कोलकाता: ईडी की तायल ग्रुप पर बड़ी छापेमारी, ₹820.86 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का मामला
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 30 सितंबर 2026 को कोलकाता में तायल ग्रुप से जुड़े 12 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत दर्ज मामले में की जा रही है, जिसमें बैंक धोखाधड़ी के साथ-साथ इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के प्रावधानों के कथित दुरुपयोग के ज़रिए पीएमएलए की आगे की जाँच को बाधित करने के प्रयास का आरोप है। दोनों मामलों में अपराध से अर्जित कुल कमाई ₹820.86 करोड़ आँकी गई है।
दो ईसीआईआर, दो बड़े बैंक घोटाले
ईडी ने इस मामले में कोलकाता में दो अलग-अलग प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की हैं। पहली ईसीआईआर यूको बैंक धोखाधड़ी से संबंधित है, जिसमें के. लाइफस्टाइल एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड और अन्य कंपनियों पर ₹296.25 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है।
दूसरी ईसीआईआर कंसोर्टियम बैंक धोखाधड़ी से जुड़ी है, जिसमें बैंक ऑफ इंडिया अग्रणी बैंक था। इस मामले में एक्टिफ कॉर्पोरेशन लिमिटेड, जयभारत टेक्सटाइल्स एंड रियल एस्टेट लिमिटेड और अन्य पर ₹524.61 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है।
कैसे की गई बैंकों के साथ ठगी
जाँच के अनुसार, तायल ग्रुप की कंपनियों ने उत्पादन क्षमता और मशीनरी के बारे में झूठे बयान देकर तथा स्टॉक स्टेटमेंट में हेराफेरी कर बैंकों को गुमराह किया। इसके अलावा, गिरवी रखी गई मशीनरी को बिना अनुमति बेच दिया गया।
बैंकों से प्राप्त धनराशि को प्रमोटर-नियंत्रित शेल कंपनियों के माध्यम से घुमाकर रियल एस्टेट संपत्तियों में लगाया गया। इनमें नागपुर का प्रतिष्ठित 'एम्प्रेस मॉल' भी शामिल है, जिसे जाँच के दौरान ईडी ने पहले ही जब्त कर लिया है।
आईबीसी का कथित दुरुपयोग और एम्प्रेस मॉल की जब्ती
8 मई 2019 को एम्प्रेस मॉल की अटैचमेंट के तुरंत बाद, तायल ग्रुप से जुड़ी कथित वित्तीय क्रेडिटर कंपनियों ने आईबीसी की धारा 7 के तहत कॉर्पोरेट गारंटर केएसएल एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ दिवाला कार्यवाही (सीआईआरपी) शुरू कर दी। जाँच में यह सामने आया है कि इन क्रेडिटर कंपनियों के कम से कम आठ निदेशक, जुड़ी हुई कंपनियों के नेटवर्क के माध्यम से केएसएल के पाँच निदेशकों से निदेशकता के स्तर पर जुड़े हुए हैं।
जाँचकर्ताओं के अनुसार, कथित कर्ज महज एक कागजी लेन-देन था, जो किसी अन्य उद्देश्य की पूर्ति के लिए तैयार किया गया था — यानी पीएमएलए के तहत हुई संपत्ति जब्ती को कानूनी रूप से पलटने की कोशिश।
रेजोल्यूशन प्रोफेशनल्स पर कार्रवाई
रेजोल्यूशन प्रोफेशनल्स (आरपी) पर भी आरोप है कि उन्होंने उचित सत्यापन किए बिना प्रमोटर से जुड़ी शेल कंपनियों के फर्जी और बढ़े-चढ़े ब्याज दावों को स्वीकार कर लिया। इससे क्रेडिटर्स की समिति (सीओसी) में इन दिखावटी क्रेडिटर्स को बहुमत वोटिंग अधिकार मिल गए और असल सुरक्षित बैंकों को अल्पमत में धकेल दिया गया।
इसके अतिरिक्त, आरपी ने पीएमएलए के तहत हुई जब्ती को रद्द कराने के लिए अदालतों में आवेदन दाखिल करते हुए ईडी द्वारा एम्प्रेस मॉल के भौतिक कब्जे की जानकारी छिपाई। इस आचरण की कड़ी आलोचना के बाद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने उन्हें हटा दिया।
एनसीएलटी ने 11 नवंबर 2025 को आरपी विनोद कुमार पुखराज अंबावत (एक्टिव कॉर्पोरेशन लिमिटेड) पर ₹50,000 का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया। वहीं, एक अन्य आरपी नरेन सेठ (जयभारत टेक्सटाइल्स एंड रियल एस्टेट लिमिटेड) को भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (आईआईबीआई) की अनुशासनात्मक समिति ने कदाचार के आरोप में निलंबित कर दिया। आरपी सीए किरण चिनुभाई शाह (केएसएल एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड) पर भी दावों की पुष्टि न करने और संबंधित पक्षों को बाहर न रखने का आरोप है।
आगे क्या होगा
30 सितंबर को जारी छापेमारी के बाद ईडी द्वारा नए दस्तावेज़, डिजिटल साक्ष्य और संपत्ति-संबंधी जानकारी जुटाए जाने की उम्मीद है। यह मामला इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि यह दर्शाता है कि किस तरह दिवाला कानून की प्रक्रियाओं का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग जाँच को विफल करने के लिए कथित तौर पर किया जा सकता है — और नियामक इस कमज़ोरी को कैसे संबोधित करते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।