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स्टिंग ऑपरेशन विवाद: कुमारस्वामी की कर्नाटक पुलिस को खुली चुनौती, बोले — 'जांच के लिए दरवाजे खुले हैं'

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स्टिंग ऑपरेशन विवाद: कुमारस्वामी की कर्नाटक पुलिस को खुली चुनौती, बोले — 'जांच के लिए दरवाजे खुले हैं'

सारांश

कुमारस्वामी ने सिद्धारमैया से जुड़े स्टिंग ऑपरेशन मामले में कर्नाटक पुलिस को खुली चुनौती दी — 'दरवाजे खुले हैं, जांच करो।' साथ ही CM शिवकुमार और बेंगलुरु पुलिस आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाए। कर्नाटक की राजनीति में एक नया और तीखा मोर्चा खुल गया है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 2 नवंबर 2026 को कर्नाटक पुलिस को स्टिंग ऑपरेशन मामले में पूछताछ की खुली चुनौती दी।
उन्होंने जांच में सामने आए रितेश पांडे को नहीं जानने की बात कही; कहा उनके कैंप कार्यालय में सैकड़ों लोग आते हैं।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर आरोप — पुलिस पर दबाव डालकर उनकी प्रतिष्ठा धूमिल करने की कोशिश।
बेंगलुरु पुलिस आयुक्त के बयान को सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों का उल्लंघन बताया; अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी।
गृह मंत्री प्रियांक खड़गे के 'निर्णायक सबूत' वाले दावे पर पलटवार — प्रज्वल रेवन्ना के पूर्व ड्राइवर से जुड़े सवाल उठाए।

केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में कर्नाटक पुलिस को खुली चुनौती दी कि वे सिद्धारमैया से जुड़े स्टिंग ऑपरेशन मामले में उनसे पूछताछ करें — और साफ कहा कि जांच के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार उनकी प्रतिष्ठा को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने के लिए जांच का दुरुपयोग कर रही है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या बोले कुमारस्वामी

जेडी(एस) मुख्यालय जेपी भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुमारस्वामी ने कहा, 'वे मुझे जांच के लिए क्यों बुलाएंगे? मैंने क्या किया है? क्या इसलिए कि मैंने इन सभी मामलों का खुलासा किया है?' उन्होंने कहा कि आरोपी ने एक मोबाइल फोन खरीदा और कथित तौर पर उनके आवास के पास उसे सौंप दिया — लेकिन इससे उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध साबित नहीं होता।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच में सामने आए रितेश पांडे नामक व्यक्ति को वे नहीं जानते। उनके अनुसार, उनके आवास और कैंप कार्यालय में सैकड़ों लोग प्रतिदिन सहायता के लिए आते-जाते हैं।

पुलिस और अधिकारियों पर आरोप

कुमारस्वामी ने पुलिस महानिदेशक और महानिरीक्षक एमए सलीम को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि जांच अधिकारियों को राजनीतिक दबाव में आए बिना ईमानदारी से जांच करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उनकी छवि खराब करने के लिए पुलिस पर दबाव डाला है।

उन्होंने बेंगलुरु पुलिस आयुक्त के उस बयान को भी गैरकानूनी करार दिया जिसमें उनके आवास को इस मामले से जोड़ा गया था। उनका कहना था कि यह बयान चल रही जांच के दौरान सूचना लीक करने के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है। उन्होंने संकेत दिया कि वे संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर सकते हैं।

गृह मंत्री के दावे पर पलटवार

गृह मंत्री प्रियांक खड़गे के इस दावे पर कि जांचकर्ताओं को स्टिंग ऑपरेशन मामले में निर्णायक सबूत मिले हैं, कुमारस्वामी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि खड़गे को पहले मुख्यमंत्री शिवकुमार के आवास पर प्रज्वल रेवन्ना के पूर्व ड्राइवर की कथित उपस्थिति से संबंधित सबूतों के बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए।

दो बार के मुख्यमंत्री की सफाई

कुमारस्वामी ने अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा, 'मैं दो बार मुख्यमंत्री रह चुका हूं। मैंने कभी किसी अधिकारी को कोई गैरकानूनी काम करने के लिए नहीं कहा। मेरे परिवार ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के पद देखे हैं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने सुरक्षा भी नहीं रखी है और वे किसी भी जांच दल को अपने घर भेजने की खुला आमंत्रण दे रहे हैं।

आगे क्या होगा

यह विवाद कर्नाटक की राजनीति में एक नया मोर्चा खोल रहा है, जहाँ पहले से ही सिद्धारमैया के खिलाफ मुडा भूमि आवंटन मामले की जांच चल रही है। कुमारस्वामी द्वारा जांच को राजनीतिक प्रतिशोध बताना और राज्य सरकार द्वारा निर्णायक सबूत होने का दावा — दोनों पक्षों के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस किस दिशा में जांच आगे बढ़ाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो पारदर्शिता अनिवार्य है — चाहे वह किसी भी दल का हो। कुमारस्वामी द्वारा CM शिवकुमार पर पुलिस को प्रभावित करने का आरोप लगाना और खड़गे पर पलटवार करना यह दर्शाता है कि कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्ष के बीच यह विवाद महज़ कानूनी नहीं, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक युद्ध बन चुका है। मुडा मामले और अब स्टिंग ऑपरेशन — दोनों एक साथ चलते हुए यह साफ संकेत देते हैं कि राज्य की राजनीति में जवाबदेही और राजनीतिक प्रतिशोध के बीच की रेखा तेजी से धुंधली होती जा रही है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्टिंग ऑपरेशन विवाद क्या है जिसमें कुमारस्वामी का नाम आया है?
यह एक स्टिंग ऑपरेशन से जुड़ा मामला है जिसे कर्नाटक पुलिस जांच रही है और जिसे कथित तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जोड़ा जा रहा है। जांच में आरोपी रितेश पांडे का नाम सामने आया है जिसके बारे में कहा गया कि उसने एक मोबाइल फोन खरीदकर कुमारस्वामी के आवास के पास कथित तौर पर किसी को सौंपा।
कुमारस्वामी ने कर्नाटक पुलिस को क्या चुनौती दी?
कुमारस्वामी ने 2 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कर्नाटक पुलिस को खुली चुनौती दी कि वे उनसे स्टिंग ऑपरेशन मामले में पूछताछ करें। उन्होंने कहा कि उनके दरवाजे हमेशा खुले हैं और उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।
कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री शिवकुमार पर क्या आरोप लगाए?
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए पुलिस पर दबाव डाला। उन्होंने बेंगलुरु पुलिस आयुक्त के बयान को भी सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों का उल्लंघन बताया।
रितेश पांडे कौन हैं और उनका इस मामले से क्या संबंध है?
रितेश पांडे इस स्टिंग ऑपरेशन जांच में सामने आया नाम है। जांच के अनुसार आरोपी ने एक मोबाइल फोन खरीदकर कथित तौर पर कुमारस्वामी के आवास के नजदीक किसी को सौंपा। कुमारस्वामी ने स्पष्ट किया है कि वे रितेश पांडे को नहीं जानते।
इस विवाद में गृह मंत्री प्रियांक खड़गे की क्या भूमिका है?
गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने दावा किया था कि जांचकर्ताओं को स्टिंग ऑपरेशन मामले में निर्णायक सबूत मिले हैं। इस पर कुमारस्वामी ने पलटवार करते हुए कहा कि खड़गे को पहले मुख्यमंत्री शिवकुमार के आवास पर प्रज्वल रेवन्ना के पूर्व ड्राइवर की कथित उपस्थिति पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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