भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 300 GW पार, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन बोले — ग्लोबल साउथ के लिए आदर्श
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 5 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की उल्लेखनीय उपलब्धियाँ न केवल राष्ट्रीय गौरव का विषय हैं, बल्कि ये वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के विकासशील देशों के लिए एक ठोस और अनुकरणीय मॉडल भी प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने यह बात भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 के समापन सत्र में कही, जहाँ उन्होंने भारत की हरित ऊर्जा यात्रा के विभिन्न पड़ावों को विस्तार से रेखांकित किया।
300 गीगावाट का मील का पत्थर
राधाकृष्णन ने बताया कि भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित बिजली क्षमता 300 गीगावाट के आँकड़े को पार कर चुकी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत ने 2025 में ही अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल करने का लक्ष्य पूरा कर लिया — जो निर्धारित समयसीमा से पाँच वर्ष पहले की उपलब्धि है। यह ऐसे समय में आया है जब विश्व के कई विकसित देश भी अपने ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
सौर ऊर्जा की बात करें तो पिछले एक दशक में भारत की सौर क्षमता 3 गीगावाट से भी कम के स्तर से बढ़कर 170 गीगावाट से अधिक हो गई है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि जो ऊर्जा कभी कोयला-आधारित बिजली की तुलना में कई गुना महँगी मानी जाती थी, वह आज भारत में सबसे किफायती ऊर्जा स्रोतों में गिनी जाती है।
आम नागरिक और किसान: ऊर्जा क्रांति की धुरी
उपराष्ट्रपति ने बताया कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत अब तक 65 लाख से अधिक परिवार सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं और उन्हें सस्ती व स्वच्छ बिजली मिल रही है। इसी तरह, प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) के तहत लगभग 30 लाख किसानों को लाभ पहुँचा है।
राधाकृष्णन ने कहा कि सौर पंप किसानों के डीजल खर्च में कमी लाने के साथ-साथ उन्हें अतिरिक्त आमदनी का रास्ता भी दे रहे हैं। उनके शब्दों में, किसान अब केवल 'अन्नदाता' नहीं, बल्कि 'ऊर्जादाता' भी बन रहे हैं।
दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों तक बिजली
प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने बताया कि इन पहलों के ज़रिये उन सुदूर जनजातीय क्षेत्रों तक बिजली पहुँचाई जा रही है जहाँ परंपरागत विद्युत ग्रिड बिछाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था। उन्होंने ज़ोर दिया, 'बिजली तक पहुँच लोगों के जीवन में व्यापक बदलाव लाती है — इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोज़गार के अवसरों का विस्तार होता है।'
भविष्य: हाइड्रोजन और तकनीकी नवाचार
हाइड्रोजन ऊर्जा के उभरते क्षेत्र का जिक्र करते हुए राधाकृष्णन ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की प्रगति के कारण हाइड्रोजन ऊर्जा अधिक सुलभ और किफायती होगी। उन्होंने उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता पर भी बल देते हुए कहा, '2040 की तकनीकें आज की प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप्स और नवाचार केंद्रों से निकलेंगी।'
जन आंदोलन के रूप में हरित ऊर्जा
उपराष्ट्रपति ने अक्षय ऊर्जा संक्रमण को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप एक जन आंदोलन बताया। उन्होंने कहा कि यह सफर केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित नहीं रह सकता — इसमें शिक्षकों, विद्यार्थियों, उद्यमियों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। उनके अनुसार, यह सामूहिक प्रयास ही 'विकसित भारत' के लक्ष्य की नींव बनेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए नए आर्थिक अवसरों के द्वार खोलेगा।