गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में PM मोदी को समर्पित पवित्र स्तूप, रिजिजू ने भूटान नरेश का जताया आभार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। भूटान के गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक पवित्र स्तूप समर्पित किए जाने को उन्होंने अत्यंत सम्मानजनक और ऐतिहासिक कदम बताया। रिजिजू के अनुसार, यह समर्पण भारत भूटान के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों की गहराई को रेखांकित करता है।
समारोह का विवरण
रविवार, 1 नवंबर 2026 को रिजिजू ने गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में आयोजित 108 स्तूपों के निर्माण और अभिषेक समारोह में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व किया। यह भव्य कार्यक्रम ल्हाबाब दुचेन के शुभ अवसर पर आयोजित किया गया था, जिसमें पारंपरिक दुंगचेन (लंबे धार्मिक वाद्य यंत्र) बजाए गए। हजारों स्वयंसेवकों ने एक ही दिन में ये 108 स्तूप खड़े कर ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया।
प्रत्येक स्तूप की ऊँचाई 15 मीटर है और इन्हें 108 108 मीटर की दूरी पर स्थापित किया गया है। ये स्तूप असम सीमा के निकट आई (माउ) नदी के किनारे 11.7 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में बनाए गए हैं।
स्तूप का आध्यात्मिक महत्व
रिजिजू ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "किसी व्यक्ति को एक पवित्र स्तूप समर्पित करना सामान्य बात नहीं है। यह अत्यंत पुण्यदायक, शुभ और आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। बौद्ध धर्म में स्तूप केवल एक स्मारक नहीं होता, बल्कि यह बुद्ध के प्रबुद्ध मन का प्रतीक होता है।" उन्होंने कहा कि इस पवित्र समारोह में भाग लेने का अवसर उनके लिए सौभाग्य की बात है।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के अनुसार, 108 स्तूप परियोजना की परिकल्पना स्वयं भूटान नरेश ने की थी और उन्होंने ही इसके क्रियान्वयन का मार्गदर्शन भी किया।
भारत भूटान संबंधों पर असर
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब भारत और भूटान के बीच विकास सहयोग, व्यापार, ऊर्जा, निवेश, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक क्षेत्रों में साझेदारी और गहरी हो रही है। मंत्रालय के बयान के अनुसार, 31 अक्टूबर से 2 नवंबर 2026 तक अपनी भूटान यात्रा के दौरान रिजिजू ने भूटान नरेश वांगचुक और भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग टोबगे से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में बढ़ते सहयोग की सराहना की।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी परियोजना के लिए लगातार समर्थन दिया है, और उसी के सम्मान में यह स्तूप समर्पित किया गया है।
गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी परियोजना
इस परियोजना का उद्देश्य गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी को वज्रयान बौद्ध धर्म के एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। साथ ही यह भूटान की संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों का भी जीवंत प्रतीक बनेगी। रिजिजू ने इस दौरान परियोजना के लिए भारत के समर्थन को दोहराते हुए कहा कि यह महत्वाकांक्षी पहल भूटान के साथ साथ भारत के पड़ोसी क्षेत्रों के विकास में भी अहम भूमिका निभा सकती है।
आने वाले वर्षों में गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी के विस्तार के साथ भारत भूटान के बीच सांस्कृतिक पर्यटन और धार्मिक कूटनीति के नए आयाम खुलने की संभावना है।