30 सितंबर 2026
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ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III को कैबिनेट मंजूरी: ₹1.86 लाख करोड़ की योजना, 2035 तक 900 GW का लक्ष्य

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ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III को कैबिनेट मंजूरी: ₹1.86 लाख करोड़ की योजना, 2035 तक 900 GW का लक्ष्य

सारांश

कैबिनेट ने ₹1.86 लाख करोड़ की GEC-III योजना को हरी झंडी दी — 135 GW नवीकरणीय ऊर्जा निकासी और 50 GWh बैटरी स्टोरेज के साथ। 2014 की 249 GW क्षमता से 552 GW तक पहुँचे भारत को अब 2035 का 900 GW लक्ष्य पाने के लिए यह ढाँचागत छलांग जरूरी थी।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 30 सितंबर 2026 को ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III (GEC-III) को मंजूरी दी।
योजना की कुल लागत ₹1.86 लाख करोड़ से अधिक; केंद्रीय वित्तीय सहायता ₹54,082 करोड़ ।
135 GW नवीकरणीय ऊर्जा निकासी और 50 GWh बैटरी भंडारण क्षमता विकसित होगी।
जुलाई 2026 तक भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 552 GW ; गैर-जीवाश्म हिस्सेदारी 54% से अधिक ।
लक्ष्य: 2035 तक 900 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता; परियोजना वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरी होगी।
2025 में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर वृद्धि बाजार बना — 37 GW से अधिक नई क्षमता जोड़ी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III (GEC-III) योजना को मंजूरी दे दी, जो देश को 2035 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की ओर ले जाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। ₹1.86 लाख करोड़ से अधिक की इस परियोजना के तहत 135 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी सुनिश्चित की जाएगी और 50 गीगावाट-घंटे (GWh) की बैटरी स्टोरेज क्षमता विकसित की जाएगी।

PM मोदी की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस फैसले को साझा करते हुए लिखा, 'स्वच्छ बिजली, मजबूत ग्रिड और अधिक अवसर।' मोदी ने कहा कि यह फैसला भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को और तेज करेगा तथा विनिर्माण, निर्माण और ऊर्जा भंडारण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर पैदा करेगा।

एक अन्य एक्स पोस्ट में प्रधानमंत्री ने किसानों के संदर्भ में कहा, 'देशभर के किसानों के हितों की रक्षा के साथ ही उनकी आय में बढ़ोतरी के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं।' उन्होंने बताया कि सरकार ने 2027-28 के मार्केटिंग सीजन के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि को भी मंजूरी दी है।

योजना का वित्तीय ढाँचा

GEC-III की कुल लागत ₹1.86 लाख करोड़ से अधिक आँकी गई है। इसमें से ₹1.36 लाख करोड़ राज्यों के भीतर ट्रांसमिशन सिस्टम विकसित करने पर और ₹50,000 करोड़ की लागत से 50 GWh की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) स्थापित करने पर खर्च किए जाएंगे। सरकार ने इस योजना के लिए ₹54,082 करोड़ की केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान किया है। योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

भारत की ऊर्जा क्षमता: मौजूदा तस्वीर

भारत का ऊर्जा क्षेत्र पिछले एक दशक में तेजी से विस्तार कर चुका है। जुलाई 2026 तक देश की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 552 गीगावाट तक पहुँच चुकी है, जबकि 2014 में यह केवल 249 गीगावाट थी। इसमें 300.50 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता शामिल है, जो कुल स्थापित बिजली क्षमता का 54 प्रतिशत से अधिक है।

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय छलांग लगाई है। जुलाई 2026 तक स्थापित सौर क्षमता 164.59 गीगावाट हो चुकी है, जो 2014 में मात्र 2.8 गीगावाट थी। गौरतलब है कि 2025 में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा वृद्धि बाजार बना — उस वर्ष देश ने 37 गीगावाट से अधिक नई सौर क्षमता जोड़ी, जबकि अमेरिका ने लगभग 34 गीगावाट की वृद्धि दर्ज की। वर्तमान में भारत नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित क्षमता में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है।

BESS की भूमिका और ग्रिड चुनौतियाँ

योजना के तहत बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादकों या अन्य महत्वपूर्ण ग्रिड स्थलों पर स्थापित की जाएंगी। यह ऐसे समय में आया है जब सौर और पवन ऊर्जा की अनियमित उपलब्धता, ग्रिड भीड़भाड़ और पीक आवर्स की बढ़ती माँग भारत के ऊर्जा प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौतियाँ पेश कर रही हैं। BESS इन चुनौतियों का तकनीकी समाधान प्रस्तुत करती है।

क्या होगा आगे

GEC-III के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ मिलकर निभाई जाएगी। यह योजना 900 GW के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर एक संरचनात्मक आधार तैयार करती है — हालाँकि 2035 तक इस लक्ष्य को पाने के लिए मौजूदा 300.50 GW से लगभग तीन गुना विस्तार जरूरी होगा, जो क्रियान्वयन की रफ्तार पर निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति में है। 300.50 GW से 900 GW तक पहुँचने के लिए 2035 तक लगभग तीन गुना विस्तार चाहिए — और भारत के बड़े ऊर्जा प्रकल्पों का इतिहास बताता है कि समय-सीमा अक्सर खिसकती है। BESS का समावेश तकनीकी रूप से सही दिशा है, पर 50 GWh की भंडारण क्षमता 135 GW की परिवर्तनशील उत्पादन क्षमता के सापेक्ष सीमित है। ₹54,082 करोड़ की केंद्रीय सहायता राज्यों की भागीदारी और वितरण कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य पर टिकी है — जो अभी भी बड़ी बाधा बनी हुई है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III (GEC-III) क्या है?
GEC-III केंद्र सरकार की एक योजना है जिसे 30 सितंबर 2026 को कैबिनेट ने मंजूरी दी। इसका उद्देश्य देशभर में 135 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के प्रसारण और एकीकरण के लिए जरूरी बुनियादी ढाँचा विकसित करना और 50 GWh बैटरी स्टोरेज क्षमता स्थापित करना है।
GEC-III योजना की कुल लागत कितनी है और सरकार कितनी मदद देगी?
योजना की कुल लागत ₹1.86 लाख करोड़ से अधिक है। इसमें ₹1.36 लाख करोड़ राज्यों के ट्रांसमिशन सिस्टम पर और ₹50,000 करोड़ BESS पर खर्च होंगे। सरकार ने ₹54,082 करोड़ की केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान किया है।
भारत का 2035 तक 900 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा का लक्ष्य कितना चुनौतीपूर्ण है?
जुलाई 2026 तक भारत की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 300.50 GW है। 2035 तक 900 GW तक पहुँचने के लिए लगभग तीन गुना विस्तार जरूरी होगा। GEC-III इस लक्ष्य की दिशा में ग्रिड बुनियादी ढाँचे की बाधा दूर करने की कोशिश है।
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) को इस योजना में क्यों शामिल किया गया है?
सौर और पवन ऊर्जा की आपूर्ति अनियमित होती है, जिससे ग्रिड पर दबाव और पीक आवर्स में माँग-आपूर्ति का असंतुलन बनता है। 50 GWh की BESS इस अनिश्चितता को बफर करेगी, ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करेगी और भीड़भाड़ कम करेगी।
GEC-III कब तक पूरा होगा और इससे रोज़गार पर क्या असर होगा?
योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के अनुसार यह योजना विनिर्माण, निर्माण और ऊर्जा भंडारण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर पैदा करेगी, हालाँकि सटीक संख्या अभी घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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