डीएचएफएल लोन घोटाला: ईडी ने दिल्ली-महाराष्ट्र में ₹40 करोड़ की संपत्तियाँ अटैच कीं
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) और इसके प्रवर्तकों कपिल वाधवान तथा धीरज वाधवान से जुड़े बैंक ऋण धोखाधड़ी एवं मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹40 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से अटैच की हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत ईडी की मुख्यालय जांच इकाई द्वारा 2 नवंबर 2026 को अंजाम दी गई।
अटैच संपत्तियों का विवरण
ईडी के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियों में महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के कर्जत में स्थित भूमि के टुकड़े तथा नई दिल्ली के शांतिनिकेतन क्षेत्र में एक आवासीय भूखंड शामिल है। ये संपत्तियाँ वाधवान परिवार के वित्तीय नेटवर्क से सीधे जुड़ी बताई गई हैं।
घोटाले का पैमाना और पृष्ठभूमि
ईडी की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। यह एफआईआर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा 17 बैंकों के एक समूह की ओर से दायर शिकायत पर दर्ज की गई थी। आरोप है कि कपिल वाधवान, धीरज वाधवान और अन्य लोगों ने मिलकर बैंकों के साथ धोखाधड़ी की साजिश रची, जिन्होंने डीएचएफएल को कुल ₹42,871 करोड़ की ऋण सुविधाएँ दी थीं।
जांच एजेंसी के मुताबिक, डीएचएफएल की लेखा पुस्तकों में कथित हेरफेर कर ऋण राशि को अन्यत्र भेजा गया और उसका दुरुपयोग हुआ, जिससे बैंकों के समूह को ₹34,615 करोड़ का नुकसान पहुँचा। गौरतलब है कि यह मामला भारत के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जाता है।
फर्जी खाते और बांद्रा शाखा का खुलासा
जांच में सामने आया कि वाधवान परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से परिजनों, सहयोगियों और कर्मचारियों के ज़रिए करीब 225 कंपनियों को नियंत्रित करता था। डीएचएफएल के फोरेंसिक ऑडिट में ऐसी 66 संस्थाओं की पहचान की गई, जो प्रवर्तकों से जुड़ी थीं और जिन्हें ₹29,100 करोड़ से अधिक का ऋण एवं अग्रिम राशि दी गई थी।
इससे भी आगे, ईडी के अनुसार डीएचएफएल से ₹11,549 करोड़ की राशि 87 कंपनियों को भेजी गई, जो प्रवर्तकों के नियंत्रण में थीं। इसके लिए एक फर्जी बांद्रा शाखा का इस्तेमाल किया गया, जिसके माध्यम से दी गई रकम को लगभग 2.60 लाख फर्जी खुदरा उधारकर्ताओं के नाम पर होम लोन के रूप में दिखाया गया।
विदेशी संपत्ति और अन्य खुलासे
ईडी ने यह भी बताया कि 19 अगस्त 2026 को की गई तलाशी के दौरान वाधवान परिवार की एक विदेशी संपत्ति की बिक्री से जुड़े 5.41 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब ₹51.75 करोड़) की राशि को फ्रीज किया गया था। यह इस मामले की अंतरराष्ट्रीय परतें भी उजागर करता है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि वर्ष 2018-19 के दौरान डीएचएफएल ने ₹40.40 करोड़ की अपराध से अर्जित राशि मुंबई स्थित दो फर्मों — रिलायबल सर्विसेज और मिलेनियम सर्विसेज — को भेजी थी। ये फर्में हर्ष देढ़िया और उनकी पत्नी धारा देढ़िया से जुड़ी बताई गई हैं। ईडी का कहना है कि यह भुगतान उन सेवाओं के बदले किया गया जो कभी प्रदान ही नहीं की गईं।
आरोपपत्र और आगे की कार्रवाई
ईडी पहले ही मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत में कपिल वाधवान और धीरज वाधवान समेत 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इसके बाद 5 अन्य आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र भी दायर किया गया है। ताज़ा अटैचमेंट कार्रवाई से स्पष्ट है कि जांच की परिधि लगातार व्यापक होती जा रही है।