2 नवंबर 2026
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500 गीगावाट लक्ष्य की ओर भारत: PM मोदी बोले — स्वच्छ ऊर्जा ही आर्थिक सुरक्षा की असली नींव

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500 गीगावाट लक्ष्य की ओर भारत: PM मोदी बोले — स्वच्छ ऊर्जा ही आर्थिक सुरक्षा की असली नींव

सारांश

300 गीगावाट का पड़ाव पार, 500 का संकल्प बाकी — मोदी ने नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन में भारत की 12 वर्षों की हरित यात्रा का लेखा-जोखा रखा। 65 लाख घर सौर ऊर्जा से जुड़े, किसानों को सालाना ₹1 लाख की बचत, और ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत — यह सिर्फ नीति नहीं, एक बड़े ऊर्जा बदलाव की तस्वीर है।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन को संबोधित किया।
भारत ने 300 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य पार किया; 2030 तक 500 गीगावाट का संकल्प।
पेरिस समझौते के तहत 50% गैर-जीवाश्म बिजली का लक्ष्य 2025 में ही — तय समय से 5 वर्ष पहले — हासिल।
पीएम सूर्यघर योजना से 65 लाख घर जुड़े; बिजली बिल 76% तक कम; 44,000+ सरकारी भवन सौर ऊर्जा से जुड़े, ₹700 करोड़ सालाना बचत।
सोलर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता 2 GW से बढ़कर 200 GW+ ; नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य।
कुसुम योजना से 30 लाख+ किसानों को सौर सिंचाई; अनुमानित सालाना बचत ₹1 लाख प्रति किसान ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन और एक्सपो को संबोधित करते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा सीधे-सीधे आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है और स्वच्छ ऊर्जा में निवेश ने भारत को वैश्विक संकटों के बीच स्थिरता प्रदान की। उन्होंने घोषणा की कि भारत 300 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य पार कर चुका है और 2030 तक 500 गीगावाट के संकल्प की दिशा में तेज़ी से काम जारी है।

शिखर सम्मेलन का दायरा और संदर्भ

इस वर्ष के सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय सौर ऊर्जा की नौवीं असेम्बली और ग्रीन हाइड्रोजन पर एक विशेष सम्मेलन भी एक साथ आयोजित हो रहा है, जिससे इस आयोजन का वैश्विक महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी से लेकर पश्चिम एशिया के संकटों तक, वैश्विक अर्थव्यवस्था ने अभूतपूर्व झटके सहे — लेकिन स्वच्छ ऊर्जा में किए गए निवेश ने भारत को उन झटकों से उबरने में मदद की।

उन्होंने कहा कि यदि भारत जीवाश्म ईंधन पर निर्भर रहता, तो वैश्विक ऊर्जा व्यवधानों का असर 140 करोड़ भारतीयों पर कहीं अधिक गहरा होता। यह ऐसे समय में आया है जब तेल-निर्भर देश ऊर्जा मूल्यों में उतार-चढ़ाव से आर्थिक अस्थिरता झेल रहे हैं।

मुख्य उपलब्धियाँ और लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने बताया कि पेरिस समझौते के तहत भारत ने अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने का वादा किया था। यह लक्ष्य 2025 में ही — निर्धारित समय से 5 वर्ष पहले — हासिल कर लिया गया। आज भारत सौर और नवीकरणीय ऊर्जा के मामले में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है।

मोदी ने यह भी बताया कि सोलर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता एक दशक पहले केवल 2 गीगावाट थी, जो अब 200 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। सोलर सेल विनिर्माण क्षमता भी लगभग 40 गीगावाट तक पहुँच गई है — जो 'मेक इन इंडिया' की ठोस सफलता का प्रमाण है।

पीएम सूर्यघर योजना का असर

फरवरी 2024 में शुरू हुई पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य है। बीते 24-25 महीनों में 65 लाख से अधिक घर इस अभियान से जुड़ चुके हैं और हर छह दिन में एक लाख नए घर इससे जुड़ रहे हैं। एक अध्ययन के अनुसार, इन परिवारों के बिजली बिल 76 प्रतिशत तक कम हो गए हैं, जबकि कई घर बिजली बेचकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं।

किसानों के लिए कुसुम योजना के अंतर्गत 30 लाख से अधिक किसानों को सौर ऊर्जा से सिंचाई की सुविधा मिली है। अनुमान के अनुसार, इन किसानों को सालाना ₹1 लाख तक की बचत हो रही है। इसके अलावा, 44,000 से अधिक सरकारी भवन सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं, जिससे प्रतिवर्ष ₹700 करोड़ की बचत हो रही है।

ग्रीन हाइड्रोजन और भविष्य की योजनाएँ

मोदी ने बताया कि नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत इस दशक के अंत तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। भारत ने हाल ही में अपनी पहली ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन शुरू की है। स्वच्छ ऊर्जा के संचरण के लिए देश भर में ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं ताकि सौर-पवन ऊर्जा उन क्षेत्रों तक भी पहुँचे जहाँ उत्पादन सीमित है।

उन्होंने स्टार्टअप्स, IIT और उद्यमियों से आग्रह किया कि वे ऐसे मॉडल विकसित करें जिनसे एक परिवार की अधिकतम ज़रूरतें सौर ऊर्जा से पूरी हो सकें — खाना पकाने से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग तक। उन्होंने पीएम सूर्य सरोवर योजना का भी उल्लेख किया, जिसके तहत तालाबों और झीलों के ऊपर सोलर पैनल लगाकर भूमि की बचत करते हुए बिजली उत्पादन किया जा रहा है।

मोदी ने कहा कि आने वाले 10 से 11 वर्षों में 500 गीगावाट नई गैर-जीवाश्म ऊर्जा जोड़ने का लक्ष्य कठिन ज़रूर है, लेकिन देश की क्षमता पर उन्हें पूरा भरोसा है। स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में रोज़गार सृजन का भी उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे सौर क्षमता बढ़ेगी, रोज़गार के अवसर भी बढ़ते जाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पिछले 12 वर्षों की कुल स्थापित क्षमता से कहीं अधिक महत्वाकांक्षी है। ग्रिड स्टोरेज, भूमि अधिग्रहण और वित्तपोषण की बाधाएँ — जिनका सम्मेलन में उल्लेख नहीं हुआ — इस लक्ष्य की राह में असली परीक्षा हैं। 'अन्नदाता से ऊर्जादाता' का विज़न आकर्षक है, लेकिन इसे ज़मीन पर उतारने के लिए ग्रामीण ग्रिड कनेक्टिविटी और नेट-मीटरिंग नीतियों का विस्तार उतना ही ज़रूरी है जितना सोलर पैनल लगाना।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य क्या है?
भारत ने COP-26 (2021) शिखर सम्मेलन में 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता हासिल करने का संकल्प लिया था। अब तक 300 गीगावाट का लक्ष्य पूरा हो चुका है और अगले 10-11 वर्षों में 500 गीगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़ने का प्रयास है।
पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का अब तक क्या असर हुआ है?
फरवरी 2024 में शुरू इस योजना के तहत 65 लाख से अधिक घर रूफटॉप सोलर से जुड़ चुके हैं। एक अध्ययन के अनुसार इन घरों के बिजली बिल 76% तक कम हुए हैं और कई परिवार अतिरिक्त बिजली बेचकर आय भी अर्जित कर रहे हैं। हर छह दिन में एक लाख नए घर इस योजना से जुड़ रहे हैं।
भारत का ग्रीन हाइड्रोजन मिशन क्या है और इसका लक्ष्य क्या है?
नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत इस दशक के अंत तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। भारत ने हाल ही में अपनी पहली ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन भी शुरू की है और परिवहन तंत्र को ग्रीन हाइड्रोजन से जोड़ने पर काम जारी है।
कुसुम योजना से किसानों को क्या फायदा हो रहा है?
कुसुम योजना के तहत 30 लाख से अधिक किसानों को सौर ऊर्जा से सिंचाई की सुविधा मिली है। अनुमान के अनुसार, इन किसानों को प्रति वर्ष ₹1 लाख तक की बचत हो रही है। यह योजना 'अन्नदाता को ऊर्जादाता' बनाने के मोदी के विज़न का हिस्सा है।
भारत की सोलर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता में कितना बदलाव आया है?
एक दशक पहले भारत की सोलर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता मात्र 2 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर 200 गीगावाट से अधिक हो गई है। सोलर सेल विनिर्माण क्षमता भी लगभग 40 गीगावाट तक पहुँच चुकी है, जो 'मेक इन इंडिया' पहल की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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