2 नवंबर 2026
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कुमारस्वामी का बेंगलुरु पुलिस आयुक्त पर बड़ा आरोप: स्टिंग मामले में जनता को गुमराह किया जा रहा

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कुमारस्वामी का बेंगलुरु पुलिस आयुक्त पर बड़ा आरोप: स्टिंग मामले में जनता को गुमराह किया जा रहा

सारांश

केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने बेंगलुरु पुलिस आयुक्त पर स्टिंग मामले में 'चुनिंदा जानकारी' सार्वजनिक कर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया। साथ ही सवाल उठाया कि सीएम शिवकुमार व उनके भाई सुरेश को जांच से बाहर क्यों रखा गया है — कर्नाटक में कांग्रेस-जेडी(एस) टकराव नई ऊँचाई पर।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 2 नवंबर 2026 को बेंगलुरु पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।
पुलिस आयुक्त ने कहा था कि सीडीआर साक्ष्य के अनुसार स्टिंग मामले में एक मोबाइल फोन का आदान-प्रदान कुमारस्वामी के आवास पर हुआ था।
कुमारस्वामी ने माँग की कि 5-6 अगस्त 2023 के वीडियो विवाद में सीएम डीके शिवकुमार और डीके सुरेश की भूमिका की भी जांच हो।
उन्होंने गृह मंत्री प्रियंक खड़गे पर केपीएससी भर्ती मामले में 26 एईई की अवैध नियुक्ति का आरोप लगाया।
कांग्रेस और जेडी(एस) के बीच स्टिंग मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है।

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन मामले की जांच से संबंधित जानकारी चुनिंदा तरीके से सार्वजनिक कर जनता को भ्रमित किया जा रहा है। जनता दल (सेक्युलर) [जेडी(एस)] मुख्यालय जेपी भवन में मीडिया से बातचीत के दौरान कुमारस्वामी ने यह भी सवाल उठाया कि जांच एजेंसियाँ मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनके भाई डीके सुरेश की कथित भूमिका की पड़ताल क्यों नहीं कर रही हैं।

पुलिस आयुक्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सवाल

कुमारस्वामी ने तर्क दिया कि रविवार को अवकाश के दिन बेंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने जल्दबाजी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चल रही जांच से संबंधित जानकारी सार्वजनिक की — यह असामान्य है। आयुक्त ने कहा था कि जांच के दौरान मिले साक्ष्य संकेत देते हैं कि कथित स्टिंग मामले में एक मोबाइल फोन का आदान-प्रदान कुमारस्वामी के आवास पर हुआ था।

इस पर कुमारस्वामी ने कहा, 'पुलिस आयुक्त को इतनी जल्दी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की क्या जरूरत थी? उन्होंने मीडिया में कई जानकारियाँ साझा कीं, खासकर मेरे दिल्ली स्थित आवास का जिक्र किया। विशेष शाखा सीसीबी द्वारा पूछताछ किए जा रहे व्यक्ति ने कथित तौर पर वह मोबाइल फोन हमारे सोशल मीडिया कार्यों को संभालने वाले एक व्यक्ति को दिया था। इस संदर्भ में आयुक्त ने कहा कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) से पता चलता है कि वह व्यक्ति मेरे आवास के पास मौजूद था।'

शिवकुमार और सुरेश पर प्रतिप्रश्न

कुमारस्वामी ने 5 और 6 अगस्त 2023 का हवाला देते हुए पुलिस से सवाल किया कि प्रज्वल रेवन्ना मामले से जुड़े एक पुराने वीडियो विवाद में 'कार्तिक' नामक व्यक्ति की भूमिका की जाँच क्यों नहीं की जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्तिक ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनके भाई डीके सुरेश के साथ मिलकर वीडियो बनाए थे, जो 'पूरी दुनिया में प्रसारित' हुए।

उन्होंने कहा, 'यदि सीडीआर के आधार पर मेरा नाम लिया जा सकता है, तो अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। सीएम शिवकुमार को इन घटनाक्रमों पर जवाब देना चाहिए।' गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब जेडी(एस) ने जांच में 'दोहरे मानदंड' का आरोप लगाया है।

सीसीबी की छापेमारी और केंद्रीय एजेंसियों का विवाद

कुमारस्वामी ने एक कन्नड़ समाचार चैनल और उसके मालिक के ठिकानों पर सीसीबी की छापेमारी को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई जनता में यह संदेश देने की कोशिश है कि उनका नाम जांच में आने के कारण दबाव बनाया जा रहा है।

राज्य के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने आरोप लगाया था कि कुमारस्वामी कांग्रेस नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करवाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव बना रहे हैं। इस पर कुमारस्वामी ने स्पष्ट किया, 'मुझे प्रधानमंत्री या गृह मंत्री से संरक्षण मांगने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार का मुकाबला करने की क्षमता मुझमें खुद है।'

केपीएससी घोटाले पर जवाबी हमला

कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) भर्ती मामले में हुई कथित अनियमितताओं के लिए स्वयं गृह मंत्री प्रियंक खड़गे जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि जब खड़गे आरडीपीआर मंत्री थे, तब उन्होंने 26 सहायक कार्यकारी अभियंताओं (एईई) की नियुक्ति को लेकर कथित तौर पर अनियमित और अवैध फैसला लिया था।

यह ऐसे समय में आया है जब स्टिंग ऑपरेशन मामले की जांच को लेकर कांग्रेस और जेडी(एस) के बीच राजनीतिक टकराव तेज होता जा रहा है — दोनों दल जांच के तरीके और नेताओं की कथित भूमिका को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

आगे क्या होगा

यह देखना अहम होगा कि बेंगलुरु पुलिस आयुक्त इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या जांच एजेंसियाँ शिवकुमार व सुरेश से जुड़े सवालों पर कोई स्पष्टीकरण जारी करती हैं। कर्नाटक की राजनीति में यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीति ही निकलती है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुमारस्वामी ने बेंगलुरु पुलिस आयुक्त पर क्या आरोप लगाए हैं?
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने स्टिंग ऑपरेशन मामले की जांच से संबंधित जानकारी चुनिंदा तरीके से सार्वजनिक कर जनता को भ्रमित किया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि रविवार को अवकाश के दिन इतनी जल्दबाजी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की क्या जरूरत थी।
स्टिंग ऑपरेशन मामले में पुलिस ने कुमारस्वामी के आवास का जिक्र क्यों किया?
पुलिस आयुक्त ने कहा था कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) से संकेत मिलता है कि जिस व्यक्ति से पूछताछ हो रही थी वह कुमारस्वामी के दिल्ली आवास के पास मौजूद था और उसने कथित मोबाइल फोन उनके सोशल मीडिया टीम के एक सदस्य को दिया था। कुमारस्वामी ने इसे भ्रामक बताया है।
कुमारस्वामी ने सीएम डीके शिवकुमार से क्या जवाब माँगा है?
कुमारस्वामी ने माँग की कि 5-6 अगस्त 2023 को 'कार्तिक' नामक व्यक्ति की लोकेशन की जाँच हो और यह पता लगाया जाए कि क्या वह शिवकुमार के आवास पर था। उनका आरोप है कि प्रज्वल रेवन्ना मामले में वायरल हुए वीडियो कार्तिक ने शिवकुमार और उनके भाई डीके सुरेश के साथ मिलकर बनाए थे।
केपीएससी घोटाले में प्रियंक खड़गे की भूमिका पर क्या आरोप हैं?
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि जब प्रियंक खड़गे आरडीपीआर मंत्री थे, तब उन्होंने 26 सहायक कार्यकारी अभियंताओं (एईई) की नियुक्ति में कथित तौर पर अनियमित और अवैध फैसला लिया। उन्होंने माँग की कि केपीएससी घोटाले में भी खड़गे की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
इस विवाद का कर्नाटक की राजनीति पर क्या असर होगा?
स्टिंग ऑपरेशन मामले को लेकर कांग्रेस और जेडी(एस) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर कर्नाटक की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को और तीखा बना सकता है। जांच की दिशा और पारदर्शिता पर सवाल उठने से राज्य सरकार पर दबाव बढ़ेगा, और आने वाले दिनों में यह मामला विधानसभा में भी गूँज सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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