआ।

ईडी की पिछली कार्रवाइयाँ

इस मामले में ईडी पहले भी कई कदम उठा चुकी है। 23 दिसंबर 2025 को पीएमएलए की धारा 17 के तहत चलाए गए सर्च ऑपरेशन में ₹23.50 लाख की बेहिसाब नकदी जब्त की गई और संबंधित बैंक खाते फ्रीज किए गए। इसके बाद 18 फरवरी 2026 को ₹5.13 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियों के खिलाफ प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया गया था।

आगे की जांच और स्थिति

ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जांच और कार्रवाई अभी जारी है। अदालत द्वारा प्री-कॉग्निजेंस नोटिस जारी होने के बाद अब यह देखना होगा कि आरोपी किस तरह अपना पक्ष रखते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ईडी देशभर में बड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों में सक्रियता से कार्रवाई तेज कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका असली महत्व उस पैटर्न में है जिसे यह उजागर करती है — फर्जी एलसी, जाली लॉरी रसीद और शेल कंपनियों का वही पुराना ढाँचा जो कई बड़े बैंक घोटालों में देखा गया है। सवाल यह है कि इतने वर्षों और इतने मामलों के बाद भी बैंकिंग व्यवस्था में एलसी-आधारित धोखाधड़ी की रोकथाम के तंत्र इतने कमज़ोर क्यों बने हुए हैं। ईडी की कार्रवाई देर से ही सही, पर निर्णायक दिखती है — लेकिन असली परीक्षा अदालत में सफल अभियोजन और बैंकों की वसूली होगी, जिसमें भारतीय न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति हमेशा से बड़ी चुनौती रही है।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रुचि ग्लोबल बैंक धोखाधड़ी मामला क्या है?
रुचि ग्लोबल लिमिटेड (अब एग्रोट्रेड एंटरप्राइजेज लिमिटेड) पर आरोप है कि उसने फर्जी बिल ऑफ एक्सचेंज और नकली लॉरी रसीद जैसे जाली दस्तावेजों के आधार पर पीएनबी, बीओबी और जेएंडके बैंक से करीब ₹66 करोड़ की नॉन-फंड-बेस्ड क्रेडिट सुविधाएं धोखाधड़ी से हासिल कीं। यह रकम शेल कंपनियों के नेटवर्क के ज़रिए घुमाई गई और बैंकों को नुकसान पहुँचाया गया।
ईडी ने इस मामले में अब तक क्या-क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने दिसंबर 2025 में सर्च ऑपरेशन में ₹23.50 लाख नकदी जब्त की और बैंक खाते फ्रीज किए। फरवरी 2026 में ₹5.13 करोड़ की अचल संपत्ति अटैच की गई। अब 1 अक्टूबर 2026 को इंदौर पीएमएलए कोर्ट में 21 आरोपियों के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर कर दी गई है।
इस मामले में कौन से बैंक प्रभावित हुए?
जांच के अनुसार, इस धोखाधड़ी में पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) और जम्मू एंड कश्मीर बैंक (J&K Bank) शामिल कंसोर्टियम बैंकों को नुकसान पहुँचाया गया। एलसी भुगतान न होने पर सारी देनदारी इन्हीं जारीकर्ता बैंकों पर आ गई।
प्री-कॉग्निजेंस हियरिंग नोटिस का क्या मतलब है?
प्री-कॉग्निजेंस हियरिंग का अर्थ है कि अदालत ने अभी आरोपों का औपचारिक संज्ञान नहीं लिया है, लेकिन आरोपियों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने के लिए नोटिस जारी किया है। इसके बाद अदालत तय करेगी कि मामले को आगे बढ़ाया जाए या नहीं।
इस मामले की जांच कहाँ से शुरू हुई थी?
ईडी ने यह जांच सीबीआई, भोपाल द्वारा रुचि ग्लोबल लिमिटेड और उसके निदेशकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर पीएमएलए, 2002 के तहत शुरू की थी। सीबीआई की प्राथमिकी में कंसोर्टियम बैंकों को जानबूझकर नुकसान पहुँचाने का आरोप था।
राष्ट्र प्रेस
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