3 नवंबर 2026
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डीएचएफएल लोन घोटाला: ईडी ने दिल्ली-महाराष्ट्र में ₹40 करोड़ की संपत्तियाँ अटैच कीं

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डीएचएफएल लोन घोटाला: ईडी ने दिल्ली-महाराष्ट्र में ₹40 करोड़ की संपत्तियाँ अटैच कीं

सारांश

डीएचएफएल घोटाले में ईडी की जांच और गहरी होती जा रही है — ₹40 करोड़ की ताज़ा अटैचमेंट, ₹51.75 करोड़ की विदेशी संपत्ति फ्रीज़, और 2.60 लाख फर्जी खाते। ₹34,615 करोड़ के नुकसान वाले इस मामले में वाधवान परिवार के 225 कंपनियों के जाल ने भारतीय बैंकिंग व्यवस्था को हिला दिया था।

मुख्य बातें

ईडी ने 2 नवंबर 2026 को डीएचएफएल मामले में ₹40 करोड़ मूल्य की संपत्तियाँ दिल्ली के शांतिनिकेतन और महाराष्ट्र के कर्जत में अटैच कीं।
17 बैंकों के समूह ने डीएचएफएल को ₹42,871 करोड़ का ऋण दिया था; कथित हेरफेर से बैंकों को ₹34,615 करोड़ का नुकसान हुआ।
फोरेंसिक ऑडिट में 66 प्रवर्तक-संबद्ध संस्थाओं को ₹29,100 करोड़ से अधिक का ऋण दिए जाने की पुष्टि हुई।
फर्जी बांद्रा शाखा के ज़रिए ₹11,549 करोड़ की राशि को लगभग 2.60 लाख काल्पनिक उधारकर्ताओं के नाम पर दिखाया गया।
19 अगस्त 2026 की तलाशी में वाधवान परिवार की विदेशी संपत्ति बिक्री से जुड़े $54.1 लाख (लगभग ₹51.75 करोड़ ) फ्रीज किए गए।
ईडी मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत में 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र और 5 अन्य के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) और इसके प्रवर्तकों कपिल वाधवान तथा धीरज वाधवान से जुड़े बैंक ऋण धोखाधड़ी एवं मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹40 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से अटैच की हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत ईडी की मुख्यालय जांच इकाई द्वारा 2 नवंबर 2026 को अंजाम दी गई।

अटैच संपत्तियों का विवरण

ईडी के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियों में महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के कर्जत में स्थित भूमि के टुकड़े तथा नई दिल्ली के शांतिनिकेतन क्षेत्र में एक आवासीय भूखंड शामिल है। ये संपत्तियाँ वाधवान परिवार के वित्तीय नेटवर्क से सीधे जुड़ी बताई गई हैं।

घोटाले का पैमाना और पृष्ठभूमि

ईडी की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। यह एफआईआर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा 17 बैंकों के एक समूह की ओर से दायर शिकायत पर दर्ज की गई थी। आरोप है कि कपिल वाधवान, धीरज वाधवान और अन्य लोगों ने मिलकर बैंकों के साथ धोखाधड़ी की साजिश रची, जिन्होंने डीएचएफएल को कुल ₹42,871 करोड़ की ऋण सुविधाएँ दी थीं।

जांच एजेंसी के मुताबिक, डीएचएफएल की लेखा पुस्तकों में कथित हेरफेर कर ऋण राशि को अन्यत्र भेजा गया और उसका दुरुपयोग हुआ, जिससे बैंकों के समूह को ₹34,615 करोड़ का नुकसान पहुँचा। गौरतलब है कि यह मामला भारत के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जाता है।

फर्जी खाते और बांद्रा शाखा का खुलासा

जांच में सामने आया कि वाधवान परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से परिजनों, सहयोगियों और कर्मचारियों के ज़रिए करीब 225 कंपनियों को नियंत्रित करता था। डीएचएफएल के फोरेंसिक ऑडिट में ऐसी 66 संस्थाओं की पहचान की गई, जो प्रवर्तकों से जुड़ी थीं और जिन्हें ₹29,100 करोड़ से अधिक का ऋण एवं अग्रिम राशि दी गई थी।

इससे भी आगे, ईडी के अनुसार डीएचएफएल से ₹11,549 करोड़ की राशि 87 कंपनियों को भेजी गई, जो प्रवर्तकों के नियंत्रण में थीं। इसके लिए एक फर्जी बांद्रा शाखा का इस्तेमाल किया गया, जिसके माध्यम से दी गई रकम को लगभग 2.60 लाख फर्जी खुदरा उधारकर्ताओं के नाम पर होम लोन के रूप में दिखाया गया।

विदेशी संपत्ति और अन्य खुलासे

ईडी ने यह भी बताया कि 19 अगस्त 2026 को की गई तलाशी के दौरान वाधवान परिवार की एक विदेशी संपत्ति की बिक्री से जुड़े 5.41 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब ₹51.75 करोड़) की राशि को फ्रीज किया गया था। यह इस मामले की अंतरराष्ट्रीय परतें भी उजागर करता है।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि वर्ष 2018-19 के दौरान डीएचएफएल ने ₹40.40 करोड़ की अपराध से अर्जित राशि मुंबई स्थित दो फर्मों — रिलायबल सर्विसेज और मिलेनियम सर्विसेज — को भेजी थी। ये फर्में हर्ष देढ़िया और उनकी पत्नी धारा देढ़िया से जुड़ी बताई गई हैं। ईडी का कहना है कि यह भुगतान उन सेवाओं के बदले किया गया जो कभी प्रदान ही नहीं की गईं।

आरोपपत्र और आगे की कार्रवाई

ईडी पहले ही मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत में कपिल वाधवान और धीरज वाधवान समेत 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इसके बाद 5 अन्य आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र भी दायर किया गया है। ताज़ा अटैचमेंट कार्रवाई से स्पष्ट है कि जांच की परिधि लगातार व्यापक होती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

615 करोड़ का नुकसान केवल वाधवान परिवार की चालाकी का नहीं, बल्कि नियामकीय निगरानी की विफलता का भी प्रमाण है। ताज़ा अटैचमेंट और विदेशी संपत्ति फ्रीज़ दिखाती है कि धन सीमाओं के पार भेजा गया — ऐसे में अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सहयोग की गति पर भी नज़र रखनी होगी। जब तक आरोपियों को दोषसिद्धि और पीड़ित बैंकों को वास्तविक वसूली नहीं मिलती, आरोपपत्रों की संख्या महज़ प्रक्रियागत उपलब्धि ही रहेगी।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने डीएचएफएल मामले में ताज़ा क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने 2 नवंबर 2026 को पीएमएलए के तहत डीएचएफएल और वाधवान प्रवर्तकों से जुड़ी ₹40 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से अटैच की हैं। इनमें महाराष्ट्र के कर्जत में भूमि और नई दिल्ली के शांतिनिकेतन में एक आवासीय भूखंड शामिल हैं।
डीएचएफएल घोटाले में बैंकों को कितना नुकसान हुआ?
जांच एजेंसी के अनुसार, 17 बैंकों के समूह ने डीएचएफएल को ₹42,871 करोड़ की ऋण सुविधाएँ दी थीं। लेखा पुस्तकों में कथित हेरफेर और राशि के दुरुपयोग के चलते इन बैंकों को ₹34,615 करोड़ का नुकसान हुआ।
फर्जी बांद्रा शाखा क्या थी और इसका इस्तेमाल कैसे हुआ?
ईडी के अनुसार, डीएचएफएल के प्रवर्तकों ने एक फर्जी बांद्रा शाखा के ज़रिए अपने नियंत्रण वाली 87 कंपनियों को ₹11,549 करोड़ भेजे। इस राशि को लगभग 2.60 लाख काल्पनिक खुदरा उधारकर्ताओं के नाम पर होम लोन के रूप में दर्शाया गया ताकि नियामकीय जांच से बचा जा सके।
वाधवान परिवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कहाँ तक पहुँची है?
ईडी मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत में कपिल वाधवान और धीरज वाधवान सहित 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इसके बाद 5 अन्य आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र भी दायर किया जा चुका है।
क्या डीएचएफएल मामले में विदेशी संपत्तियाँ भी जब्त की गई हैं?
हाँ, 19 अगस्त 2026 को की गई तलाशी कार्रवाई के दौरान वाधवान परिवार की एक विदेशी संपत्ति की बिक्री से जुड़े 54.1 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹51.75 करोड़) की राशि फ्रीज की गई थी, जो इस मामले के अंतरराष्ट्रीय आयाम को रेखांकित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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